0 मां सिर्फ किरदार नहीं, साधना है .
शहरसात्ता/रायपुर।मां के किरदार को निभाना अभिनय नहीं, एक साधना है, ‘chhollywood’ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की दमदार अभिनेत्री अंजली सिंह चौहान ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास पहचान बनाई है। 22 से अधिक सुपरहिट फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी अंजली ने ‘कारी’, ‘दइहान’, ‘मय दीया तैं मोर बाती’, ‘मया 3’, ‘बी.ए. फाइनल ईयर’, ‘माटीपुत्र’, ‘मोर छईया भुइंया 2-3’, जैसी चर्चित फिल्मों में विविध और गहरे किरदार निभाए हैं।

किरदारों में वजन.
अंजली का कहना है, “सपनों का कोई अंत नहीं होता। मां और सास जैसे किरदार मुझे गहराई से जोड़ते हैं, क्योंकि उनमें भावनाएं और चुनौतियाँ दोनों होती हैं।” उनका मानना है कि उम्र के साथ अनुभव और समझ बढ़ती है, जिससे किरदारों में वजन और सच्चाई खुद-ब-खुद आ जाती है।अभिनय के प्रति उनकी ईमानदारी इस बात से झलकती है कि अगर निर्देशक उन्हें 25 साल की लड़की का रोल दें, तो भी वह पूरे समर्पण से उस किरदार को निभाने को तैयार रहती हैं।

अभिनय के प्रति जुनून और समर्पण
जब उनसे पूछा गया कि अब तक का सबसे प्रिय किरदार कौन-सा है, तो उन्होंने बिना रुके कहा बहादुर कलारिन.यह किरदार उनके दिल के बेहद करीब है, और इसे निभाना उनका सपना है।अंजली आज भी मानती हैं कि कोई भी रोल छोटा नहीं होता, उसे बड़ा बनाना कलाकार की सोच और मेहनत पर निर्भर करता है। उनके अभिनय के प्रति जुनून और समर्पण छत्तीसगढ़ी सिनेमा की प्रेरणा है।







