आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने प्रेस कांफ्रेंस में दी अहम जानकारी, बताया आयोग के सामने करीब 74 हजार मामले आए हैं, इनमें से करीब 900 मामले अभी पेंडिंग हैं, ज्यादातर पिछले एक-दो साल के मामले
शहर सत्ता/रायपुर। (Chhattisgarh State Human Rights Commission)सोमवार को छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग के कामकाज और सामने आए मामलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साल 2000 से 2026 तक आयोग के सामने करीब 74 हजार मामले आए हैं। इनमें से करीब 900 मामले अभी पेंडिंग हैं। इनमें ज्यादातर पिछले एक-दो साल के मामले हैं। इनके जल्द निराकरण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग ने अपनी स्थापना से अब तक 74 हजार से अधिक मामलों का निराकरण किया है। आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य पुनर्गठन के बाद आयोग का गठन 16 अप्रैल 2001 को हुआ था। मानवाधिकारों के प्रचार के लिए आयोग विश्वविद्यालयों में कार्यक्रम करता है। हर साल देशभर से छात्र इंटर्नशिप करने आते हैं। पिछले 5 साल में 631 छात्र लाभान्वित हुए हैं, जिसमें 2025-26 में सबसे ज्यादा 168 छात्र शामिल हैं।

आयोग अर्धन्यायिक प्रकृति का है। पीड़ित व्यक्ति लिखकर, स्वयं उपस्थित होकर या डाक-ईमेल के माध्यम से आवेदन करते हैं। 16 अप्रैल 2001 से 15 मार्च 2026 तक आयोग ने 74 हजार से अधिक आवेदनों का निराकरण किया है। वर्तमान में मात्र 853 प्रकरण ही प्रक्रियाधीन हैं, जबकि हर साल औसतन 2500 से अधिक मामले आते हैं।
श्री नायक ने बताया कि आयोग की अनुशंसा पर शासन ने कई मामलों में मुआवजा भी दिया है। पिछले वर्ष दुर्ग में विचाराधीन बंदी दुर्गेश यादव और बुद्ध पल्लव की जेल में मौत पर 5-5 लाख, वहीं चिकित्सीय लापरवाही में राखी बोरकर और उनके नवजात की मौत पर 5 लाख मुआवजे का आदेश जारी हुआ। एक अन्य मामले में वेतन न मिलने की शिकायत पर शिक्षिका को आयोग की पहल पर 3,29,080 रुपये का भुगतान मिला।

इन शिकायतों पर फौरी कार्रवाई
कुष्ठ रोग से संबंधित जिलों की स्वास्थ अधिकारी द्वारा परीक्षण करने पर 1500 नये मरीज मिले। सभी का उपचार सुनिश्चित किया गया है। वह अतिशीघ्र रोग मुक्त हो जायेगें। रायपुर जिले के सभी 10 जोन बिलासपुर जिले के 8 जोन में जिले के विभिन्न कॉलेजों के विधिक छात्र-छात्राओं के जरिए लगभग 8000 सफाई कर्मियों का सर्वे कराया गया। 336 के निवास में शौचालय की व्यवस्था नही है। 319 कर्मचारियों के माता-पिता की वृद्धा पेंशन विधवा पेंशन की समस्या। 1907 शासन द्वारा प्रदत आधार कार्ड वोटर कार्ड राशन कार्ड आयुष्मान कार्ड श्रम कार्ड एवं हेल्थ कार्ड नहीं बनने की समस्या। 749 सुरक्षा सफाई किट प्रदान नहीं किया जाना। 165 कर्मचारियों के बच्चों में नशा से संबंधित समस्या को दूर किया गया। 1076 मामले ठेकेदार द्वारा एटीएम पास बुक जमा रखने, वेतन कम और विलंब से दिये जाने की समस्या। लगभग 2387 कर्मचारियों को PMJJBY और PMSBY योजना का लाभ नहीं मिला है। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के तहत वृद्धाश्रमों और योजनाओं को लेकर सभी जिलों से जानकारी जुटाई जा रही है।
कॉलेज स्टूडेंट्स का आयोग है शुक्रगुज़ार
मानव अधिकार संरक्षण के तहत सफाई कर्मियों की समस्याओं पर राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों जैसे छत्तीसगढ़ कॉलेज, Amity University, Hidayatullah National Law University, Kusum Dai Dapke Vidhi Mavidyalaya, Kalinga University, Guru Ghasidas Central University, Pt. Ravishankar Shukla University के छात्र/छात्राओं ने शिद्दत से दिए गए सर्वे कार्य को पूर्ण किया उसके लिए आयोग ने सभी की प्रशंसा की और धन्यवाद दिया।
40-45% मामले सामाजिक बहिष्कार से जुड़े
आयोग के अनुसार, कुल मामलें में करीब 40 से 45 प्रतिशत मामले सामाजिक बहिष्कार से जुड़े हैं। इनमें से करीब 1 प्रतिशत मामलों में ही कार्रवाई की स्थिति बनती है। ऐसे मामलों में जरूरत के अनुसार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, समझाइश या अपराध दर्ज करने की कार्रवाई की गई है।
ट्रक और यात्री बस चालकों के लिए सजग
25 जून 2025 को परिवहन विभाग के अफसरों के साथ बैठक कर ट्रक चालकों के नेत्र परीक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण और उनका बीमा कराए जाने विशेष तौर पर जिन वाहन मालिकों के पास 10 या उससे अधिक वाहन हो उनके चालकों का ग्रुप इंश्योरेंस कराए जाने एवं जिन चालकों को 10 या उससे अधिक वर्षों का अनुभव है और उनका कोई एक्सीडेंट का रिकॉर्ड नहीं है। उन्हें प्रोत्साहन और सम्मान दिये जाने के संबंध में निर्देश दिए गए।
जेल, थानों, छात्रावासों का निरीक्षण
आयोग समय-समय पर जेल, अस्पताल, थाना, बाल संप्रेक्षण गृह, आदिवासी छात्रावास, शासकीय शाला, वृद्धाश्रम और नारी निकेतन का निरीक्षण कर अनुशंसा करता है। जिले में निरीक्षण के दौरान ट्रेजरी ऑफीसरों को लंबित पेंशन प्रकरणों का शीघ्र निराकरण हेतु निर्देशित किया जाकर 120 पेंशन प्रकरणों का निराकरण किया। शेष प्रकरणों में गंभीरता पूर्वक शीघ्र कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया। हाल के वर्षों में राजनांदगांव, दुर्ग, कोरबा, बिलासपुर, कांकेर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंडागांव और रायगढ़ सहित कई जिलों का निरीक्षण किया गया है।





