E-Rickshaw Assistance Scheme : ई-रिक्शा के तीन चक्कों से आसान हुई अनिता दीदी की जिंदगी

अब अनिता साहू रोज कमा रहीं ₹700–800, बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाने का सपना हुआ साकार, पति के जाने के बाद लगा कि बच्चों को कैसे पढ़ाऊंगी, घर कैसे चलाऊंगी। बहुत तनाव था, ई-रिक्शा सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत बना

शहर सत्ता/.रायपुर। (E-Rickshaw Assistance Scheme)जिंदगी ने जब अनिता साहू से उनके पति का साथ छीन लिया, तब सामने सिर्फ जिम्मेदारियां थीं। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और आने वाले कल की चिंता। मुश्किल दौर में उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। आज वही अनिता अपने संघर्ष को अपनी ताकत बनाकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। ई-रिक्शा के तीन चक्कों से आसान हुई अनिता दीदी की जिंदगी।

 

रायपुर के राम नगर की रहने वाली श्रीमती अनिता साहू को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में श्रम विभाग की दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना का लाभ मिला। आर्थिक अनुदान और अपनी कुछ राशि लगाकर उन्होंने ई-रिक्शा खरीदा। अब वे खुद ई-रिक्शा चलाकर प्रतिदिन करीब 700 से 800 रुपए कमा रही हैं। इससे परिवार को हर महीने करीब 18 से 22 हजार रुपए की आय और बचत का सहारा मिल रहा है।

अनिता बताती हैं कि पति के निधन के बाद बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभालना बेहद मुश्किल था। तनाव के बीच सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई को लेकर थी। पहले वे घर पर छोटी-सी दुकान चलाती थीं, लेकिन आमदनी इतनी नहीं थी कि परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें।

“पति के जाने के बाद लगा कि बच्चों को कैसे पढ़ाऊंगी, घर कैसे चलाऊंगी। बहुत तनाव था। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं छोड़ी। योजना का लाभ मिला और ई-रिक्शा मेरे लिए सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत बन गया।”

आज अनिता की मेहनत का सबसे खूबसूरत हिस्सा उनके बच्चों का भविष्य है। वे अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ा रही हैं और उनके बेहतर भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। “मेरे बच्चे खूब पढ़ें और उनका भविष्य अच्छा बने, यही मेरी सबसे बड़ी इच्छा है। वे जितना पढ़ेंगे, मैं उनके लिए उतनी ही मेहनत करूंगी।”

ई-रिक्शा ने अनिता को कमाई का जरिया देने के साथ बच्चों के स्कूल आने-जाने के खर्च में भी राहत दी है। अब वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय मेहनत के दम पर अपने घर की जिम्मेदारी उठा रही हैं। अनीता कहती है कि “विष्णु भैया ने हम महिलाओं के लिए बड़े भाई की तरह सहारा दिया है। आज मैं अपने बच्चों के लिए खुद कमा रही हूं और उनका भविष्य संवारने का सपना देख पा रही हूं। इसके लिए अपने विष्णु भैया का दिल से आभार।”

pradeep chandravanshi

जिला कवर्धा के ग्राम रुसे में जन्म लिया। खेती-किसानी के साथ शिक्षा और खेल में भी संतोषजनक सफलता मिली। वर्तमान में शहर सत्ता के लिए ख़बरों और प्रबंधन की महती जिम्मेदारी प्राप्त है। रायपुर प्रेस क्लब का विगत 9 वर्षों से सक्रीय सदस्य भी हूं।

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