संकेत साहित्य समिति का 46वां स्थापना दिवस मनाया गया, राजभाषा हिंदी पर परिचर्चा और काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने रखे विचार
शहर सत्ता/रायपुर। (46th foundation day)संकेत साहित्य समिति का 46वां स्थापना दिवस शुक्रवार को वृंदावन हॉल, रायपुर में हुआ। इस मौके पर डॉ.कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड को ‘संकेत साहित्य रत्न’ सम्मान से नवाज़ा गया। राजभाषा हिंदी पर केंद्रित परिचर्चा एवं सरस काव्य गोष्ठी के साथ मनाया गया। संकेत साहित्य समिति के संस्थापक एवं प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने स्वागत उद्बोधन में हिंदी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की संवाहिका भी है, जो देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों लोगों को जोड़ती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शशांक शर्मा ने कहा कि संपर्क भाषा के रूप में हिंदी के सामने कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदी के समक्ष चुनौती इस कारण है कि अंग्रेजी को ज्ञान की भाषा के रूप में अधिक महत्व दिया जाता है। उन्होंने साहित्य में हिंदी के सरलीकरण को समय की आवश्यकता बताया। मुख्य अतिथि डॉ. कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड ने हिंदी के इतिहास और महत्व पर विचार रखते हुए कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी स्मृतियों, सांस्कृतिक चेतना, संवेदना और सामूहिक विचारधारा की भाषा भी है।

उन्होंने राजभाषा हिंदी को केंद्र में रखकर आयोजित कार्यक्रम को साहित्यिक चेतना और रचनात्मक संवाद का उदाहरण बताया। डॉ. चितरंजन कर ने कहा कि भाषा संस्कृति और चेतना का स्वरूप होती है। व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने हिंदी के वैश्विक विस्तार पर प्रकाश डालते हुए इसके भविष्य को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. रेशमा अंसारी ने वर्तमान परिवेश में हिंदी की भूमिका पर चर्चा करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से हिंदी के विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया और देवनागरी लिपि के संरक्षण पर जोर दिया।
कार्यक्रम में कोलकाता से पहुंचे भाषाविद्, साहित्यकार एवं ‘साहित्य त्रिवेणी’ के संपादक डॉ. कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड मुख्य अतिथि रहे। छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। भाषाविद् एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चितरंजन कर, व्यंग्यकार गिरीश पंकज और हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रेशमा अंसारी सारस्वत अतिथि के रूप में मौजूद रहे।






