BOLLIWOOD Archives - शहर सत्ता https://shaharsatta.com/tag/bolliwood/ Wed, 06 Aug 2025 02:57:01 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 Chhollywood: संजय महानंद की रंगमंच से सिनेमा तक संघर्ष और सफलता की दास्तान… https://shaharsatta.com/2025/08/06/chhollywood-sanjay-mahanands-story-of-struggle-and-success-from-stage-to-cinema/ https://shaharsatta.com/2025/08/06/chhollywood-sanjay-mahanands-story-of-struggle-and-success-from-stage-to-cinema/#respond Wed, 06 Aug 2025 02:56:50 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3189 शहरसात्ता/रायपुर। (Chollywood) रायपुर के रंगमंच और फिल्म अभिनेता संजय महानंद (46 वर्ष), स्व. भीमराज महानंद के पुत्र, छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी सिनेमा के चर्चित कलाकार हैं। अब तक वे 60 से…

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शहरसात्ता/रायपुर। (Chollywood) रायपुर के रंगमंच और फिल्म अभिनेता संजय महानंद (46 वर्ष), स्व. भीमराज महानंद के पुत्र, छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी सिनेमा के चर्चित कलाकार हैं। अब तक वे 60 से अधिक छत्तीसगढ़ी और लगभग 70 भोजपुरी फिल्मों में काम कर चुके हैं। हिंदी फिल्मों चक्रव्यू, लेकर हम दीवाना दिल, लंतरानी और मिसिज फलानी में भी उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

संजय का कहना है कि वे अभिनय को अपने जीवन का मकसद मानते हैं। ईश्वर ने मुझे कलाकारी के लिए ही इस धरती पर भेजा है,वे कहते हैं। अभिनय की शुरुआत उन्होंने 1996-97 में गुरुदेव संजय मैथिल की नाट्यशाला से की। उनका पहला नाटक ‘बड़े भाई साहब’ रहा, जिसे खूब सराहना मिली। इसके बाद उन्होंने इप्टा और कई नाट्य दलों के साथ काम करते हुए फिल्मों की ओर रुख किया।

2001 में उनकी पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म बनिहार आई। इसके बाद भोला छत्तीसगढ़िया, तोर मया के मारे, मया, महू दीवाना तहुं दीवानी और भूलन द मेज (राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता) जैसी फिल्मों ने उन्हें पहचान दिलाई। 2025 में भी उनकी सुकवा, जवानी जिंदाबाद, मोर छइयां भुइंया 3, और जित्तू की दुल्हनिया रिलीज हो चुकी हैं।

मुंबई सफर आसान नहीं रहा। वे बताते हैं,ठहरने के लिए जगह नहीं थी, पैसे खत्म होते तो रायपुर लौट आता।भोजपुरी फिल्म निरहुआ हिंदुस्तानी ने मुझे वहां टिकने का सहारा दिया। वे मानते हैं कि मुंबई में टैलेंट से ज्यादा लुक, अंग्रेजी और नेटवर्किंग देखी जाती है।

संजय ने कास्टिंग डायरेक्टरों पर भी सवाल उठाए, अगर कास्टिंग डायरेक्टर खुद एक्टर हो तो अच्छे कलाकारों का भला नहीं हो सकता।छत्तीसगढ़ी सिनेमा के सीमित दायरे पर वे कहते हैं, यहां सभी लोग अपनी ही फिल्में नहीं देखते, इसलिए कलाकारों को वह स्टारडम नहीं मिल पाता।

 

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Chhollywood: छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनिंग को पहचान दिलाने की राह पर करुणा देवांगन… https://shaharsatta.com/2025/08/06/chhollywood-karuna-devangan-on-the-path-of-getting-recognition-for-dress-designing-in-chhollywood/ https://shaharsatta.com/2025/08/06/chhollywood-karuna-devangan-on-the-path-of-getting-recognition-for-dress-designing-in-chhollywood/#respond Wed, 06 Aug 2025 02:34:51 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3182 शहरसात्ता/रायपुर। फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब करुणा देवांगन ने (chhollywood) छॉलीवुड में कदम रखा, तो उनके मन में सपना था कि हर फिल्म में कुछ नया…

