manojverma Archives - शहर सत्ता https://shaharsatta.com/tag/manojverma/ Wed, 06 Aug 2025 02:57:01 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 Chhollywood: संजय महानंद की रंगमंच से सिनेमा तक संघर्ष और सफलता की दास्तान… https://shaharsatta.com/2025/08/06/chhollywood-sanjay-mahanands-story-of-struggle-and-success-from-stage-to-cinema/ https://shaharsatta.com/2025/08/06/chhollywood-sanjay-mahanands-story-of-struggle-and-success-from-stage-to-cinema/#respond Wed, 06 Aug 2025 02:56:50 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3189 शहरसात्ता/रायपुर। (Chollywood) रायपुर के रंगमंच और फिल्म अभिनेता संजय महानंद (46 वर्ष), स्व. भीमराज महानंद के पुत्र, छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी सिनेमा के चर्चित कलाकार हैं। अब तक वे 60 से…

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शहरसात्ता/रायपुर। (Chollywood) रायपुर के रंगमंच और फिल्म अभिनेता संजय महानंद (46 वर्ष), स्व. भीमराज महानंद के पुत्र, छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी सिनेमा के चर्चित कलाकार हैं। अब तक वे 60 से अधिक छत्तीसगढ़ी और लगभग 70 भोजपुरी फिल्मों में काम कर चुके हैं। हिंदी फिल्मों चक्रव्यू, लेकर हम दीवाना दिल, लंतरानी और मिसिज फलानी में भी उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

संजय का कहना है कि वे अभिनय को अपने जीवन का मकसद मानते हैं। ईश्वर ने मुझे कलाकारी के लिए ही इस धरती पर भेजा है,वे कहते हैं। अभिनय की शुरुआत उन्होंने 1996-97 में गुरुदेव संजय मैथिल की नाट्यशाला से की। उनका पहला नाटक ‘बड़े भाई साहब’ रहा, जिसे खूब सराहना मिली। इसके बाद उन्होंने इप्टा और कई नाट्य दलों के साथ काम करते हुए फिल्मों की ओर रुख किया।

2001 में उनकी पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म बनिहार आई। इसके बाद भोला छत्तीसगढ़िया, तोर मया के मारे, मया, महू दीवाना तहुं दीवानी और भूलन द मेज (राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता) जैसी फिल्मों ने उन्हें पहचान दिलाई। 2025 में भी उनकी सुकवा, जवानी जिंदाबाद, मोर छइयां भुइंया 3, और जित्तू की दुल्हनिया रिलीज हो चुकी हैं।

मुंबई सफर आसान नहीं रहा। वे बताते हैं,ठहरने के लिए जगह नहीं थी, पैसे खत्म होते तो रायपुर लौट आता।भोजपुरी फिल्म निरहुआ हिंदुस्तानी ने मुझे वहां टिकने का सहारा दिया। वे मानते हैं कि मुंबई में टैलेंट से ज्यादा लुक, अंग्रेजी और नेटवर्किंग देखी जाती है।

संजय ने कास्टिंग डायरेक्टरों पर भी सवाल उठाए, अगर कास्टिंग डायरेक्टर खुद एक्टर हो तो अच्छे कलाकारों का भला नहीं हो सकता।छत्तीसगढ़ी सिनेमा के सीमित दायरे पर वे कहते हैं, यहां सभी लोग अपनी ही फिल्में नहीं देखते, इसलिए कलाकारों को वह स्टारडम नहीं मिल पाता।

 

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Chhollywood: छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनिंग को पहचान दिलाने की राह पर करुणा देवांगन… https://shaharsatta.com/2025/08/06/chhollywood-karuna-devangan-on-the-path-of-getting-recognition-for-dress-designing-in-chhollywood/ https://shaharsatta.com/2025/08/06/chhollywood-karuna-devangan-on-the-path-of-getting-recognition-for-dress-designing-in-chhollywood/#respond Wed, 06 Aug 2025 02:34:51 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3182 शहरसात्ता/रायपुर। फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब करुणा देवांगन ने (chhollywood) छॉलीवुड में कदम रखा, तो उनके मन में सपना था कि हर फिल्म में कुछ नया…

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शहरसात्ता/रायपुर। फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब करुणा देवांगन ने (chhollywood) छॉलीवुड में कदम रखा, तो उनके मन में सपना था कि हर फिल्म में कुछ नया और क्रिएटिव करने का अवसर मिलेगा। लेकिन हकीकत उनसे थोड़ी अलग रही। करुणा बताती हैं कि शुरुआत में काम का दायरा बेहद सीमित था। ज़्यादातर मौकों पर उनका काम केवल कपड़े अरेंज करने तक सीमित रहा, जबकि डिज़ाइनिंग का स्कोप बेहद कम था। हालांकि कुछ प्रोजेक्ट्स में उन्हें अपनी कला दिखाने का मौका जरूर मिला, लेकिन ऐसे मौके बहुत कम रहे।

