
कामरेड भीमा,उर्मिला की कहानी
फिल्म की कहानी बस्तर के दिल से निकली है। यहां नायक हैं कामरेड भीमा,(CHHOLLYWOOD) जो कभी बंदूक उठाने को मजबूर हुए और अब सवालों से जूझते हैं। वहीं उर्मिला, गांव की एक बेटी है, जो संघर्ष और उम्मीद का प्रतीक बनकर सामने आती है। दोनों के नजरिए से दिखाया गया बस्तर एक नई सोच, नई दृष्टि और भीतर से जली हुई धरती का सच बयान करता है।बस्तर को दशकों तक बाहरी नज़रिये से देखा गया, लेकिन ‘माटी’ उसे भीतर से महसूस करने का मौका देती है। फिल्म में जल-जंगल-ज़मीन, विश्वास, धोखा, भय, और लोकतंत्र की खामोश जंग को बेहद संजीदगी और संवेदनशीलता से पेश किया गया है। यह फिल्म नक्सलवाद और लोकतंत्र के बीच की उस खामोश लड़ाई को उजागर करती है, जो बंदूक की गोली और बैलेट बॉक्स के बीच सिसकती रही है।

संघर्ष का जीवंत चित्रण
छत्तीसगढ़ी फिल्म माटी को बस्तर के वास्तविक इलाकों में शूट किया गया है, और इसमें लोक संस्कृति, बोली, ग्रामीण जीवन और संघर्ष का जीवंत चित्रण देखने को मिलेगा।’माटी’ 31 अक्टूबर 2025 से छत्तीसगढ़ के सभी सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।(CHHOLLYWOOD)\यह फिल्म उनके लिए है जो बस्तर को समझना चाहते हैं ,और उनके लिए भी, जो यह समझ चुके हैं कि परिवर्तन सिर्फ़ बंदूक से नहीं, माटी से आता है।
तो इस बार बस्तर को देखिए बाहरी नजरों से नहीं, बल्कि उर्मिला और भीमा की आंखों से छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘माटी। ये फिल्म नहीं, आंदोलन है… माटी की आवाज़ है।







