प्रकाशन विशेषज्ञता पद के लिए अपात्र थे, भ्रष्टाचार नहीं अयोग्यता के आधार पर हुई संवाद में 25 साल से कार्यरत सब्यसाची कर की बर्खास्तगी
शहर सत्ता/रायपुर। (Public Relations Department Chhattisgarh Samvad)राज्य सरकार की नीतियों, योजनाओं और मुख्यमंत्री की गतिविधियों की जानकारी जनता तक पहुँचाने में लगे जनसंपर्क विभाग को दो दशक से भी ज्यादा समय से चूना लगाने वाले अब बेनकाब होने लगे हैं। प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और जनसंपर्क सचिव रोहित यादव के निर्देश पर सिस्टम से ऐसी गलत नियुक्ति से लेकर विवादित कार्यशैली वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। राज्य निर्माण से लेकर अब तक पहली दफा जनसंपर्क विभाग में लंबे समय से सिंडिकेट चला रहे अफसर भी नजर पर हैं। फ़िलहाल सब्यसाची कर की बर्खास्तगी और दो कर्मचारियों को नोटिस आदेश तमिल हुआ है।

IAS रजत बंसल ऐसे पहले आयुक्त हैं जिन्होंने संवाद में सुधार के कार्य तेज कर दिए हैं। उन्होंने 25 सालों तक प्रकाशन विभाग के इंचार्ज रहे सब्यसाची कर को बर्खास्त कर दिया है। रजत संवाद के सीईओ भी हैं। इसके अलावे तीन जिलों के विभागीय कर्मचारियों को भी शोकॉज जारी किया है। बता दें PS टू CM सुबोध सिंह और जनसंपर्क सचिव रोहित यादव भी सिस्टम को ठीक करने को लेकर गंभीर हैं। किसी भी तरह के करप्शन और गलत नियुक्तियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पहले ही सख्त और स्पष्ट निर्देश है।

प्रिंटिंग और होर्डिंग्स माफियाओं पर लगेगा अंकुश
मुख्यमंत्री के निर्देश पर सीपीआर रजत बंसल ने संवाद में सबसे पहले प्रिंटिंग और होर्डिंग्स माफियाओं की मनमानी पर अंकुश लगाया। उन्होंने 25 सालों से प्रिंटिंग का काम देख रहे सब्यसाची कर को हटा दिया है। बताते हैं, सब्यसाची की नियुक्ति ही अवैध थी। 2011 में ही जांच कमेटी ने उनकी नियुक्ति को अवैधानिक ठहरा दिया था। मगर उसकी फाइल दबा दी गई। विष्णुदेव साय जब मुख्यमंत्री बने तो उन तक संवाद में प्रिंटिंग और होर्डिैग्स माफियाओं की शिकायत पहुंची। उन्होंने जनसंपर्क आयुक्त को कार्रवाई करने कहा। इसके बाद सीपीआर ने शिकंजा कसना प्रारंभ किया। बता दें कि राज्य निर्माण से लेकर अब तक कई सौ करोड़ रुपयों के बजट वाले संवाद में कभी किसी मुख्यमंत्री और सीपीआर ने करप्शन रोकने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किया।

सब्यसाची की नियुक्ति से लेकर कार्यशैली विवादित
संवाद में सब्यसाची कर की नियुक्ति से लेकर कार्यशैली तक विवादित रही। लेकिन किसी भी पूरवर्ती सीपीआर ने कोई कार्रवाई नहीं किया। 25 सालों से सब्यसाची कर ही प्रिंटिंग और प्रिंटर्स से डील कर रहे थे। ऐसे तक़रीबन अन्य 9 कर्मचारी हैं इनकी लेकर कार्यशैली तक संदेह के दायरे में है। आने वाले समय में कार्यरत ऐसे लोगों को भी हटाने की कार्रवाई होगी।







