The gamble to make Dilesh shahu backfired? दिलेश साहू को चमकाने का दांव पड़ा उल्टा?
रायपुर के श्याम सिनेमा सहित प्रदेश के अन्य सिनेमाघरों में छत्तीसगढ़ी फिल्म “गुईंया 2” का प्रदर्शन जारी है। जहां पहले भाग “गुईंया” में अमलेश नागेश ने अपनी दमदार भूमिका से दर्शकों को प्रभावित किया था, वहीं इस बार निर्देशन की कमान खुद संभालते हुए उन्होंने दिलेश साहू को फिल्म का नया चेहरा बनाया है। हालांकि, दिलेश साहू का अभिनय दर्शकों के बीच कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ सका, जिससे सोशल मीडिया पर भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

फिल्म की कहानी एक बार फिर गांव में नशे की समस्या और बदले की भावना के इर्द-गिर्द घूमती है। लेकिन एक्शन सीन को ज्यादा तरजीह देने के चलते कहानी में दम और दिशा दोनों की कमी साफ नजर आती है। संपादन और पटकथा भी कमजोर रही, जिससे फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ गई। प्रकाश अवस्थी, जीत शर्मा और अनिकृति चौहान जैसे कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद उनका योगदान केवल अतिथि भूमिका जैसा महसूस हुआ।

गीत-संगीत के मोर्चे पर भी फिल्म ने दर्शकों को निराश किया। पहले भाग का हिट गाना “काने के बाली” ही इस बार भी थोड़ी पहचान बना पाया, जबकि बाकी गाने दर्शकों को बांधने में असफल रहे। हालांकि सिनेमाटोग्राफी अच्छी रही लेकिन निर्देशन और प्रस्तुतिकरण में कसावट की कमी नजर आई।

कुल मिलाकर, “गुईंया 2” दिलेश साहू को स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है, लेकिन फिलहाल यह दांव कुछ कमजोर साबित होता दिख रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म कितनी लंबी पारी खेल पाती है।







