Brought honor to Chhattisgarh : पद्मश्री ‘अनूप’ नाम एक सम्मान अनेक, संगीत नाटक अकादमी से नवाज़े गए

लोककला की चार दशक लंबी साधना को राष्ट्रीय सम्मान, पांडेय ने पुरस्कार छत्तीसगढ़ के आदिवासी कलाकारों और जनता को समर्पित किया। ‘बंदूक छोड़ो, ढोल पकड़ो’ से बस्तर में शांति का संदेश, 2500 लोकगीत-गाथाओं और 175 लोकवाद्यों का किया संकलन

शहर सत्ता/रायपुर। (Brought honor to Chhattisgarh)छत्तीसगढ़ के जाने-माने संस्कृतिकर्मी और पद्मश्री से सम्मानित अनूप रंजन पांडेय को गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने देशभर के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों को सम्मान प्रदान किया।
सम्मान प्राप्त करने के बाद अनूप रंजन पांडेय ने इसे छत्तीसगढ़ के आदिवासी कलाकारों और प्रदेश की जनता को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक एवं आदिवासी कला-संस्कृति से जुड़े हजारों कलाकारों की साधना का सम्मान है।

समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सम्मानित कलाकार मिलकर भारत का ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं, जिसमें देश की मिट्टी की कथाएं और गीत, विविध नृत्य और उत्सव तथा सदियों से विकसित भाषाओं और बोलियों की स्मृतियां समाहित हैं।
राष्ट्रपति ने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय कला परंपरा की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए कहा कि हमारी कलाओं की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक जीवंत गुरु होते हैं। उन्होंने लोक और जनजातीय कलाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि तेजी से बदलते समय में अनेक लोककलाएं विलुप्ति के संकट से गुजर रही हैं। इसलिए उनके दस्तावेजीकरण के साथ उन्हें जीवंत बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास जरूरी हैं।

चार दशक की सांस्कृतिक साधना, 3000 से अधिक नुक्कड़ नाटक

21 जुलाई 1965 को बिलासपुर में जन्मे और जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसा निवासी अनूप रंजन पांडेय ने लोक संगीत, अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में चार दशक से अधिक समय तक काम किया है। संगीत, साहित्य और संस्कृति की प्रारंभिक शिक्षा उन्हें अपनी माता एवं गुरु भजन गायिका स्व. मनोरमा पाण्डेय तथा पिता एवं गुरु, शिक्षाविद और संस्कृत के विद्वान स्व. राधेश्याम पाण्डेय से मिली।

गांव में होने वाले नाचा और कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित रहस लोकनाट्य से प्रभावित पांडेय ने महज नौ वर्ष की उम्र में रेलवे स्कूल, बिलासपुर के मंच से अपनी पहली औपचारिक प्रस्तुति दी। बाद में बड़े भाई और अभिनेता रहे इंजीनियर आलोक रंजन पाण्डेय से अभिनय की बारीकियां सीखीं।
1990 का दशक उनके सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण रहा। राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के तहत उन्होंने गांव-गांव जाकर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया। महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और साक्षरता जैसे विषयों पर 3000 से अधिक नुक्कड़ नाटकों का प्रदर्शन किया।

इसी दौर में उन्हें पद्मभूषण हबीब तनवीर के निर्देशन में नया थिएटर के साथ काम करने का अवसर मिला। ‘चरणदास चोर’, ‘मिट्टी की गाड़ी’, ‘आगरा बाजार’, ‘मुद्राराक्षस’, ‘मोर नाव दमाद गाँव के नाव ससुरार’, ‘सड़क’, ‘राजरक्त’, ‘वेणीसंहार’ और ‘जिस लाहौर देख्या नई जन्मयाई नई’ सहित अनेक चर्चित नाटकों में उन्होंने अभिनय किया। इन प्रस्तुतियों के सिलसिले में उन्होंने देश के साथ इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और जर्मनी की यात्राएं भी कीं।

