
करुणा का कहना है कि छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनर्स को आज भी वह पहचान और मेहनताना नहीं मिलता, जिसके वे हकदार हैं। उनका काम पर्दे पर सीधे नज़र नहीं आता, जिस वजह से उन्हें क्रेडिट कम मिलता है। साथ ही, कम बजट होने के कारण मेहनताना भी सीमित रहता है, जबकि मेहनत बहुत अधिक करनी पड़ती है।वे मानती हैं कि बजट की कमी का असर क्रिएटिविटी और मेहनताना दोनों पर पड़ता है। सीमित संसाधनों के चलते डिज़ाइनर्स अपनी पूरी क्रिएटिविटी दिखा नहीं पाते और तकनीकी टीम में सबसे पहले कटौती ड्रेस डिपार्टमेंट पर ही होती है।

करुणा का मानना है कि यदि सही बजट, प्रोफेशनल टीम और स्टैंडर्ड पे स्ट्रक्चर उपलब्ध हो, तो छॉलीवुड में भी ड्रेस डिज़ाइनिंग को एक इंडस्ट्री का रूप दिया जा सकता है। लड़कियों के लिए इस फील्ड में सबसे बड़ी चुनौतियाँ सेफ्टी और पहचान हैं, क्योंकि कई बार लोकेशन पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं होती और मेहनत करने के बावजूद उन्हें क्रेडिट नहीं मिलता।

फैशन डिजाइनिंग में ग्रैजुएट और पोस्ट-ग्रैजुएट करुणा देवांगन पिछले दो सालों से छॉलीवुड में शॉर्ट फिल्मों, म्यूजिक वीडियो और फीचर फिल्मों में बतौर कॉस्ट्यूम स्टाइलिस्ट और डिज़ाइनर काम कर रही हैं। उनका सपना है कि छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनिंग को एक अलग पहचान और सम्मान मिले।







