कलेक्टर साहब; ये क्या हो रहा है…?

  • प्रदेश के अधिकांश तहसील कार्यालयों में भूमाफिया चला रहे गिरोह

  • फॉरेंसिक लैब टेस्ट में फर्जी हस्ताक्षर और मृत्यु प्रमाणपत्र की तस्दीक

  • रजिस्ट्री जमीन को तहसीलदार और पटवारी ने मानने से किया इंकार

  • कूट रचना और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले के नाम जमीन नामांतरण

  • पीड़ित दंपत्ति अब इंसाफ़ के लिए दिवानी न्यायालय की शरण में है

  • अब अपनी ही जमीन के लिए लंबी विधिक प्रक्रिया और वाद व्यय झेल रहे

कोई अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए पाई पाई पैसे जोड़कर एक जमीन का टुकड़ा खरीदे और उस पर अचानक चंद सालों बाद गिद्ध दृष्टि रखने वाले भूमाफिया फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रथम रजिस्ट्री जमीन को अपना बताने लगे तब कैसा लगेगा? मान लीजिए तिनका तिनका जोड़कर बुढ़ापे के लिए अपना एक आशियाना बनाने का ख्वाब संजोने वाले परिवार पर तब क्या बीतेगी जब कोई अनचाहा शख्स उनकी जमीन को अपना बताने लगे? यह सवाल किसी संवेदनशील व्यक्ति या आमजनों से पूछकर तो देखिए। तुर्रा यह कि लाखों रूपये खर्च कर पहली रजिस्ट्री करने वाले की फरियाद सुने बिना अगर पटवारी और तहसीलदार महज बेनामी वसीयत के कागजात के आधार पर जमीन का नामांतरण धंधेबाज के नाम कर दे तो आप टूट जायेंगे। मानसिक और आर्थिक तौर पर टूट चुका पीड़ित या तो लंबी विधिक प्रक्रिया में उलझकर रह जाएगा। नहीं तो कोई घातक कदम उठाने मजबूर हो जाएगा। राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ की अधिकांश तहसीलों में कमोबेश ऐसे किस्सों की भरमार है। खासकर राजधानी रायपुर और आसपास के तहसील दफ्तर में ऐसे मामले आम हैं। पीड़ितों की आवाज तहसीलों में ही दबकर रह जाती है। वो खुशकिस्मत है जिन्हें कमिश्नर या कलेक्टर सहाब गंभीरता से लेते हैं तब उन्हें न्याय मिलता है और महकमे को बदनाम करने वाले पटवारी तहसीलदार को लताड़। हालांकि जरूरत है ऐसे जिम्मेदार अफसर और भू माफिया गैंग को सख्त समझाइश देने वाले कलेक्टर की।

शहर सत्ता/रायपुर। मामला ग्राम नीलजा तहसील सारागांव के पास का है। दो महिलाओं श्रीमती संगीता तिवारी और श्रीमती पूर्णिमा सिंह के नाम खरीदी गई ढाई-ढाई एकड़ जमीन पटवारी, तहसीलदार की अनदेखी से विवाद में फंस गई है। दोनों ही महिलाओं के पतियों ने अपनी पत्नियों के नाम पर उक्त भूखंड ग्रीन्डले फारेस्ट इण्डिया लिमिटेड कंपनी की थी। कंपनी के दो डायरेक्टर स्वर्ण सिंह तथा संतोष कुमार सिकदर हैं। राजस्व अभिलेख में भी विधिसम्मत वर्णित भूमि खसरा नंबर 420 रकबा 1.२२२ हेक्टेयर है। खसरा नंबर 424 रकबा 0.356 हेक्टेयर कुल रकबा 1.784 हेक्टेयर है। कंपनी ने यह जमीन कृषकों से अपनी कंपनी के नाम क्रय किया था।
ग्रीन्डले फारेस्ट इण्डिया लिमिटेड के डायरेक्टर संतोष सिकदर और स्वर्ण सिंह द्वारा 9 सितंबर 2015 को बोर्ड ऑफ रेजुलेशन पास करके कंपनी की सुमित कुमार ठाकुर पिता अशोक कुमार निवासी 09 गुरुनानक, रेवेन्यू आनंद पेट्रोल पंप के सामने अमृतसर(पंजाब)को अधिकृत करते हुए खसरा नंबर 420, 424 और 427 कुल रकबा 1.784 हेक्टेयर को विक्रय करने अधिकृत किया था। बोर्ड ऑफ रेजुलेशन के आधार पर ही श्रीमती संगीता तिवारी पति महेंद्र कुमार तिवारी और श्रीमती पूर्णिमा सिंह पति एमपी सिंह निवासी अवधपुरी कॉलोनी भाठागांव रायपुर ने पंजीकृत विक्रय विलख दिनांक 15/09/2015 के माध्यम से क्रय किया है।

