Editorial by Sukant Rajput : सच बोलो, झूठ से लड़ो… शहर सत्ता साप्ताहिक समाचार पत्र

Sukant Rajput (Editor in Chief)

संपादकीय – सुकांत राजपूत

(Editorial by Sukant Rajput)हिंदी पत्रकारिता एक सिर्फ भाषा का चयन नहीं है, यह एक जनपक्षधर घोषणा है। “हम उस भारत के साथ खड़े हैं, जिसे मुख्यधारा ने हाशिये पर फेंक दिया!” सच्ची और अच्छी पत्रकारिता का मतलब है, आदिवासी का दर्द लिखना, मज़दूर की चीख को हेडलाइन बनाना, खदान की धूल से सत्ता का पर्दा साफ करना। जिसने ‘उदंत मार्तंड’ छापा था, उसके पास ना पैसा था, ना संसाधन; सिर्फ एक आग थी, और वही आग आज फिर चाहिए।

जब लोकतंत्र घायल होता है, तब हिंदी पत्रकारिता सत्ता की गोद में सोई हुई नहीं रहती ! 30 मई को सिर्फ माल्यार्पण करने वालों से गुजारिश है, सच बोलो, झूठ से लड़ो और बिकी हुई मीडिया को ललकारो। ताकि हमारी पीढ़ी यह न कहे पत्रकार अब सत्य का सिपाही नहीं, बल्कि पैकेज का पुजारी है। चैनल अब न्यूज़ रूम नहीं, ‘वॉर रूम’ हैं; विपक्ष को गाली देने वालों का अड्डा है। हमें बोलना था जनता की तरफ से, लेकिन अब बोल रहे है मालिक के इशारे पर।

जिस अंग्रेज़ी हुकूमत की छाती पर हिंदी पत्रकारिता ने पहला सवाल दागा था। फिरंगियों और देश के गद्दारों की छाती पर मूंग दला था आज वही पत्रकारिता सत्ता की जूतियाँ पॉलिश कर रही है। कॉर्पोरेट की गोदी में बैठकर TRP का च्यवनप्राश चाट रही है। जनता मर रही है, पत्रकार चुप है। आदिवासी उजड़ रहे हैं, लेकिन हिंदी मीडिया को धर्म और ड्रामा दिखाना है। किसान कर्ज़ में डूबे हैं और रोजी-रोटी के लिए आज भी मज़दूर काम की तलाश में पलायन कर रहे हैं।

आज जरुरत है सेल्फी पत्रकार’ की नहीं, निःस्वार्थ पत्रकारिता की, PR टाइप एजेंट नहीं, जनप्रतिनिधि पत्रकार चाहिए। जनता को ‘चाटुकार एंकर’ नहीं, सत्ता से सवाल करने वाले ‘छावा’ चाहिए। अगर सच बोलने की कीमत मौत है, तो मौत मंज़ूर है पर चुप्पी नहीं। याद रखिये पत्रकारिता सत्ता से डरने लगे, तो वो पत्रकारिता नहीं, चारण है। सत्ता, निजाम बदलते ही रंग बदलू पत्रकारिता करने वाले गिरगिटों की तादात तो बढ़ी है। लेकिन, अब भी चंद स्वशासी पत्रकारिता पसंदों से उम्मीद बंधी है क्योंकि सवाल पूछना अब बगावत हो गया है और बगावत अब पत्रकारिता की आखिरी उम्मीद है।

pradeep chandravanshi

जिला कवर्धा के ग्राम रुसे में जन्म लिया। खेती-किसानी के साथ शिक्षा और खेल में भी संतोषजनक सफलता मिली। वर्तमान में शहर सत्ता के लिए ख़बरों और प्रबंधन की महती जिम्मेदारी प्राप्त है। रायपुर प्रेस क्लब का विगत 9 वर्षों से सक्रीय सदस्य भी हूं।

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