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शहरसात्ता/रायपुर। फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब करुणा देवांगन ने (chhollywood) छॉलीवुड में कदम रखा, तो उनके मन में सपना था कि हर फिल्म में कुछ नया और क्रिएटिव करने का अवसर मिलेगा। लेकिन हकीकत उनसे थोड़ी अलग रही। करुणा बताती हैं कि शुरुआत में काम का दायरा बेहद सीमित था। ज़्यादातर मौकों पर उनका काम केवल कपड़े अरेंज करने तक सीमित रहा, जबकि डिज़ाइनिंग का स्कोप बेहद कम था। हालांकि कुछ प्रोजेक्ट्स में उन्हें अपनी कला दिखाने का मौका जरूर मिला, लेकिन ऐसे मौके बहुत कम रहे।

करुणा का कहना है कि छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनर्स को आज भी वह पहचान और मेहनताना नहीं मिलता, जिसके वे हकदार हैं। उनका काम पर्दे पर सीधे नज़र नहीं आता, जिस वजह से उन्हें क्रेडिट कम मिलता है। साथ ही, कम बजट होने के कारण मेहनताना भी सीमित रहता है, जबकि मेहनत बहुत अधिक करनी पड़ती है।वे मानती हैं कि बजट की कमी का असर क्रिएटिविटी और मेहनताना दोनों पर पड़ता है। सीमित संसाधनों के चलते डिज़ाइनर्स अपनी पूरी क्रिएटिविटी दिखा नहीं पाते और तकनीकी टीम में सबसे पहले कटौती ड्रेस डिपार्टमेंट पर ही होती है।

करुणा का मानना है कि यदि सही बजट, प्रोफेशनल टीम और स्टैंडर्ड पे स्ट्रक्चर उपलब्ध हो, तो छॉलीवुड में भी ड्रेस डिज़ाइनिंग को एक इंडस्ट्री का रूप दिया जा सकता है। लड़कियों के लिए इस फील्ड में सबसे बड़ी चुनौतियाँ सेफ्टी और पहचान हैं, क्योंकि कई बार लोकेशन पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं होती और मेहनत करने के बावजूद उन्हें क्रेडिट नहीं मिलता।

फैशन डिजाइनिंग में ग्रैजुएट और पोस्ट-ग्रैजुएट करुणा देवांगन पिछले दो सालों से छॉलीवुड में शॉर्ट फिल्मों, म्यूजिक वीडियो और फीचर फिल्मों में बतौर कॉस्ट्यूम स्टाइलिस्ट और डिज़ाइनर काम कर रही हैं। उनका सपना है कि छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनिंग को एक अलग पहचान और सम्मान मिले।

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Chhollywood: रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी, एसोसिएट डायरेक्शन से एनिमेशन फिल्मों के सपने तक का सफर… https://shaharsatta.com/2025/08/05/chhollywood-bobby-soni-nagvanshi-of-raipur-journey-from-associate-direction-to-the-dream-of-animation-films/ https://shaharsatta.com/2025/08/05/chhollywood-bobby-soni-nagvanshi-of-raipur-journey-from-associate-direction-to-the-dream-of-animation-films/#respond Tue, 05 Aug 2025 05:23:49 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3172 शहरसात्ता/रायपुर. (Chhollywood) रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी ने 2019 से फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी, हिंदी और इंग्लिश फिल्मों के साथ-साथ एड फिल्म्स,…

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शहरसात्ता/रायपुर. (Chhollywood) रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी ने 2019 से फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी, हिंदी और इंग्लिश फिल्मों के साथ-साथ एड फिल्म्स, म्यूजिक एल्बम और अवॉर्ड-विनिंग स्टॉप मोशन शॉर्ट फिल्मों का निर्देशन किया है,बॉबी मानते हैं कि डायरेक्टर और एसोसिएट डायरेक्टर का काम एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है,जहाँ डायरेक्टर दिमाग होता है, वहीं एसोसिएट डायरेक्टर, जो विज़न को हकीकत में बदलता है।

बॉबी को पहला बड़ा ब्रेक सोनी लिव की वेब सीरीज जहानाबाद से मिला, जहाँ उन्होंने मुंबई के असिस्टेंट डायरेक्टर्स के साथ मिलकर बड़े स्केल पर काम किया। वहीं से उन्हें लगा कि अब वे वाकई फिल्मी दुनिया का हिस्सा हैं। उनकी पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म में सुपरस्टार अनुज शर्मा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और सबके सामने तारीफ़ की, जिसे बॉबी अपनी ज़िंदगी का टर्निंग पॉइंट मानते हैं।

