पांच विभाग मिलकर बनाएंगे कार्ययोजना, ग्रामीण इलाकों में चलेंगी बसें, 10 करोड़ करेंगे खर्च, आरटीओ में रहेगा हर वाहन मालिक का मोबाइल नंबर,
शहर सत्ता/रायपुर। (CM held a review meeting) हादसे रोकने ब्लैक स्पॉट और इलाज का सिस्टम दुरुस्त करने के मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परिवहन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा में ‘जीरो फेटेलिटी’ का लक्ष्य रखते हुए परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण और नगरीय निकायों को मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में राज्य के 23 ब्लैक स्पॉट पर सुधार की कार्रवाई की समीक्षा की गई। सड़क हादसे में मौत रोकने के लिए अब सिर्फ दुर्घटना वाले स्थानों को सुधारने तक सीमित नहीं रहा जाएगा। हादसा होने से पहले उसकी रोकथाम, दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद घायल को अस्पताल पहुंचाने और वहां समय पर इलाज तक पूरी व्यवस्था को एक साथ मजबूत किया।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत बस्तर-सरगुजा में अभी 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसें चल रही हैं। इन बसों के संचालन पर करीब 10 करोड़ रुपए सालाना खर्च हो रहे हैं। अब योजना को उन इलाकों तक बढ़ाने की तैयारी है, जहां अभी नियमित परिवहन सुविधा नहीं है। इनमें गरियाबंद, मैनपुर, बलौदाबाजार, मोहला-मानपुर, कोरबा, पेंड्रा, कसडोल के साथ कवर्धा और बेमेतरा के पहुंचविहीन गांवों में नए मार्ग शुरू करने की तैयारी है।
सुधर के प्रमुख निर्देश
0 मुख्यमंत्री ने दुर्घटना की सूचना से लेकर एंबुलेंस के पहुंचने और घायल को अस्पताल में उपचार मिलने तक विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया।
0 वाहनों की फिटनेस जांच, हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट, ई-ट्रैक के जरिए कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट और लंबित ई-चालानों की वसूली की स्थिति भी देखी गई।
0 वाहनों की फिटनेस जांच में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पर्यटन स्थलों तक परिवहन कनेक्टिविटी बेहतर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
0 वाहन मालिक का मोबाइल नंबर बदल गया और आरटीओ के रिकॉर्ड में पुराना नंबर ही दर्ज है। इस वजह से राज्यभर में 100 करोड़ से ज्यादा का ई चालान पेंडिंग है। सारथी एप में मोबाइल नंबर खुद अपडेट करने की व्यवस्था तैयार कर रहा है।
0 बैठक में राज्य के 23 ब्लैक स्पॉट पर सुधार की कार्रवाई की समीक्षा की गई। हादसा होने से पहले उसकी रोकथाम, दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद घायल को अस्पताल पहुंचाने और वहां समय पर इलाज तक पूरी व्यवस्था को एक साथ मजबूत किया जाएगा।





