गूगल प्ले स्टोर से हटाए गए 180 से ज्यादा ऐप्स, जानिए क्यों?

अगर आप भी गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) से ऐप्स डाउनलोड करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। गूगल ने हाल ही में 180 से अधिक ऐप्स को हटा दिया है। यह कार्रवाई एक बड़े फ्रॉड के खुलासे के बाद की गई, जिसमें धोखेबाजों ने नकली ऐप्स बनाकर करोड़ों यूजर्स को प्रभावित किया। इस फ्रॉड के कारण 5 करोड़ 60 लाख से ज्यादा डाउनलोड प्रभावित हुए।

‘ऐड फ्रॉड स्कीम’
गूगल को पता चला कि कुछ ऐप्स ‘ऐड फ्रॉड स्कीम’ चला रहे थे। यह स्कीम वायरस की तरह नहीं होती, बल्कि इनका उद्देश्य विज्ञापन देने वाली कंपनियों को धोखा देना होता है। ये ऐप्स नकली तरीके से दिखाते हैं कि उनके विज्ञापन बड़े पैमाने पर देखे जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता में ऐसा नहीं होता।

यूजर्स का अनुभव भी हुआ खराब
इन ऐप्स को डाउनलोड करने वाले यूजर्स को अत्यधिक विज्ञापन दिखाए जाते थे, जिससे वे परेशान हो जाते थे और ऐप को अनइंस्टॉल करने का विकल्प खोजने लगते थे। यह न केवल यूजर्स बल्कि गूगल प्ले स्टोर की विश्वसनीयता के लिए भी नुकसानदायक था।

धोखेबाजों की चालाकी
धोखेबाजों ने ऐसे ऐप्स बनाए जो असली दिखते थे और लोकप्रिय कैटेगरी में सूचीबद्ध थे। इनमें कुछ ऐप्स तो ऐसे थे जिनका कोई आइकन या ओपन बटन भी नहीं था, जिससे यूजर्स के लिए उन्हें पहचानना और हटाना मुश्किल हो गया।

SUKANT RAJPUT

जन्म 13 अगस्त 1973 को राजधानी रायपुर में हुआ। मेरी जड़ें उत्तर प्रदेश ग्राम चौरंग, कुंडा जिला प्रतापगढ़ से जुडी हैं। मुझे शिक्षक माता-पिता, विख्यात सर्प विशेषज्ञ डॉ अर्जुन सिंह रंगीला का पौत्र और छत्तीसगढ़ राजिम-धमतरी क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर राम पाल सिंह बिसेन का नाती होने का गौरव प्राप्त है। स्कूल से लेकर कॉलेज MA(PUB.ADD.) BJMC तक की शिक्षा रायपुर में ही ग्रहण किया। एनसीसी एयर विंग से 'ए' 'बी' और 'सी' सर्टिफिकेट तीन नेशनल कैंप का तत्कालीन मध्य प्रदेश में रायपुर, भोपाल और इंदौर का नेतृत्व किया। रायपुर थ्री एमपी (अब सीजी) एयर स्क्वॉर्डर्न से सर्वाधिक ग्लाइडिंग फ़्लाइंग की शॉर्टिज करके 1995 में ग्लाइडर पायलट यतेंद्र सिंह राणा सर की कमान में सोलो फ़्लाइंग किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में मातृ संसथान दैनिक हरिभूमि में वर्ष 2000 में डेस्क में विज्ञप्ति बनाने से शुरुआत हुई। लगभग 15 साल हरिभूमि, फिर इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनल स्टैंडर्ड वर्ल्ड 'वाच' चैनल, पत्रिका, दबंग दुनिया, समवेत शिखर, अमनपथ और जनता से रिश्ता मिड डे अख़बार में भी विभिन्न पदों पर कार्यरत था। वर्तमान में शहर सत्ता साप्ताहिक अख़बार में बतौर प्रधान संपादक हूं।

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