श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा शेष 5 महत्वाकांक्षी योजना भी होंगी जल्द प्रारंभ, प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, पोषण वाटिकाओं और ग्रामीण घरों की बाड़ियों में मुनगा के पौधे रोपे व वितरित किए जा रहे हैं, ग्रामीण व वनांचल क्षेत्रों की माताओं, किशोरी बालिकाओं और बच्चों को मिलेगा
शहर सत्ता/रायपुर। (Statewide Campaign)तीजा-पोरा उत्सव के साथ ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में हर घर मुनगा घर घर मुनगा अभियान का विधिवत शुभारंभ हुआ। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने 6 नई विभागीय योजनाओं में से एक को प्रारंभ करने से पूर्व प्रशासनिक कसावट लाने फेरबदल की हैं। वादे के मुताबिक 6 नई योजनाओं में से पहली योजना धरातल पर मूर्त रूप ले ली है। श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा शेष 5 महत्वाकांक्षी योजनाओं को भी जल्द अमलीजामा पहनाया जाएगा। टीम को पर्याप्त मार्गदर्शन देने के लिए मंत्रालय, डायरेक्टर, संभागीय आयुक्त, कलेक्टर, परियोजनाधिकारी, पर्यवेक्षक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम पंचायत तक कीभूमिका सुनिश्चित की गई है।
पारंपरिक लोक पर्व तीजा-पोरा के मौके पर मुख्यमंत्री निवास परिसर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की विशेष उपस्थिति में राज्यव्यापी ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर अभियान के आधिकारिक लोगो (Logo) का अनावरण करने के साथ ही पोषण जागरूकता के लिए ‘सुपोषण रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि तीजा-पोरा के इस पावन पर्व पर हर परिवार अपनी बाड़ी में मुनगा का पौधा लगाने और उसकी संतान की तरह देखभाल करने का संकल्प ले, ताकि हम सब मिलकर एक स्वस्थ, सुपोषित और सशक्त छत्तीसगढ़ का निर्माण कर सकें। उन्होंने सप्ताह में कम से कम तीन बार मुनगा फल ,मुनगा भाजी और मुनगा फूल को भोजन में शामिल करने का आग्रह किया।
कुपोषण पर सीधा वार, पोषण का प्राकृतिक उपहार
अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुनगा (सहजन) प्रकृति का दिया हुआ वह अनमोल वरदान है, जो आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन्स से भरपूर है। राज्य की महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने और नन्हे बच्चों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालने के लिए यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा। इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, पोषण वाटिकाओं और ग्रामीण घरों की बाड़ियों में मुनगा के पौधे रोपे व वितरित किए जा रहे हैं। इसका सीधा लाभ ग्रामीण व वनांचल क्षेत्रों की माताओं, किशोरी बालिकाओं और बच्चों को मिलेगा, जिन्हें अब अपनी ही बाड़ी से शून्य लागत पर पौष्टिक आहार सुलभ हो सकेगा।

प्रशासनिक कसावट का असर, 6 योजनाओं की पहली कड़ी पूरी
हाल ही में महिला एवं बाल विकास विभाग में किए गए प्रशासनिक पुनर्गठन और नई ऊर्जावान टीम की तैनाती का सकारात्मक परिणाम अब सीधे धरातल पर दिखने लगा है। प्रशासनिक फेरबदल के समय विभाग द्वारा आम जनता और हितग्राहियों के कल्याण के लिए 6 नई जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने का रोडमैप तैयार किया गया था। उसी क्रम में सुशासन सरकार की पहली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान को जमीन पर उतारा गया है।
मंत्री राजवाड़े ने कहा; शेष 5 योजनाएं भी जल्द होंगी लांच
श्रीमती राजवाड़े ने स्पष्ट किया कि सुशासन सरकार केवल घोषणाओं में नहीं, बल्कि त्वरित क्रियान्वयन में विश्वास रखती है। विभाग की नई टीम मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में पूरी प्रतिबद्धता के साथ शेष 5 महत्वाकांक्षी योजनाओं के ड्राफ्ट और धरातलीय मॉडल को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में महिला सशक्तिकरण, बाल देखरेख और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी शेष पांचों योजनाएं भी चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी।

जवाबदेही तय, डिजिटल डैशबोर्ड से होगी सीधी निगरानी
अभियान केवल रस्म अदायगी न बने बल्कि इसका शत-प्रतिशत परिणाम धरातल पर दिखे, इसके लिए महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रशासनिक स्तर पर पूरी जवाबदेही तय कर दी है। मंत्रालय स्तर पर विभागीय सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति नीतिगत मार्गदर्शन देगी, तो वहीं जिला स्तर पर कलेक्टरों और विकासखंड स्तर पर एसडीएम (SDM) की अध्यक्षता में अंतर-विभागीय समन्वय समितियां अभियान को गति देंगी। इसके साथ ही जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO), परियोजना अधिकारी (CDPO), पर्यवेक्षक और गांव स्तर पर तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की सीधी जिम्मेदारी तय की गई है। प्रदेश के सभी 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लगभग 7.88 लाख परिवारों को सीधे इस अभियान से जोड़ा जा रहा है, जहाँ प्रत्येक केंद्र क्षेत्र में 15 पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। पौधों के जीवित रहने, क्षति और पुनः रोपण की वास्तविक स्थिति पर नजर रखने के लिए एक विशेष डिजिटल डैशबोर्ड भी तैयार किया गया है, जिसके जरिए उच्च स्तर से लेकर मैदानी स्तर तक के कार्यों की नियमित समीक्षा कर अधिकारियों-कर्मचारियों की परफॉर्मेंस का सतत मूल्यांकन किया जाएगा।