एक इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म में तो उन्होंने अकेले ही कई डिपार्टमेंट्स संभाले, कैमरा असिस्टेंट से लेकर प्रोडक्शन तक। अंग्रेज़ी भाषा की दिक्कतों और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद उनकी जुगाड़ू सोच और शांत दिमाग ने डायरेक्टर को बेहद प्रभावित किया।

बॉबी के मुताबिक, एक सफल एसोसिएट डायरेक्टर बनने के लिए मैनेजमेंट, क्रिएटिव विज़न और प्रॉब्लम सॉल्विंग की स्किल्स बेहद ज़रूरी हैं। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि बड़े डायरेक्टर बनने से पहले छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स में असिस्टेंट की भूमिका निभाकर अनुभव हासिल करें।

बॉबी आगे चलकर  एनिमेशन फिल्मों का निर्देशन करना चाहते हैं और खुद को एक सफल एनिमेशन फ़िल्ममेकर के रूप में देखना चाहते हैं।

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Chhollywood: बस्तर के जंगलों से निकली प्रेम और प्रतिरोध की गूंज – छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘माटी’ का फर्स्ट लुक रायपुर प्रेस क्लब में लॉन्च https://shaharsatta.com/2025/07/21/chhollywood-echo-of-love-and-resistance-emerged-from-the-forests-of-bastar-first-look-of-chhattisgarhi-film-maati-launched-at-raipur-press-club/ https://shaharsatta.com/2025/07/21/chhollywood-echo-of-love-and-resistance-emerged-from-the-forests-of-bastar-first-look-of-chhattisgarhi-film-maati-launched-at-raipur-press-club/#respond Mon, 21 Jul 2025 16:29:49 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3098 रायपुर/शहरसत्ता।छत्तीसगढ़ी chhollywood सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक नई पेशकश “माटी” का फर्स्ट लुक और पोस्टर आज रायपुर प्रेस क्लब में धूमधाम से लॉन्च किया गया। इस…

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रायपुर/शहरसत्ता।छत्तीसगढ़ी chhollywood सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक नई पेशकश “माटी” का फर्स्ट लुक और पोस्टर आज रायपुर प्रेस क्लब में धूमधाम से लॉन्च किया गया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ी सिनेमा के प्रतिष्ठित निर्देशक सतीश जैन, मनोज वर्मा और वरिष्ठ निर्माता रॉक दाशवानी विशेष रूप से मौजूद रहे।

द्वंद्व और संघर्ष से जन्मी है ये फिल्म 

फिल्म “माटी” केवल एक प्रेम कथा नहीं है, बल्कि यह बस्तर की उस जमीनी हकीकत की कहानी है, जहां प्रेम और हिंसा एक-दूसरे से टकराते हैं। जहां आदिवासी संस्कृति की खुशबू है, वहीं जल, जंगल और ज़मीन के नाम पर छीनाझपटी, खून-खराबा और सत्ता की भूख भी है। इसी द्वंद्व और संघर्ष से जन्मी है ये फिल्म  एक सशक्त प्रतिरोध की प्रतीक।जब बंदूकें संवाद करने लगती हैं, तब प्रेम सबसे बड़ा विद्रोह बन जाता है।फिल्म “माटी” उसी विद्रोह की गाथा है, जहां इंसानियत, संवेदना और प्रेम अब भी ज़िंदा है।

फिल्म से जुड़ी प्रमुख जानकारियाँ:

प्रोडक्शन:चन्द्रिका फिल्म प्रोडक्शन,

कथा व निर्माण: सम्पत झा

पटकथा/छायांकन/संपादन/निर्देशन: अविनाश प्रसाद

सहायक निर्देशक: मनोज पाण्डेय, आशुतोष प्रसाद

कैमरा असिस्टेंट: आदित्य प्रसाद, पदम नाथ कश्यप

गीत-संगीत: मनोज पाण्डेय, संतोष दानी, यशपाल ठाकुर, दिलीप पाण्डेय,नृत्य निर्देशन: राकेश यादव, भूमिका साहा

