रायपुर महापौर, नगर निगम के उद्यानिकी विभाग और बीजेपी पार्षद ने मूंद ली आंखें, दसों जोन कमिश्नरी अमीरों से मोहब्बत और गरीबों से कर रही नफरत
शहर सत्ता/रायपुर। (Raipur Municipal Corporation)शहरी सत्ता यानि कि रायपुर नगर निगम के नाज़िम बदल गए लेकिन, उसका निजाम अब भी नहीं बदला है। यूं तो डबल, ट्रिपल इंजिन सरकार का दम भरने वाले नेताओं की अब सत्ता है लेकिन नज़ीर अब भी पुराना है। खासकर ‘नंगरा’ निगम के उद्यानिकी विभाग में ज़रा सा भी ‘पानी’ नहीं बचा है ! ‘नंगरा’ निगम कहने का हमारा शाब्दिक अर्थ अश्लीलता नहीं बलकि महकमे के जिम्मेदारों की मुफ़लिसी दर्शाना है।

सार्वजनिक उद्यानों का हाल बहुत बुरा है। महंगे जिम और बड़ी-बड़ी रिहायशी कॉलोनियों के गार्डन वालों से इतर आम रायपुरियंस को रायपुर नगर निगम हरी-हरी घांस और हरियाली भी नहीं दे पा रहा है। देखरेख के अभाव में शहर के गार्डन सूख चुके हैं। नर्म मुलायम घास की जगह धूल और मिटटी भरे मैदान रह गए हैं। ऐसा भी नहीं है कि उद्यानिकी विभाग के पास फंड की कमी है। मुख्यमंत्री निवास के पास नेहरू/गांधी उद्द्यान का हाल भी बदहाल है। उद्द्यान के मुख्य प्रवेश द्वार में रायपुर नगर निगम की कारगुज़ारियों को खुद बयान करता ‘कप’ यानि की चषक उसकी कामयाबी नहीं बलकि नाकामी के लिए लगाया गया लगता है।

सूखते उद्यान, राजधानी की प्रमुख सड़कों में लाखों रूपये खर्च कर लगाए गए मुंहमांगी कीमत के पेड़-पौधों और एक वक्त में जिसे ‘गौरव पथ’ का ख़िताब दिया गया था उसे देखकर लगता है किसी ने इन सब की आबरू बेरहमी से लूट ली है। ‘शहरी सत्ता’ का निजाम नाकाबिल लोगों के हाथों हैं। अब लगने लगा है ‘डबल इंजिन’ में से एक पूरी तरह फेल हो गया है। रायपुर महापौर, नगर निगम का उद्यानिकी विभाग और बीजेपी पार्षद ने इस बदइंतजामी से आंखे मूंद ली है।
गार्डन और पेड़-पौधों का पानी टैंकर कहीं और कर रहे खाली
‘नंगरा’ निगम रायपुर के उद्यानिकी विभाग के पास पानी भी पर्याप्त है और पानी टैंकर भी। लेकिन जिन टैंकरों में रायपुर की सड़कों में डिवाइडर पर लगे पेड़-पौधों और गार्डन के लिए पानी भरा जा रहा है वह कहीं और ही खाली कर दिया जाता है। निगम के नेताओं, उनकी फरमाइश में चंद खास लोगों के घरों में यह पानी जा रहा है। बचाखुचा कर्मचारी-अफसरों के घर खाली होता है। नतीजतन शहर से हरियाली नदारद है और सिर्फ रईसों के क्षेत्रों में सब्ज़बाग दिखते हैं।

अमीरों से मोहब्बत, गरीबों से नफ़रत
अपने पूरे परिवार की आजीविका चलाने वाले गरीब गुमटियों वालों पर बेरहमी से बुलडोजर चलाने और जुर्माना वसूलने वाला जोन-4, जोन-6 तथा जोन-8 अमीरों की दादागिरी से बेखबर है। जोन-4 में तो बीजेपी पार्षद अमर गिदवानी चुनाव जीतने के बाद अपने कारोबार में मस्त हैं। शायद इसलिए भी उनके क्षेत्र में उनकी ही बिरादरी के रईसों ने राजबाला श्रीवास्तव की स्मृति में बने गार्डन में बेजा कब्ज़ा करके तक़रीबन 6 महीने से मजदूरों की झोपड़ियां तान दी है। रसूखदार अमीरों के इस कब्जे की बजह से स्वर्गीय राजबाला श्रीवास्तव स्मृति उद्द्यान अब दम तोड़ चुका है।

क्या निगम वसूलेगा कब्जेधारियों से जुर्माना ?
कटोरा तालाब और बैरन बाजार की सरहद में स्टेट बैंक के रीजनल दफ्तर के पास दो रईसजादों की आलीशान कोठी तैयार हो रही है। इन रईसों ने अपने मजदूरों के लिए निगम के राजबाला गार्डन में ईंटों और एस्बेस्टर शीट लगे कमरे बनवा दिया है। दूसरे रईसजादे ने मजदूरों के रहने के साथ-साथ निर्माण सामग्री और बांस-बल्लियां डंप कर रायपुर नगर निगम से अपने याराना का खुला इज़हार किया है। अब देखना यह है कि निगम का अमला, पुलिस बल समेत इन रईसों के खिलाफ कब तक कार्रवाई करता है।

पार्षद कार्यालय की नाक के नीचे कब्जे का खेल
पार्षद अमर गिदवानी के वार्ड में नगर निगम वार्ड कार्यालय है। इस कार्यालय के पीछे राजबाला श्रीवास्तव उद्द्यान वाक्या है। इसी गार्डन के सामने पार्षद की बिरादरी वाले का आलीशान मकान तैयार हो रहा है और दूसरा बंगला जेल में बंद टुटेजा परिवार के रिश्तेदार का है। दोनों ही निर्माणकर्ताओं ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए तक़रीबन सालभर से गार्डन में कब्ज़ा किये हुए हैं। पूर्व महापौर और वर्तमान पार्षद समेत निगम कमिश्नर को भी इसकी जानकारी है। लेकिन कार्रवाई तो दूर जुर्माना वसूलने की हिम्मत भी किसी ने नहीं दिखाया है।





