0 किराये में कॉमिक्स और फ़िल्मी मैगजीन से कमाई की शुरुआत , बचत और संघर्ष से बढ़ा आत्मविश्वास
शहरसत्ता/रायपुर। Rocky The Napoleon Bonaparte of Chhollywood महज 5’5 फुट का छरहरा लड़का, एक छोटे से कस्बे से खाली हाथ बड़े ख्वाब लेकर राजधानी रायपुर पहुंचा। न पैसा था, न अनुभव, न नौकरी, सिर्फ अध्ययनशीलता और कर्मठता ही साथ थी। इन्हें छॉलीवुड इंडस्ट्री का नेपोलियन बोनापार्ट कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। संघर्षों से तपकर यह शख्स आज सफल बिजनेसमैन और फिल्म फाइनेंसर बन चुका है। बात हो रही है गरियाबंद से रायपुर आए रॉकी दासवानी की।

शुरुआत गांव से
गरियाबंद एक मिट्टी की खुशबू से भरा गाँव, वहीं रॉकी का जन्म और बचपन बीता। पढ़ने का शौक बचपन से था, बारहवीं में गणित विषय के साथ अच्छे अंक लाए, लेकिन उन्हें पाठ्यक्रम से ज़्यादा साहित्यिक व ज्ञानवर्धक किताबें पसंद थीं। 12 साल की उम्र में कॉमिक्स किराए पर देना शुरू किया। पहली कमाई हुई,2 रुपये। धीरे-धीरे 3000-5000 किताबों का संग्रह बन गया।

संघर्ष के दिन
रायपुर आने के बाद शुरुआती दिन बेहद कठिन थे। 300-400 रुपये किराये के कमरे में सिर्फ एक सूटकेस, पुराना पंखा और गद्दा। भूखे दिन, उधारी पर खाना, और मकान मालिक द्वारा सामान सड़क पर फेंके जाने जैसी घटनाएं आम थीं। ऐसे में संजय भैया नाम के जानने वाले ने सहारा दिया। S.T.D. बूथ में रात को बैठना और तीन कुर्सियों जोड़कर वहीं सो जाना ,ऐसे बीते कई दिन।
रॉकी-सतीश की जोड़ी क्यों खास?
मैं उनकी रचनात्मकता में हस्तक्षेप नहीं करता था, उन्हें पूरी स्वतंत्रता थी। वहीं मैं व्यावसायिक पक्ष संभालता। क्रिएटिव विज़न और प्रैक्टिकल सोच के इस संतुलन ने हमें मजबूत टीम बना दिया।
बॉलीवुड का अनुभव
बॉलीवुड एक सपना है,जो मैंने भी देखा और कोशिश की। वहाँ बहुत कुछ सीखने को मिला। आज जो भी मुझसे कुछ सीखना चाहता है, मैं तैयार हूँ।
सामाजिक और पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ, मैं समय का प्रबंधन करता हूँ,सेहत, परिवार, समाज, व्यापार सबको बराबरी से समय देता हूँ। मेरे लिए क्वालिटी ज़्यादा मायने रखती है। हर तीन-चार साल में एक फिल्म बनती है, लेकिन पूरी निष्ठा से।
गरियाबंद से रायपुर तक का सफर
खोने को कुछ नहीं था, सिर्फ संघर्ष था। हर दिन खुद को साबित करना था। यही मेरी असली पढ़ाई थी, ज़िंदगी की पढ़ाई।
भरोसे पर राय,कौन-कौन बने सहारा?
भरोसा टूटना नहीं चाहिए। कुछ लोगों ने तोड़ा, लेकिन कुछ ने संभाला भी। भरोसे से ही रिश्ते बनते हैं, और ज़िंदगी खूबसूरत बनती है।शुरुआत में चाचा राजो रासवानी के पास रहा। उन्होंने अकाउंट का काम सिखाया। धीरे-धीरे एक भरोसेमंद दोस्ती का दायरा बना। लेकिन असली सहारा मेरी किताबें रहीं, जिन्होंने मुझे टूटने नहीं दिया।

रॉकी की पसंद
निर्देशक: सतीश जैन, प्रेम चंद्राकर, मनोज वर्मा, मनीष मानिकपुरी, मृत्युंजय
अभिनेता: अनुज शर्मा, प्रकाश अवस्थी, कारण खान, अमलेश नागेश, दीपक साहू
अभिनेत्री: शिखा चिताम्बरे, एलसा घोष, अनिकृति चौहान, काजल सोनबेर, दीक्षा जायसवाल
चरित्र कलाकार: पुष्पेंद्र ठाकुर, संजय महानन्द, अनिल शर्मा, मनमोहन ठाकुर, अंजलि चौहान, उपासना वैष्णव
युवाओं के लिए संदेश
बड़ा सोचिए, अपने इंटरेस्ट को पहचानिए, ईमानदारी से मेहनत कीजिए। लगन से किया गया काम कभी व्यर्थ नहीं जाता।