रूपसज्जा और परिधान: राकेश यादव, रीना बघेल, सविता रामटेके, नीलिमा दास मानिकपुरी,

बैकग्राउंड म्यूज़िक: अमित प्रधान, ऑडियोग्राफी: नीरज वर्मा

वितरण: लक्की रंगशाही, ग्राफिक्स: चिली फिल्म्स

पोस्टर डिज़ाइनिंग: मंडल ग्राफिक्स,ट्रैक रिकॉर्डिंग: मिलन स्टूडियो,पोस्ट प्रोडक्शन: श्री प्रसाद फिल्म्स

प्रोडक्शन कंट्रोल: शिराज गाजी, डिजिटल पार्टनर: दिग्विजय वर्मा, क्रिएटिव विजन

फिल्म से जुड़े कलाकारों और तकनीकी टीम ने प्रेस क्लब में मौजूद सभी दर्शकों और मीडिया प्रतिनिधियों से फिल्म को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

माटी” न केवल मनोरंजन करेगी, बल्कि दर्शकों को बस्तर की सच्चाइयों से रूबरू कराएगी।

31 अक्टूबर 2025 से यह फिल्म बड़े पर्दे पर दस्तक देगी और छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

 

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Bollywood: रोल छिना, आत्मसम्मान टूटा,लेकिन हारा नहीं, बॉलीवुड एक्टर नवीन पंडिता… https://shaharsatta.com/2025/07/15/bollywood-role-taken-away-self-esteem-broken-but-did-not-give-up-bollywood-actor-naveen-pandita/ https://shaharsatta.com/2025/07/15/bollywood-role-taken-away-self-esteem-broken-but-did-not-give-up-bollywood-actor-naveen-pandita/#respond Tue, 15 Jul 2025 14:43:44 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2924 पहली ‘हाँ’ और ‘ना’ ने सिखाया क्या करना है. नविन पंडिता की शरसत्ता से एक्सक्लूसिव बातचीत. मैंने अपने Bollywoodकरियर की पहली ‘हाँ’ से सीखा कि मुझे क्या नहीं करना है,…

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पहली ‘हाँ’ और ‘ना’ ने सिखाया क्या करना है.

नविन पंडिता की शरसत्ता से एक्सक्लूसिव बातचीत.

मैंने अपने Bollywoodकरियर की पहली ‘हाँ’ से सीखा कि मुझे क्या नहीं करना है, और पहली ‘ना’ से सीखा कि मुझे क्या करना है,कुछ इसी अंदाज़ में अपनी सफर की शुरुआत पर बात करते हैं बॉलीवुड एक्टर नवीन पंडिता, जो अपने हर फैसले को सीख में बदलना जानते हैं।

Actor Naveen pandita

फिटनेस फ्रीक माने जाने वाले नवीन बताते हैं, मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि फिट दिखूं, कपड़े मुझ पर सूट करें और स्क्रीन पर अच्छा दिखूं। लेकिन एक बार मुझे एक शॉर्ट फिल्म के लिए थोड़ा अनफिट लुक अपनाना था, पेट बाहर निकालना पड़ा। मैं तैयार था, लेकिन शूट के वक़्त मुझे लुक की वजह से रिप्लेस कर दिया गया।शायद मैं उस फ्रेम में फिट नहीं बैठा पर मैंने पूरी कोशिश की थी।

Actor Naveen pandita

वो आगे कहते हैं, जिस तरह का आर्टिस्ट मैं बनना चाहता हूं, उसमें लुक बदलना, फिजिक बदलना, ये सब मेरी आर्टिस्ट्री का हिस्सा है। उनके लिए शरीर भी एक कलाकार का माध्यम है, चाहे पतले का रोल हो या हट्टे-कट्टे का।

Actor Naveen pandita

आउटसाइडर होने पर नवीन बेझिझक बोलते हैं,

ये एक माइंडसेट की बात है। अगर काम आता है, सीखने की इच्छा है, तो इंडस्ट्री में बहुत काम है।वो कहते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत और कार्तिक आर्यन जैसे स्टार्स की सक्सेस इस बात का सबूत है कि टैलेंट और मेहनत अपना रास्ता बना ही लेते हैं। हालांकि, कुछ तजुर्बे कड़वे भी रहे। एक टीवी रोल के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि सेट पर ट्रीटमेंट वैसा ही मिलता है जैसा आपका रोल होता है।

Actor Naveen pandita

“मेरा सेल्फ-एस्टीम डाउन हो गया था। उसे दोबारा गेन करने में वक्त लगा।पर सीख यहीं से मिली,बहुत सोच समझ कर ‘हाँ’ बोलिए, और अपने गट इंस्टिंक्ट की सुनिए। नवीन मानते हैं कि आर्टिस्ट के लिए इंस्टिंक्ट सबसे बड़ा गाइड होता है, अच्छा, बुरा, सही, गलत सब वही बताता है।