करुणा का कहना है कि छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनर्स को आज भी वह पहचान और मेहनताना नहीं मिलता, जिसके वे हकदार हैं। उनका काम पर्दे पर सीधे नज़र नहीं आता, जिस वजह से उन्हें क्रेडिट कम मिलता है। साथ ही, कम बजट होने के कारण मेहनताना भी सीमित रहता है, जबकि मेहनत बहुत अधिक करनी पड़ती है।वे मानती हैं कि बजट की कमी का असर क्रिएटिविटी और मेहनताना दोनों पर पड़ता है। सीमित संसाधनों के चलते डिज़ाइनर्स अपनी पूरी क्रिएटिविटी दिखा नहीं पाते और तकनीकी टीम में सबसे पहले कटौती ड्रेस डिपार्टमेंट पर ही होती है।

करुणा का मानना है कि यदि सही बजट, प्रोफेशनल टीम और स्टैंडर्ड पे स्ट्रक्चर उपलब्ध हो, तो छॉलीवुड में भी ड्रेस डिज़ाइनिंग को एक इंडस्ट्री का रूप दिया जा सकता है। लड़कियों के लिए इस फील्ड में सबसे बड़ी चुनौतियाँ सेफ्टी और पहचान हैं, क्योंकि कई बार लोकेशन पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं होती और मेहनत करने के बावजूद उन्हें क्रेडिट नहीं मिलता।

फैशन डिजाइनिंग में ग्रैजुएट और पोस्ट-ग्रैजुएट करुणा देवांगन पिछले दो सालों से छॉलीवुड में शॉर्ट फिल्मों, म्यूजिक वीडियो और फीचर फिल्मों में बतौर कॉस्ट्यूम स्टाइलिस्ट और डिज़ाइनर काम कर रही हैं। उनका सपना है कि छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनिंग को एक अलग पहचान और सम्मान मिले।

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Chhollywood: रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी, एसोसिएट डायरेक्शन से एनिमेशन फिल्मों के सपने तक का सफर… https://shaharsatta.com/2025/08/05/chhollywood-bobby-soni-nagvanshi-of-raipur-journey-from-associate-direction-to-the-dream-of-animation-films/ https://shaharsatta.com/2025/08/05/chhollywood-bobby-soni-nagvanshi-of-raipur-journey-from-associate-direction-to-the-dream-of-animation-films/#respond Tue, 05 Aug 2025 05:23:49 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3172 शहरसात्ता/रायपुर. (Chhollywood) रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी ने 2019 से फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी, हिंदी और इंग्लिश फिल्मों के साथ-साथ एड फिल्म्स,…

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शहरसात्ता/रायपुर. (Chhollywood) रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी ने 2019 से फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी, हिंदी और इंग्लिश फिल्मों के साथ-साथ एड फिल्म्स, म्यूजिक एल्बम और अवॉर्ड-विनिंग स्टॉप मोशन शॉर्ट फिल्मों का निर्देशन किया है,बॉबी मानते हैं कि डायरेक्टर और एसोसिएट डायरेक्टर का काम एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है,जहाँ डायरेक्टर दिमाग होता है, वहीं एसोसिएट डायरेक्टर, जो विज़न को हकीकत में बदलता है।

बॉबी को पहला बड़ा ब्रेक सोनी लिव की वेब सीरीज जहानाबाद से मिला, जहाँ उन्होंने मुंबई के असिस्टेंट डायरेक्टर्स के साथ मिलकर बड़े स्केल पर काम किया। वहीं से उन्हें लगा कि अब वे वाकई फिल्मी दुनिया का हिस्सा हैं। उनकी पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म में सुपरस्टार अनुज शर्मा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और सबके सामने तारीफ़ की, जिसे बॉबी अपनी ज़िंदगी का टर्निंग पॉइंट मानते हैं।

एक इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म में तो उन्होंने अकेले ही कई डिपार्टमेंट्स संभाले, कैमरा असिस्टेंट से लेकर प्रोडक्शन तक। अंग्रेज़ी भाषा की दिक्कतों और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद उनकी जुगाड़ू सोच और शांत दिमाग ने डायरेक्टर को बेहद प्रभावित किया।