लोकसंपदा से बस्तर बैंड तक, ‘बंदूक छोड़ो… ढोल पकड़ो’ का संदेश

लोक रंगमंच के साथ-साथ अनूप रंजन पांडेय ने छत्तीसगढ़ की मौखिक एवं वाचिक परंपराओं के संरक्षण का व्यापक काम किया। उन्होंने प्रदेश के 2500 लोकगीत, लोकगाथा और लोकवार्ताओं, 150 नाचा के नकल-प्रहसनों तथा 175 लोकवाद्यों का संकलन किया।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद उन्होंने 80 लोकवाद्य महंत घासीदास संग्रहालय, संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को प्रदान किए। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय, भोपाल के लिए उन्होंने देशभर से 200 सुषिर लोकवाद्यों का संग्रह किया। इनका प्रदर्शन भोपाल में गंधर्व लोकरंग आयोजन में किया गया और वर्तमान में ये वाद्य त्रिवेणी संग्रहालय, उज्जैन में प्रदर्शित हैं।
इसी सांस्कृतिक यात्रा के दौरान बस्तर के पारंपरिक वाद्य ‘ढूसिर’ की संगत में ‘लिंगों पेन की गाथा’ सुनकर वे प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने लगभग डेढ़ दशक पहले बस्तर के आदिवासी कलाकारों के साथ मिलकर ‘बस्तर बैंड’ की स्थापना की।
बस्तर की पारंपरिक और दुर्लभ लोकवाद्य परंपरा को मंच पर लाने के साथ बस्तर बैंड ने हिंसा के खिलाफ ‘बंदूक छोड़ो… ढोल पकड़ो’ अभियान चलाया। इसका उद्देश्य युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना और लोकवाद्य, लोकगीत-संगीत, लोकगाथाओं, मिथक कथाओं तथा आदिवासी कला-संस्कृति के संरक्षण के माध्यम से शांति का संदेश देना रहा।
इस प्रयास के तहत बिखराव के संकट से जूझ रही 100 से अधिक कला मंडलियों को पुनर्गठित कर 5000 से अधिक कलाकारों को सक्रिय किया गया। बस्तर बैंड के 11 कलाकारों को अब तक राष्ट्रीय और राज्य स्तर के पुरस्कार मिल चुके हैं। बैंड ने रूस, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और इटली सहित विभिन्न देशों में भी बस्तर की लोकसंस्कृति की प्रस्तुतियां दी हैं।

पद्मश्री अनूप कई प्रतिष्ठित सम्मान से नवाज़े गए 

अनूप रंजन पाण्डेय को उनकी दीर्घकालीन सांस्कृतिक साधना के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। इनमें संस्कृति मंत्रालय की गुरु-शिष्य परंपरा योजना के तहत 2006 से 2008 तक लोकनाट्य ‘तारे-नारे’ के गुरु के रूप में प्रशिक्षण, वरिष्ठ अध्येतावृत्ति सम्मान-2016, टैगोर नेशनल स्कॉलरशिप 2019-20, छत्तीसगढ़ शासन का दाऊ मंदराजी लोक कला सम्मान-2014 और राष्ट्रीय स्वयं सिद्धश्री सम्मान-2017 प्रमुख हैं।
भारत सरकार ने उन्हें 2019 में पद्मश्री, देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय तुलसी सम्मान, मध्यप्रदेश, लोक कला सम्मान, भिलाई इस्पात संयंत्र सहित विभिन्न सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है।
पांडेय ने साहित्य और प्रकाशन के क्षेत्र में भी काम किया है। उन्होंने सतत शिक्षा कार्यक्रम के लिए राज्य संसाधन केंद्र द्वारा निर्मित 114 नवपाठक साहित्य का संपादन किया। इनमें गोंड-परधान चित्रकारी पर आधारित ‘करम देव’ और ‘भगवान का धरती से ग़ायब हो जाना’ जैसी पुस्तकें शामिल हैं। वर्ष 2015 में उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से लोक कला में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे 15 वर्षों तक तीन कार्यकालों में संगीत नाटक अकादेमी, दिल्ली की जनरल कौंसिल के सदस्य रहे। इसके अलावा संस्कृति मंत्रालय की फैलोशिप योजना, जोनल कल्चरल सेंटर नागपुर, WIPO-IGC, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से जुड़ी विभिन्न समितियों में सदस्य के रूप में काम किया।
वर्तमान में अनूप रंजन पाण्डेय ‘चिन्हारी रंगमंडल’ के निर्देशक और बस्तर बैंड, छत्तीसगढ़ के संचालक के रूप में सक्रिय हैं। उनकी पत्नी एवं लोककला मर्मज्ञ अस्मिता पाण्डेय और बेटी अनन्या पाण्डेय भी उनकी सांस्कृतिक यात्रा में सहयोगी के रूप में सक्रिय हैं।
राष्ट्रपति से मिला यह सम्मान अनूप रंजन पाण्डेय की चार दशक से अधिक लंबी सांस्कृतिक यात्रा के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की लोक एवं आदिवासी कला परंपरा के संरक्षण और उसे देश-दुनिया के मंच तक पहुंचाने के प्रयासों की राष्ट्रीय पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