Actor Naveen pandita

सुपरस्टार बनने की चाह तो है, लेकिन वो कहते हैं, “पता नहीं बना हूँ या नहीं, पर मैं सिर्फ खुद को बेहतर बनाने में लगा हूं।नवीन हर तरह की फिल्में करना चाहते हैं,मसाला, आर्ट, सब्जेक्ट बेस्ड क्योंकि उनके लिए असली लड़ाई खुद से है, और जीत भी खुद पर ही होनी चाहिए।

और अंत में, वो बड़ी विनम्रता से कहते हैं

मैंने कुछ खोया नहीं, सिर्फ पाया है… क्योंकि नंगे आए थे, धीरे-धीरे पा रहे हैं। और इसके लिए मैं दिल से grateful हूं।

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CHHOLLYWOOD: हीरो को तवज्जो, हीरोइनों की अनदेखी,जब ग्लैमर भारी पड़े टैलेंट पर… https://shaharsatta.com/2025/07/15/chhollywood-heroes-get-importance-heroines-are-ignored-when-glamour-overpowers-talent/ https://shaharsatta.com/2025/07/15/chhollywood-heroes-get-importance-heroines-are-ignored-when-glamour-overpowers-talent/#respond Tue, 15 Jul 2025 06:00:06 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2907 ० छालीवुड में एक भी निर्माता ऐसा नहीं, जो ‘राज़ी’, ‘मॉम’ जैसी महिला प्रधान फिल्में बनाए छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री में औसतन महीने में तीन से चार फिल्में बनती हैं,(CHHOLLYWOOD) बावजूद…

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० छालीवुड में एक भी निर्माता ऐसा नहीं, जो ‘राज़ी’, ‘मॉम’ जैसी महिला प्रधान फिल्में बनाए

छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री में औसतन महीने में तीन से चार फिल्में बनती हैं,(CHHOLLYWOOD) बावजूद इसके अब तक छालीवुड में फीमेल एक्ट्रेस की अनदेखी करते हुए इंडस्ट्री को मेल एक्टर्स के लिए समर्पित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में बेहतरीन महिला अभिनेत्रियों की न तो कमी है और न ही प्रदेश में महिला प्रधान विषयों की। बावजूद इसके, बॉलीवुड में श्रीदेवी अभिनीत फिल्म मॉम, आलिया भट्ट अभिनीत राज़ी जैसी कई ऐसी फिल्में हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर कामयाब रही हैं। कमोबेश बॉलीवुड की तर्ज पर छालीवुड में भी महिला विषयक फिल्में न बनना यह दर्शाता है कि फिल्म निर्माता मेल एक्टर्स को तरजीह देते हैं और फीमेल एक्टर्स को सिर्फ सुंदर गुलदान में रखे फूल की तरह प्रदर्शित करके अपने काम की इतिश्री कर लेते हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ की कुछ उभरती अभिनेत्रियों से शहर सत्ता के कला समीक्षक पुरन किरी ने चर्चा की। उन्होंने क्या कहा, उनके संपादित अंश यहां प्रस्तुत हैं।

ELSA GOSH ACTREES

एल्सा घोष बोलीं ,मैं शोपीस नहीं, किरदार निभाती हूं.