बॉबी के मुताबिक, एक सफल एसोसिएट डायरेक्टर बनने के लिए मैनेजमेंट, क्रिएटिव विज़न और प्रॉब्लम सॉल्विंग की स्किल्स बेहद ज़रूरी हैं। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि बड़े डायरेक्टर बनने से पहले छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स में असिस्टेंट की भूमिका निभाकर अनुभव हासिल करें।

बॉबी आगे चलकर  एनिमेशन फिल्मों का निर्देशन करना चाहते हैं और खुद को एक सफल एनिमेशन फ़िल्ममेकर के रूप में देखना चाहते हैं।

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Chhollywood: अंजली सिंह चौहान का अभिनय सफर और सपना ‘बहादुर कलारिन’ https://shaharsatta.com/2025/07/24/chhollywood-anjali-singh-chauhans-acting-journey-and-dream-bahadur-kalarin/ https://shaharsatta.com/2025/07/24/chhollywood-anjali-singh-chauhans-acting-journey-and-dream-bahadur-kalarin/#respond Thu, 24 Jul 2025 04:35:50 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3127 0 मां सिर्फ किरदार नहीं, साधना है . शहरसात्ता/रायपुर।मां के किरदार को निभाना अभिनय नहीं, एक साधना है, ‘chhollywood’ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की दमदार अभिनेत्री अंजली सिंह चौहान ने अपने…

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0 मां सिर्फ किरदार नहीं, साधना है .

शहरसात्ता/रायपुर।मां के किरदार को निभाना अभिनय नहीं, एक साधना है, ‘chhollywood’ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की दमदार अभिनेत्री अंजली सिंह चौहान ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास पहचान बनाई है। 22 से अधिक सुपरहिट फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी अंजली ने ‘कारी’, ‘दइहान’, ‘मय दीया तैं मोर बाती’, ‘मया 3’, ‘बी.ए. फाइनल ईयर’, ‘माटीपुत्र’, ‘मोर छईया भुइंया 2-3’, जैसी चर्चित फिल्मों में विविध और गहरे किरदार निभाए हैं।

किरदारों में वजन.

अंजली का कहना है, “सपनों का कोई अंत नहीं होता। मां और सास जैसे किरदार मुझे गहराई से जोड़ते हैं, क्योंकि उनमें भावनाएं और चुनौतियाँ दोनों होती हैं।” उनका मानना है कि उम्र के साथ अनुभव और समझ बढ़ती है, जिससे किरदारों में वजन और सच्चाई खुद-ब-खुद आ जाती है।अभिनय के प्रति उनकी ईमानदारी इस बात से झलकती है कि अगर निर्देशक उन्हें 25 साल की लड़की का रोल दें, तो भी वह पूरे समर्पण से उस किरदार को निभाने को तैयार रहती हैं।

अभिनय के प्रति जुनून और समर्पण

जब उनसे पूछा गया कि अब तक का सबसे प्रिय किरदार कौन-सा है, तो उन्होंने बिना रुके कहा बहादुर कलारिन.यह किरदार उनके दिल के बेहद करीब है, और इसे निभाना उनका सपना है।अंजली आज भी मानती हैं कि कोई भी रोल छोटा नहीं होता, उसे बड़ा बनाना कलाकार की सोच और मेहनत पर निर्भर करता है। उनके अभिनय के प्रति जुनून और समर्पण छत्तीसगढ़ी सिनेमा की प्रेरणा है।

 

 

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Chhollywood: बस्तर के जंगलों से निकली प्रेम और प्रतिरोध की गूंज – छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘माटी’ का फर्स्ट लुक रायपुर प्रेस क्लब में लॉन्च https://shaharsatta.com/2025/07/21/chhollywood-echo-of-love-and-resistance-emerged-from-the-forests-of-bastar-first-look-of-chhattisgarhi-film-maati-launched-at-raipur-press-club/ https://shaharsatta.com/2025/07/21/chhollywood-echo-of-love-and-resistance-emerged-from-the-forests-of-bastar-first-look-of-chhattisgarhi-film-maati-launched-at-raipur-press-club/#respond Mon, 21 Jul 2025 16:29:49 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3098 रायपुर/शहरसत्ता।छत्तीसगढ़ी chhollywood सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक नई पेशकश “माटी” का फर्स्ट लुक और पोस्टर आज रायपुर प्रेस क्लब में धूमधाम से लॉन्च किया गया। इस…

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रायपुर/शहरसत्ता।छत्तीसगढ़ी chhollywood सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक नई पेशकश “माटी” का फर्स्ट लुक और पोस्टर आज रायपुर प्रेस क्लब में धूमधाम से लॉन्च किया गया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ी सिनेमा के प्रतिष्ठित निर्देशक सतीश जैन, मनोज वर्मा और वरिष्ठ निर्माता रॉक दाशवानी विशेष रूप से मौजूद रहे।