SUKANT RAJPUT

जन्म 13 अगस्त 1973 को राजधानी रायपुर में हुआ। मेरी जड़ें उत्तर प्रदेश ग्राम चौरंग, कुंडा जिला प्रतापगढ़ से जुडी हैं। मुझे शिक्षक माता-पिता, विख्यात सर्प विशेषज्ञ डॉ अर्जुन सिंह रंगीला का पौत्र और छत्तीसगढ़ राजिम-धमतरी क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर राम पाल सिंह बिसेन का नाती होने का गौरव प्राप्त है। स्कूल से लेकर कॉलेज MA(PUB.ADD.) BJMC तक की शिक्षा रायपुर में ही ग्रहण किया। एनसीसी एयर विंग से 'ए' 'बी' और 'सी' सर्टिफिकेट तीन नेशनल कैंप का तत्कालीन मध्य प्रदेश में रायपुर, भोपाल और इंदौर का नेतृत्व किया। रायपुर थ्री एमपी (अब सीजी) एयर स्क्वॉर्डर्न से सर्वाधिक ग्लाइडिंग फ़्लाइंग की शॉर्टिज करके 1995 में ग्लाइडर पायलट यतेंद्र सिंह राणा सर की कमान में सोलो फ़्लाइंग किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में मातृ संसथान दैनिक हरिभूमि में वर्ष 2000 में डेस्क में विज्ञप्ति बनाने से शुरुआत हुई। लगभग 15 साल हरिभूमि, फिर इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनल स्टैंडर्ड वर्ल्ड 'वाच' चैनल, पत्रिका, दबंग दुनिया, समवेत शिखर, अमनपथ और जनता से रिश्ता मिड डे अख़बार में भी विभिन्न पदों पर कार्यरत था। वर्तमान में शहर सत्ता साप्ताहिक अख़बार में बतौर प्रधान संपादक हूं।

Related Posts

Congress’s Satyagraha : कांग्रेसी करेंगे प्रदेश में 14 अगस्त की शाम विशाल मार्च और सत्याग्रह

हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली स्थल पर कथित शुद्धिकरण की घटना के विरोध में छत्तीसगढ़ कांग्रेस आज प्रदेशभर में जिला स्तरीय मार्च और सत्याग्रह शहर सत्ता/रायपुर। (Congress’s Satyagraha)प्रदेश कांग्रेस कमेटी…

Tiranga Yatra Tricolour hoisted at Karregutta : बस्तर में नक्सलियों के ‘ब्लैक फॉरेस्ट’ में शान से लहराएगा तिरंगा

यह इलाका नक्सलियों का कोर जोन और हिड़मा, देवा, दामोदर, आजाद जैसे बड़े कैडर्स का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना को जोड़ने वाली कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा खबरें

Congress’s Satyagraha : कांग्रेसी करेंगे प्रदेश में 14 अगस्त की शाम विशाल मार्च और सत्याग्रह

Congress’s Satyagraha : कांग्रेसी करेंगे प्रदेश में 14 अगस्त की शाम विशाल मार्च और सत्याग्रह

Tiranga Yatra Tricolour hoisted at Karregutta : बस्तर में नक्सलियों के ‘ब्लैक फॉरेस्ट’ में शान से लहराएगा तिरंगा

Tiranga Yatra Tricolour hoisted at Karregutta : बस्तर में नक्सलियों के ‘ब्लैक फॉरेस्ट’ में शान से लहराएगा तिरंगा

Brought honor to Chhattisgarh : पद्मश्री ‘अनूप’ नाम एक सम्मान अनेक, संगीत नाटक अकादमी से नवाज़े गए

Brought honor to Chhattisgarh : पद्मश्री ‘अनूप’ नाम एक सम्मान अनेक, संगीत नाटक अकादमी से नवाज़े गए

Gold smuggler : हावड़ा-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस से 1.242 किलो सोना जब्त

Gold smuggler :  हावड़ा-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस से 1.242 किलो सोना जब्त

80th Independence Day : स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां पूर्ण, CM साय लेंगे सलामी करेंगे ध्वजारोहण

80th Independence Day : स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां पूर्ण, CM साय लेंगे सलामी करेंगे ध्वजारोहण

Hareli Tihar Folk Festival at the CM House : हरेली तिहार में CM हाउस में बिखरी परंपरा की हरियाली

Hareli Tihar Folk Festival at the CM House : हरेली तिहार में CM हाउस में बिखरी परंपरा की हरियाली