0 छॉलीवुड में नहीं हैं CINTAA, WIFPA, IMPPA जैसी संस्थाएँ, फिल्मों की चमक धमक के पीछे छुपी होती हैं कई घिनौनी सच्चाई
शूटिंग के दौरान महिलाओं, क्रू मेंबर्स और कलाकारों समेत टेक्निशियंस का शोषण करने वालों के खिलाफ शिकायतों और कार्रवाई के लिए कोई मजबूत यूनियन, संगठन नहीं है। सहीं प्लेटफॉर्म नहीं होने की वजह छत्तीसगढ़िया कलाकार और अन्य दैहिक, मानसिक और आर्थिक शोषण के शिकार हो रहे हैं। शहर सत्ता के कला समीक्षक पुरन किरी को ऐसी कई पीड़ित अभिनेत्रियों, टेक्निशियंस और क्रू मेंबर्स का सन्देश, आ चूका है जिन्हें प्रताड़ित करने वाले निर्माता, निर्देशक, फिल्म प्रोडक्शन हॉउस के मालिकों ने अपने आचरण से आहत किया है।
शहर सत्ता/रायपुर। Chhattisgarh Film Industry : छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री यानी छॉलीवुड आज तेजी से बढ़ रही है। न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में इस उभरती इंडस्ट्री को सलाम किया जा रहा है। हर तरफ छत्तीसगढ़ी फिल्मों की सराहना हो रही है, नई कहानियाँ, नए चेहरे और नई उमंग लेकर यह फिल्म उद्योग बुलंदियों की ओर बढ़ रहा है। यहां काम कर रहे कई कलाकारों और तकनीकी कर्मियों को आज भी तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं किसी कलाकार की मेहनत की कमाई डूब जाती है तो कहीं किसी क्रू मेंबर का एक्सीडेंट होने पर कोई बीमा या हर्जाना की मदद नहीं मिलती।

छोटे कलाकारों से बिना अनुबंध के काम लिया जाता है, स्पॉट बॉयज से अतिरिक्त काम करवाकर भी उन्हें अतिरिक्त भुगतान नहीं दिया जाता। कई बार कलाकारों पर अनुचित समझौते (compromise) के लिए भी दबाव डाला जाता है। मुंबई जैसी बड़ी फिल्म इंडस्ट्रीज़ में कलाकारों और क्रू के हितों की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ के फिल्म तकनीशियन और कलाकारों के हितों के लिए आलाप आर्टिस्ट एसोसिएशन का गठन किया गया, जो जरूरत के समय हरसंभव सहयोग करता रहा है। यह संगठन छोटे-बड़े कलाकारों, निर्माता-निर्देशकों और तकनीशियनों का मजबूत मंच रहा है।
हालांकि कलाकारों में एकता की कमी, आपसी मनमुटाव, अविश्वास और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण संगठन के कार्य प्रभावित हुए हैं। आज कलाकारों और कामगारों के शोषण और उनके अधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई सामने नहीं आता, और अधिकतर लोग स्वार्थवश चुप्पी साधे रहते हैं। आलाप आर्टिस्ट एसोसिएशन इस स्थिति को बदलने और कलाकारों को एकजुट कर उनके अधिकारों की रक्षा के लिए फिर से प्रतिबद्ध है। प्रदीप सिंह ठाकुर, अध्यक्ष, आलाप आर्टिस्ट एसोसिएशन दैहिक, मानसिक और आर्थिक शोषण की पीड़ा झेल रहे लोगों को नहीं मिल रहा सही प्लेटफार्म CINTAA,WIFPA, IMPPA जैसी संस्थाएँ मौजूद हैं।

वहाँ के प्रोड्यूसर, कलाकार और टेक्नीशियन अपने-अपने यूनियन से जुड़े होते हैं, जिससे किसी भी विवाद या शोषण की स्थिति में सुनवाई और मदद मिलती है। लेकिन अफसोस की बात है कि छॉलीवुड में अभी तक ऐसा कोई मजबूत संगठन या यूनियन नहीं बना है जो कलाकारों, स्पॉट बॉयज, तकनीकी कर्मचारियों और छोटे निर्माताओं की रक्षा कर सके। प्रोड्यूसर्स के लिए भले ही कुछ संगठनात्मक प्रयास हुए हैं, मगर कलाकारों और क्रू के लिए एक समर्पित संस्था का न होना आज एक बड़ी खामियां बन रहा है। समय आ गया है कि छॉलीवुड में भी एक ऐसी संस्था बने, जो सभी कलाकारों और तकनीकी साथियों को एकजुट कर उनके अधिकारों और हितों की रक्षा कर सके। ताकि छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री न केवल रचनात्मक दृष्टि से बल्कि व्यवस्थागत रूप से भी एक आदर्श मॉडल बन सके। सवाल है – कौन आगे आएगा इस बदलाव की अलख जगाने?