द्वंद्व और संघर्ष से जन्मी है ये फिल्म 

फिल्म “माटी” केवल एक प्रेम कथा नहीं है, बल्कि यह बस्तर की उस जमीनी हकीकत की कहानी है, जहां प्रेम और हिंसा एक-दूसरे से टकराते हैं। जहां आदिवासी संस्कृति की खुशबू है, वहीं जल, जंगल और ज़मीन के नाम पर छीनाझपटी, खून-खराबा और सत्ता की भूख भी है। इसी द्वंद्व और संघर्ष से जन्मी है ये फिल्म  एक सशक्त प्रतिरोध की प्रतीक।जब बंदूकें संवाद करने लगती हैं, तब प्रेम सबसे बड़ा विद्रोह बन जाता है।फिल्म “माटी” उसी विद्रोह की गाथा है, जहां इंसानियत, संवेदना और प्रेम अब भी ज़िंदा है।

फिल्म से जुड़ी प्रमुख जानकारियाँ:

प्रोडक्शन:चन्द्रिका फिल्म प्रोडक्शन,

कथा व निर्माण: सम्पत झा

पटकथा/छायांकन/संपादन/निर्देशन: अविनाश प्रसाद

सहायक निर्देशक: मनोज पाण्डेय, आशुतोष प्रसाद

कैमरा असिस्टेंट: आदित्य प्रसाद, पदम नाथ कश्यप

गीत-संगीत: मनोज पाण्डेय, संतोष दानी, यशपाल ठाकुर, दिलीप पाण्डेय,नृत्य निर्देशन: राकेश यादव, भूमिका साहा

रूपसज्जा और परिधान: राकेश यादव, रीना बघेल, सविता रामटेके, नीलिमा दास मानिकपुरी,

बैकग्राउंड म्यूज़िक: अमित प्रधान, ऑडियोग्राफी: नीरज वर्मा

वितरण: लक्की रंगशाही, ग्राफिक्स: चिली फिल्म्स

पोस्टर डिज़ाइनिंग: मंडल ग्राफिक्स,ट्रैक रिकॉर्डिंग: मिलन स्टूडियो,पोस्ट प्रोडक्शन: श्री प्रसाद फिल्म्स

प्रोडक्शन कंट्रोल: शिराज गाजी, डिजिटल पार्टनर: दिग्विजय वर्मा, क्रिएटिव विजन

फिल्म से जुड़े कलाकारों और तकनीकी टीम ने प्रेस क्लब में मौजूद सभी दर्शकों और मीडिया प्रतिनिधियों से फिल्म को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

माटी” न केवल मनोरंजन करेगी, बल्कि दर्शकों को बस्तर की सच्चाइयों से रूबरू कराएगी।

31 अक्टूबर 2025 से यह फिल्म बड़े पर्दे पर दस्तक देगी और छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

 

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Padma Shri Surendra Dubey: पद्मश्री सुरेंद्र दुबे का निधन हास्य के मंच पर छाई शोक की लहर https://shaharsatta.com/2025/06/26/padma-shri-surendra-dubey-passed-away-a-wave-of-grief-spread-on-the-comedy-stage/ https://shaharsatta.com/2025/06/26/padma-shri-surendra-dubey-passed-away-a-wave-of-grief-spread-on-the-comedy-stage/#respond Thu, 26 Jun 2025 12:00:05 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2702 शहर सात्ता/रायपुर। हास्य कविता के अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाने वाले (padma shri surendra dubey) पद्मश्री सम्मानित कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे का आज निधन हो गया। जानकारी के…

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शहर सात्ता/रायपुर। हास्य कविता के अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाने वाले (padma shri surendra dubey) पद्मश्री सम्मानित कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे का आज निधन हो गया। जानकारी के अनुसार उन्हें दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा था, जिसके बाद उन्हें रायपुर स्थित ACI अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके परिवार के करीबी सूत्रों ने की है।

पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश और दुनिया भर में अपनी हास्य और व्यंग्य से भरपूर कविताओं के लिए पहचाने जाते थे। उनके द्वारा मंचों पर प्रस्तुत की गई रचनाएं आम जनता के दिलों को गुदगुदाती ही नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश भी देती थीं।उनके निधन से साहित्य और मंचीय कविता के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति हुई है। देशभर के कवि और साहित्यकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

श्रद्धांजलि

डॉ. सुरेंद्र दुबे को हम सभी की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि। आपकी कविताएं, आपकी मुस्कान, और आपकी आवाज़ हमेशा ज़िंदा रहेगी।

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