शहर सत्ता/रायपुर।छत्तीसगढ़ी फिल्मों में काम करने वाली बंगाल की बेटी एल्सा घोष ने महज़ 9 साल की उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था।(CHHOLLYWOOD) तेलुगु, बंगाली, उड़िया और छत्तीसगढ़ी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। 15 वर्षों के अनुभव में वे 20 से अधिक फिल्मों में नज़र आ चुकी हैं और हर बार उन्होंने दमदार भूमिका निभाई है।
ग्लैमर से आगे अभिनय मैं सिर्फ ग्लैमर का चेहरा नहीं हूं, मैं किरदार में जीती हूं।” एल्सा साफ़ कहती हैं कि वे हमेशा स्पष्ट और ईमानदार काम की प्रक्रिया में विश्वास रखती हैं।
नेपोटिज़्म और राजनीति पर: नेपोटिज़्म हर जगह है, सिर्फ छॉलीवुड में नहीं। लेकिन जीत हमेशा टैलेंट और मेहनत की होती है।”एक्ट्रेस को शोपीस समझे जाने पर: कभी-कभी ऐसा लगता है कि हमें सिर्फ सजावट की चीज़ समझ लिया गया है। गाने और सुंदर कपड़े पहनाने तक ही सीमित कर देते हैं। जबकि एक्ट्रेस उससे कहीं ज़्यादा होती है।छत्तीसगढ़ी सिनेमा की क्वालिटी पर: अगर मुझे पावर मिले, तो सबसे पहले बेहूदी फिल्मों की भीड़ को रोकूंगी। क्वालिटी ज़रूरी है, क्वांटिटी नहीं। 50 खराब फिल्मों के बाद जब कोई अच्छी फिल्म आती है, तब भी लोग नहीं देखते क्योंकि पहले से छवि खराब हो चुकी होती है।पछतावा नहीं, फोकस है: जो हुआ, जैसे हुआ, वह अनुभव था। मैं आज भी सही ट्रैक पर हूं। मैं सिनेमा को सजाने नहीं, संवारने आई हूं।नए कलाकारों के लिए संदेश: सिर्फ काम पर ध्यान दो, पॉलिटिक्स से दूर रहो और मेहनत करते जाओ ,यही रास्ता है आगे बढ़ने का।

ISHIKA YADAV ACTREES

ईशिका यादव का साफ़ कहना ,कॉम्प्रोमाइज़ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं.

छत्तीसगढ़ी फिल्मों की जानी-मानी अदाकारा ईशिका यादव ने इंडस्ट्री में अपने 7 साल पूरे कर लिए हैं। (CHHOLLYWOOD) अब तक उन्होंने 9–10 फिल्मों में अभिनय किया है और हर बार अपनी सादगी और गहराई से दर्शकों को प्रभावित किया है।
आत्मसम्मान सबसे ऊपर: मैं रोल चुनते वक्त आत्म-सम्मान को प्राथमिकता देती हूं। छत्तीसगढ़ का दर्शक सादगी पसंद करता है, इसलिए मैं सोच-समझकर काम करती हूं।
कंप्रोमाइज़ नहीं किया: मैं बहुत स्ट्रिक्ट हूं, इसलिए शायद ही किसी ने कभी कोशिश की हो कि मैं समझौता करूं।
नेपोटिज़्म पर बेबाक राय: यहां काम की कद्र होती है, रिश्तों की नहीं। जो अच्छा करता है, उसे ज़रूर मौका मिलता है।
ग्लैमर डॉल की छवि पर: मैं हमेशा से महिला-केंद्रित फिल्म करना चाहती थी, लेकिन शायद निर्माता रिस्क लेने से डरते हैं।
पछतावे भरे पल: अभिनेत्री बनने के बाद सबसे बड़ा नुकसान ये रहा कि मैं अपने परिवार और संस्कारों से दूर हो गई।
अगर प्रोड्यूसर होतीं तो:लोग सोचते हैं कि प्रोड्यूसर के पास बहुत पावर होती है, पर सच यह है कि सब कुछ उनके हाथ में नहीं होता।
नए कलाकारों को सलाह: बोलो जो सही है, ईमानदारी से काम करो और बेशरम बनो , वरना इंडस्ट्री तुम्हें कमजोर समझेगी।
आख़िरी बात: मैं अपने काम से प्यार करती हूं। किसी को परेशान नहीं किया। बस इतना चाहती हूं कि लोग जुड़ें, लेकिन परेशान न करें। हमारी इंडस्ट्री बहुत अच्छी है ,बस आपसी जलन और खींचतान खत्म करनी होगी।

RAAYA DINGORIYA ACTREES

राया डिंगोरिया ने कहा ,मुझे एक्टिंग से प्यार नहीं, लत है.