“मुंबई, साउथ या अन्य जगहों पर फिल्म उद्योग के बेहतर विकास में वहां की मजबूत यूनियनों का बड़ा योगदान है। इन यूनियनों के कारण कलाकारों और टेक्नीशियनों को काम के अधिकार, आपसी विवाद निपटारे और सरकारी सहायता का लाभ मिलता है। दुर्भाग्य से हमारे यहां ऐसी गिनी-चुनी संस्थाएं ही हैं जो पंजीकृत लोगों की मदद कर पाती हैं। अब वक्त आ गया है कि छत्तीसगढ़ में भी CCTPA जैसी प्रोड्यूसर संस्था के अलावा निर्देशक, कलाकार, संगीतकार, सिंगर, मेकअपमैन, कैमरामैन, कोरियोग्राफर आदि के लिए अलग-अलग यूनियन बनाई जाएं, ताकि सभी को बेहतर सुविधाएं और विवाद समाधान का प्लेटफॉर्म मिल सके।”
– संतोष जैन, चेयरमैन, छत्तीसगढ़ सिने एंड टीवी प्रोड्यूसर एसोसिएशन
“छत्तीसगढ़ के फिल्म तकनीशियन और कलाकारों के हितों के लिए आलाप आर्टिस्ट एसोसिएशन का गठन किया गया, जो जरूरत के समय हरसंभव सहयोग करता रहा है। यह संगठन छोटे-बड़े कलाकारों, निर्माता-निर्देशकों और तकनीशियनों का मजबूत मंच रहा है। हालांकि कलाकारों में एकता की कमी, आपसी मनमुटाव, अविश्वास और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण संगठन के कार्य प्रभावित हुए हैं। आज कलाकारों और कामगारों के शोषण और उनके अधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई सामने नहीं आता, और अधिकतर लोग स्वार्थवश चुप्पी साधे रहते हैं। आलाप आर्टिस्ट एसोसिएशन इस स्थिति को बदलने और कलाकारों को एकजुट कर उनके अधिकारों की रक्षा के लिए फिर से प्रतिबद्ध है।”
– प्रदीप सिंह ठाकुर अध्यक्ष, आलाप आर्टिस्ट एसोसिएशन
“आलाप आर्टिस्ट एसोसिएशन की स्थापना 2006 में कलाकारों के हितों की रक्षा के लिए हुई। इसने फिल्म टेक्नीशियन से लेकर स्पॉट बॉय तक सभी के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। संस्कृति विभाग में अधिकतम कलाकारों को स्टेज शो दिलाने, विषम परिस्थितियों में आर्थिक सहायता देने और छत्तीसगढ़ी भाषा में दूरदर्शन प्रसारण शुरू कराने में अहम भूमिका निभाई। कलाकारों को एग्रीमेंट के लिए जागरूक किया गया। एसोसिएशन ने छत्तीसगढ़ी फिल्मों को टॉकीजों में प्राथमिकता दिलाने और फिल्म विकास निगम बनाने जैसी कई मांगों को सरकार तक पहुंचाया। पिछले कुछ वर्षों से एसोसिएशन निष्क्रिय है, जिसे फिर से सक्रिय करना जरूरी है ताकि कलाकारों के अधिकारों की रक्षा हो सके।”
– अनुमोद राजवैद्य, महासचिव, आलाप आर्टिस्ट एसोसिएशन।







