मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से पूरे जिले में एक समान पुलिस व्यवस्था लागू करने की मांग ने जोर पकड़ा, व्यवस्था में फिर बदलाव करने के संकेत नहीं
शहर सत्ता/रायपुर। (Issues Arising From Dual Policing In Chhattisgarh)वरिष्ठ विधायक भोलाराम साहू ने गृहमंत्री विजय शर्मा को पत्र लिखकर पुलिसिंग सिस्टम के डबल स्टैंडर्ड को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई है। गृह मंत्री विजय शर्मा तो पूरे जिले में कमिश्नरी लागू करने के पक्ष में हैं और मुख्यमंत्री से इस पर सहमति बन चुकी है। शासन की तैयारी अगस्त तक घोषणा करने की है। ऐसे में विधानसभा में एक गलत जानकारी और महज फंड के लिए बढ़ते शहर, जिलों में कानून व्यवस्था में फिर बदलाव करने के संकेत कम ही है। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी और रायपुर ग्रामीण की व्यवस्था लागू होने के महज 179 दिनों के अंदर ही महकमे के आला अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधी भी एकीकृत बदलाव की मांग करने लगे हैं।

विभागीय स्तर पर तबादलों का पेंच, कमिश्नरेट और ग्रामीण इलाकों क्षेत्रों को लेकर असमंजस, अलग से पूरे सेटअप के लिए तकरीबन 45 से 50 करोड़ के खर्चे समेत पीएचक्यू की 100 दिनों की समीक्षा रिपोर्ट के मद्देनजर डीजीप (DGP) भी एकीकृत व्यवस्था की हिमायत कर रहे हैं। फिर कमिश्नरी क्षेत्र में अपराध घटे हैं और कार्रवाई बढ़ी है, जबकि ग्रामीण इलाकों में पुलिसिंग कमजोर हुई है और अपराध बढ़ने को लेकर छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने भी शासन को अपनी मंशा स्पष्ट कर दिए है कि पर्याप्त बल और संसाधनों के बिना दोहरी व्यवस्था चलाना संभव नहीं है।

उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट की सिफारिश
डीजीपी अरुणदेव गौतम द्वारा गठित एडीजी स्तर की उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि पर्याप्त बल और संसाधनों के बिना दोहरी व्यवस्था चलाना संभव नहीं है। इससे पुलिसिंग का स्तर गिरेगा और सरकारी खजाना खाली होगा। समिति ने पूरे जिले में एक ही (एकीकृत) व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की है।
यह चाहते हैं मुख्यमंत्री और गृहमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सैद्धांतिक मंजूरी के पश्चात् ही शुरुआती में राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागु किया गया था। प्रायोगिक तौर पर रायपुर के बाद इसे प्रदेश के अन्य बड़े जिलों में भी लागु करने की योजना है। बल, फंड और जरुरी सेटअप के लिए भी साय सरकार गंभीर है। वहीँ गृह मंत्री विजय शर्मा तो पूरे जिले में कमिश्नरी लागू करने के पक्ष में हैं और मुख्यमंत्री से इस पर सहमति बन चुकी है। शासन की तैयारी अगस्त तक घोषणा करने की है। ऐसे में विधानसभा में एक गलत जानकारी और महज फंड के लिए बढ़ते शहर, जिलों में कानून व्यवस्था में फिर बदलाव करने के संकेत कम ही है।






