भर्ती मरीजों को धुत्त होकर बेतहाशा पीटकर नशा मुक्ति अभियान, राजधानी रायपुर के पंडरी मोवा के एक नशा मुक्ति केंद्र ‘साहस’ में नशे की लत छुड़ाने का बेरहम तरीका
शहर सत्ता/रायपुर। (Department of Social Welfare, Chhattisgarh) नशा मुक्ति केंद्र ‘साहस’ अब टॉर्चर सेल में तब्दील हो चूका है। खबर मिलने के बाद भी महिला बाल विकास विभाग अंतर्गत समाज कल्याण विभाग के जिम्मेदार खामोश बैठे हैं। राजधानी रायपुर के पंडरी मोवा के एक नशा मुक्ति केंद्र ‘साहस’ में नशे की लत छुड़ाने का बेरहम तरीका इज़ाद किया गया है। ‘साहस नशा मुक्ति केंद्र’ की कथित संचालिका ममता शर्मा का नशेड़ी बेटा अन्य भर्ती मरीजों को धुत्त होकर बेतहाशा पीटकर नशा मुक्ति अभियान चला रहा है। ‘साहस नशा मुक्ति केंद्र’ में एक आदिवासी युवक को पाइप से बेरहमी से पीटने का कथित वीडियो सामने आया है।
नशे की लत छुड़ाने के लिए परिजनों ने उसे भर्ती कराया था। लेकिन केंद्र संचालिका के बेटे ने उसके साथ मारपीट की। पिटाई से उसके पीठ-गर्दन की चमड़ी छिल गई है। गहरे जख्म के निशान दिख रहे हैं। युवक की मानसिक स्थिति भी बिगड़ गई है। उसका इलाज विशाखापट्टनम के एक अस्पताल में चल रहा है। मामला पंडरी थाना इलाके का है।

पीड़ित अंकुर के परिजनों ने आरोप लगाया है कि, जब उनका बेटा केंद्र में भर्ती था, तब उन्हें मिलने भी नहीं दिया जाता था। वो मिलने जाते थे जातिसूचक गालियां दी जाती थी। अब परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने केंद्र संचालिका के बेटे अनिकेश शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया है। पुलिस ने केंद्र संचालिका से नशा मुक्ति केंद्र संचालित करने के दस्तावेज भी मांगे हैं।
नशे के आदि को नशा मुक्ति केंद्र का जिम्मा
खौफजदा बेटे अंकुर ने पूछताछ में परिजनों को बताया था कि, केंद्र संचालिका के बेटे अनिकेश शर्मा ने उसे पाइप से पीटा है। गाली-गलौज भी की। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कथित तौर पर अनिकेश को मरीज के साथ हिंसक व्यवहार करते और बेरहमी से पीटते देखा जा सकता है। आरोप है कि इलाज के नाम पर वहां ‘टॉर्चर सेल’ चला रहा था। जबकि वह खुद नशे का आदि बताया जाता है।

मामला पुराना पीड़ित का मानसिक इलाज शुरू
ओडिशा के उमरकोट निवासी अंकुर मांझी को उसके माता-पिता ने नशा छुड़ाने सितंबर-अक्टूबर 2025 में पंडरी मोवा के ‘साहस नशामुक्ति केंद्र’ में भर्ती करवाया था। कुछ दिनों बाद ही उसके साथ मारपीट हुई थी, लेकिन यह मामला दब गया था। जब फरवरी में बेटा घर पहुंचा, तो उसकी हालत देखकर माता-पिता को इसकी जानकारी हुई। अंकुर की पीठ और गर्दन पर मारपीट के कारण चमड़ी छिल गई थी। वह बुरी तरह डरा हुआ था। परिजनों ने उसे डॉक्टरों को दिखाया, तो डॉक्टरों ने मारपीट होने की वजह से उसे मानसिक बीमार बता दिया। अभी अंकुर का विशाखापट्टनम में इलाज चल रहा है।