बॉलीवुड और छॉलीवुड(CHHOLLYWOOD) की चमकती अदाकारा राया डिंगोरिया का फिल्मी सफर  सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि ज़िद, जुनून और खुद पर भरोसे का उदाहरण है।
सपना नहीं था, आज पैशन है: राया बताती हैं कि उन्होंने कभी एक्टिंग का सपना नहीं देखा था। परिवार की सख़्ती के बीच जब उन्हें पहला विज्ञापन मिला, तो किस्मत ने दरवाज़ा खोला। उसके बाद ‘कुंडली भाग्य’, ‘प्रोफेसर पांडे के पांच परिवार’ जैसे टीवी शो और वेब सीरीज़ के ज़रिए अभिनय की शुरुआत हुई और फिर छत्तीसगढ़ी सिनेमा में कदम रखा। आज वे अपनी तीसरी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं।
कहानी मायने रखती है, नहीं कि कैसे दिख रही हूं: मैं वही रोल चुनती हूं जो मुझे भीतर से चुनौती दे। किरदार में डूबना मेरे लिए सबसे ज़रूरी है।
कंप्रोमाइज़ से दूरी: अब तक कभी कंप्रोमाइज़ नहीं किया। मैं कम लेकिन दमदार प्रोजेक्ट चुनती हूं, सतर्क रहती हूं।
नेपोटिज़्म पर राय: हर सेक्टर में नेपोटिज़्म है। लेकिन मुझे जो भी मिला, वह या तो ऑडिशन या काम देखकर मिला।
ग्लैमर डॉल टैग से दूरी: छॉलीवुड में मुझे जो रोल मिले, वे सशक्त किरदारों पर आधारित रहे हैं। मुझे कभी शोपीस नहीं बनाया गया।
अंतिम मंत्र: मेहनत करो और इतनी ज़िद रखो कि खुद भगवान भी न रोक सकें। सफलता का शॉर्टकट नहीं होता। जो लोग सफर को एंजॉय करते हैं, मंज़िल उन्हीं को मिलती है।
पहचान क्या चाहती हैं: मैं चाहती हूं कि लोग मुझे एक बेहतरीन कलाकार और एक अच्छे इंसान के रूप में याद करें। क्योंकि अच्छा इंसान बनना सबसे ज़रूरी है , बाकी सब पीछे पीछे आता है।

 

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Actor Mukul Dev Dies : ‘सन ऑफ सरदार’ से मिली थी पॉपुलैरिटी, दिल्ली में दी गई मुखाग्नि https://shaharsatta.com/2025/05/24/actor-mukul-dev-dies-he-got-popularity-from-son-of-sardar/ https://shaharsatta.com/2025/05/24/actor-mukul-dev-dies-he-got-popularity-from-son-of-sardar/#respond Sat, 24 May 2025 17:30:25 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2463 0 एक्टर विंदु दारा सिंह और एक्टर मुकेश ऋषि ने किया पुण्य स्मरण शहर सत्ता/रायपुर। Actor Mukul Dev Dies : मुकुल देव 54 साल के थे। उन्होंने 1996 में बॉलीवुड…

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0 एक्टर विंदु दारा सिंह और एक्टर मुकेश ऋषि ने किया पुण्य स्मरण

शहर सत्ता/रायपुर। Actor Mukul Dev Dies : मुकुल देव 54 साल के थे। उन्होंने 1996 में बॉलीवुड में डेब्यू किया था। उनका अंतिम संस्कार किया गया। दिवंगत अभिनेता के बड़े भाई राहुल देव उनका अंतिम संस्कार ने किया। वहीं, मुकुल देव के अंतिम दर्शन के लिए उनके करीबी दोस्त भी पहुंचे हैं।

पिछले कुछ समय से मुकुल बीमार चल रहे थे और हाल ही में उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था। हालांकि अस्पताल और परिवार की तरफ से निधन की वजह नहीं बताई गई है।’सन ऑफ सरदार’ फिल्म में मुकुल देव के साथ काम कर चुके एक्टर विंदु दारा सिंह ने उनके निधन पर शोक जताया है। मुकुल देव पिछले दस दिनों से दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थे और शुक्रवार रात दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। दरअसल, कोविड के बाद वे काफी डरे हुए थे और उनके मन में हमेशा कोविड का डर बना रहता था। हालांकि हमने मुकुल देव को पूरी तरह समझाया था और एक महीने तक उनके साथ एक्सरसाइज भी की थी।

एक्टर मुकेश ऋषि ने कहा, साउथ में मैंने मुकुल के साथ तीन-चार फिल्में की हैं। अक्सर हम दोनों की मुलाकात होती थी। उनके निधन से मुझे काफी दुख पहुंचा। अभी मेरे उनके बड़े भाई राहुल देव से बात हुई। वह बहुत ज्यादा दुखी थे। यह खबर हम सबके लिए काफी दुख देने वाली है।

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