तस्करों को बरसात का रहता है इंतजार, उफनती नदी के सहारे ओडिशा भेजते हैं बेशकीमती लकड़ी, टाइगर रिजर्व की स्मार्ट सर्विलांस ने खोला अंतरराज्यीय सागौन तस्करी का राज, तीन आरोपी गिरफ्तार
शहर सत्ता/रायपुर/गरियाबंद। (Udanti-Sitanadi Tiger Reserve)उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के जंगलों में बेशकीमती करोड़ों की सागौन लकड़ी तस्करों पर स्मार्ट सर्विलांस टीम की नजर लंबे समय से बनी हुई है। बरसात शुरू होते ही जंगलों से काटी गई सागौन की लकड़ियों को तेज बहाव वाले नदी के रास्ते ओडिशा तक पहुंचाने की कथित योजना ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। लाखों-करोड़ों रुपये की वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले इस नेटवर्क पर अब वन विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
वन अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान में स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम, मानव पेट्रोलिंग और मैदानी सूचना तंत्र की मदद से अंतरराज्यीय सागौन तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। विभाग ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

इसलिए रहता है बरसात का इंतजार
जंगलों से लकड़ी निकालकर उसे नदी के रास्ते आगे पहुंचाने के लिए बरसात का इंतजार किए जाने की बात सामने आई है। पानी बढ़ने के बाद उफनती नदी को तस्करी के संभावित रास्ते के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई थी। इससे पहले ही वन विभाग की निगरानी व्यवस्था ने संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ लिया। अफसरों के मुताबिक, 22 अगस्त 2026 को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उत्तर उदंती परिक्षेत्र के करलाभाट बीट में गश्त के दौरान सागौन के पेड़ का कटा हुआ ठूंठ मिला था। इसके बाद क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई। 26 अगस्त को स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम में दो संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियां दर्ज हुईं। तकनीकी निगरानी और प्राप्त पतों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। जांच में कथित रूप से सामने आया कि सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई कर लकड़ी को उपंती नदी के बहाव के सहारे दूसरे राज्य तक पहुंचाने की योजना थी।

ओडिशा से जुड़ा कनेक्शन भी सामने आया
मामले की जांच के दौरान ओडिशा निवासी एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया। वन विभाग के अनुसार उसके खिलाफ पूर्व में भी वन अपराधों से जुड़े मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इससे यह आशंका और गहरी हुई है कि मामला केवल स्थानीय स्तर पर पेड़ काटने तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
करोड़ों की वन संपदा पर तस्करों की नजर?
सागौन की बेशकीमती लकड़ी पर तस्करों की नजर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जंगलों में अवैध कटाई से केवल पेड़ों का नुकसान नहीं होता, बल्कि वन्यजीवों के आवास और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ता है। यदि बड़े पैमाने पर तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है तो वन संपदा के नुकसान का वास्तविक आंकड़ा करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।
नदी बनी तस्करी का आसान रास्ता
बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद लकड़ी को बहाव के साथ आगे पहुंचाने की कथित योजना ने वन विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। जंगल से सड़क मार्ग के बजाय नदी का इस्तेमाल किए जाने पर तस्करों के लिए निगरानी से बचना आसान हो सकता है।
स्मार्ट सर्विलांस ने फेल किया प्लान
कैमरे और तकनीकी निगरानी बनी तस्करों की सबसे बड़ी मुसीबत। 26 अगस्त को संदिग्ध गतिविधियां स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम में दर्ज हुईं। तकनीकी निगरानी, मैदानी जांच और मानव सूचना तंत्र को जोड़कर वन विभाग ने संदिग्धों की पहचान की और कार्रवाई को अंजाम दिया।

तीन गिरफ्तार, तीन की तलाश जारी
वन विभाग के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में—भोजलाल नागेश उम्र 38 वर्ष ग्राम बरगांव मैनपुर, गंगाराम विश्वकर्मा उम्र 34 वर्ष ग्राम बरगांव मैनपुर, शोभाचन्द्र नायक उम्र 50 वर्ष ग्राम/तहसील सिनापाली, जिला नुआपाड़ा ओडिशा शामिल हैं। अफसरों के अनुसार मामले में शामिल अन्य तीन आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए वन विभाग की विभिन्न टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

बड़ा सवाल किसके इशारे पर कट रहे जंगल?
तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का असली केंद्र यह होना चाहिए कि सागौन की अवैध कटाई के पीछे कौन लोग हैं, लकड़ी आखिर कहां पहुंचाई जानी थी और इस नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हैं? वन विभाग की कार्रवाई ने फिलहाल तस्करों की एक कोशिश को नाकाम किया है, लेकिन अंतरराज्यीय सागौन तस्करी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना ही इस कार्रवाई की असली सफलता होगी।