ऐसे पैदा हो गया जमीन का एक नया दावेदार
जमीं रजिस्ट्री करने के 4 से 5 दिन बाद महेंद्र कुमार तिवारी जब उक्त भूखंड को देखने गए तो स्थानीय निवासी ने बताया आपलोगों की जमीन को खुद की मालकियत बताने की सुचना दी। जानकारी से हड़बड़ाए दोनों रजिस्ट्रीकर्ता ऑनलाइन देखे तो पता चला कि राजेश कुमार दास पिता गोविन्द चंद दास निवासी चुना भट्टी रायपुर फर्जी वसीयतनामा दिनांक 15/05/2011 जो अपंजीकृत है और मात्र नोटराइज दस्तावेज और संतोष कुमार सिकदर पिता स्वर्गीय धरमदास के वसीयतनामा के आधार पर उक्त भूखंड को खुद मालिक बताया गया था। इतना ही नहीं सिर्फ वसीयतनामा के आधार पर खातेदार संतोष सिकदर की मौत 15/04/2013 को होना बताया गया।
कूट रचना कर जमीन के असली मालिक से रजिस्ट्री करने का दावा दस्तावेज प्रस्तुत कर पटवारी और तहसीलदार को पति-पत्नी की रजिस्ट्री को रद्द करने और जमीन का असली मालिक खुद को बताने दो दस्तावेज प्रस्तुत किए। मानो पटवारी और तहसीलदार भी कथित व्यक्ति को सही मानने तत्पर बैठे थे उन्होंने फर्जी हस्ताक्षर वाले कागजात और मृत्यु प्रमाणपत्र को सहीं मान लिया। इस अप्रत्याशित दावेदार और तहसीलदार तथा पटवारी के व्यवहार से हतप्रभ दोनों महिला खरीदार और दोनों के पतियों ने तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री दस्तावेज और डे राशि समेत कई साक्ष्य दिखाए पर अतिरिक्त तहसीलदार धरसींवा(अब सारागांव)और पटवारी ने आनन फानन में कंपनी रेजुलेशन एक्ट की अनदेखी करते हुए राजेश कुमार दास के नाम भूखंड नामांतरण कर दिया।

पुलिस से लेकर जिला प्रशासन तक नहीं हुई सुनवाई

दोनों ही महिला खरीदार के पतियों द्वारा कमिश्नर कार्यालय, पुलिस अधिकारियों और ADM तक गुहार लगाई हस्ताक्षर तथा असली मालिक के जिनसे उन्होंने जमीन खरीदा था उनका मृत्यु प्रमाणपत्र झूठा होने का दावा किया पर सब जगह उन्हें निराशा हाथ लगी। बता दें कि ग्रीन्डले कंपनी है और ऐसे में कंपनी की भूमि कंपनी के डायरेक्टर्स द्वारा संयुक्त रूप से अथवा बोर्ड ऑफ़ रेजुलेशन पास कर व्ययन या अंतरण किया जा सकता है। नियमतयः कंपनी की जमीन किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं होती। ऐसे में संतोष सिकदर को इसे किसी को वसीयत नहीं किया जा सकता।

सरकारी लैब से जांच के बाद हुआ झूठ का खुलासा

पुलिस फॉरेंसिक लैब से अधिकृत अधिकारी विशेषज्ञ द्वारा हस्ताक्षर का फर्जी होना बताया गया है। और मृत्यु प्रमाणपत्र भी झूठा साबित हो गया है। क्योंकि राजेश दास के मुताबिक संतोष सिकदर की मृत्यु 15/04/2013 को होना बताया गया था। जबकि कंपनी रेजुलेशन (विक्रय करने हेतु संकल्प पत्र)में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा जारी रेजुलेशन में संतोष कुमार सिकदर ने संगीता तिवारी और पूर्णिमा सिंह को भूमि क्रय के लिए दिनांक 17/02/02015 ने हस्ताक्षरित और निष्पादित किया है। बोर्ड ऑफ़ रेजुलेशन भी 09/09/2015 में भी निष्पादन किया गया है।

सुलगते सवाल

  • संतोष सिकदर की मृत्यु प्रमाण पत्र पखांजूर छत्तीसगढ़ से कैसे बन गया ?
  • पखांजूर छत्तीसगढ़ के मृत्यु प्रमाण पत्र में 15 अप्रेल 2013 बताई गई है
  • जबकि पश्चिम बंगाल के ग्राम पंचायत मोहनपुर के मृत्यु प्रमाण पत्र में 09/10/2025 है
  • क्यों तहसीलदार, पटवारी और एसडीएम सिर्फ वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण किये ?
  • फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जी हस्ताक्षर बनाने और फर्जी गवाह पर कार्रवाई होगी?

  • SUKANT RAJPUT

    जन्म 13 अगस्त 1973 को राजधानी रायपुर में हुआ। मेरी जड़ें उत्तर प्रदेश ग्राम चौरंग, कुंडा जिला प्रतापगढ़ से जुडी हैं। मुझे शिक्षक माता-पिता, विख्यात सर्प विशेषज्ञ डॉ अर्जुन सिंह रंगीला का पौत्र और छत्तीसगढ़ राजिम-धमतरी क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर राम पाल सिंह बिसेन का नाती होने का गौरव प्राप्त है। स्कूल से लेकर कॉलेज MA(PUB.ADD.) BJMC तक की शिक्षा रायपुर में ही ग्रहण किया। एनसीसी एयर विंग से 'ए' 'बी' और 'सी' सर्टिफिकेट तीन नेशनल कैंप का तत्कालीन मध्य प्रदेश में रायपुर, भोपाल और इंदौर का नेतृत्व किया। रायपुर थ्री एमपी (अब सीजी) एयर स्क्वॉर्डर्न से सर्वाधिक ग्लाइडिंग फ़्लाइंग की शॉर्टिज करके 1995 में ग्लाइडर पायलट यतेंद्र सिंह राणा सर की कमान में सोलो फ़्लाइंग किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में मातृ संसथान दैनिक हरिभूमि में वर्ष 2000 में डेस्क में विज्ञप्ति बनाने से शुरुआत हुई। लगभग 15 साल हरिभूमि, फिर इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनल स्टैंडर्ड वर्ल्ड 'वाच' चैनल, पत्रिका, दबंग दुनिया, समवेत शिखर, अमनपथ और जनता से रिश्ता मिड डे अख़बार में भी विभिन्न पदों पर कार्यरत था। वर्तमान में शहर सत्ता साप्ताहिक अख़बार में बतौर प्रधान संपादक हूं।

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