0 छत्तीसगढ़ समेत देश के 244 इलाकों में युद्ध के दौरान बचाव के लिए मॉकड्रिल
0 मॉकड्रिल:एयर अटैक के दौरान क्या करें, कैसे खुद को बचाएं इसकी होगी प्रैक्टिस
शहर सत्ता/रायपुर। Air Attack Mock Drill : पारंपरिक युद्ध होने पर भारत की सेना पाकिस्तान पर फतह हासिल कर ही लेगी। लेकिन अगर पाकिस्तान ने पराजय को देखते हुए दुस्साहस किया और न्यूक्लियर हेड मिसाइल छोड़ा तो क्या हमारे पास ऐसे सुरक्षित, संसाधन संपन्न और घातक रेडिएशन से बचने वाले बंकर हैं ? यह सवाल आयोजित किये जा रहे मॉकड्रिल के मौके पर लाजमी है। क्योंकि पाकिस्तान से तनाव के बीच बुधवार 7 मई देश के 244 इलाकों में युद्ध के दौरान बचाव के तरीकों की प्रैक्टिस होगी। मॉकड्रिल में छत्तीसगढ़ शहर भी शामिल है।
भारत में जनता को सिविल डिफेंस से लेकर दुश्मन देश के हवाई हमलों से बचने के गुर सिखाये जायेंगे। लेकिन एक कटु सत्य यह भी है कि भारत देश के सिविल डिफेंस डिस्ट्रिक्ट्स को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर 3 कैटेगरी में रखा तो गया है। परंतु मिसाइल और न्यूक्लियर अटैक से अपने देश की जनता को बचने के लिए पर्याप्त बंकर नहीं हैं। भारत उत्तर और पश्चिम दोनों मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना बहुत मजबूती से कर रहा है।

चीन और पाकिस्तान वक्त वक्त भारत को गीदड़ भभकी देते रहते हैं। भारतीय सेनाओं के अभेद्य सुरक्षा चक्र के सामने किसी भी दुश्मन की साजिश कामयाब नहीं हो सकती है लेकिन इसके बावजूद सावधान रहना जरूरी है क्योंकि चीन और पाकिस्तान दोनों के पास परमाणु हथियार हैं। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं जो परमाणु हमले की नौबत आने पर कारगर साबित होंगे।
संवेदनशीलता के आधार पर 3 कैटेगरी निर्धारित
सिविल डिफेंस डिस्ट्रिक्ट्स को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर 3 कैटेगरी में बांटा गया है। कैटगरी-1 सबसे संवेदनशील और कैटेगरी-3 कम सेंसेटिव है। इसमें दुर्ग कैटेगरी-2 में शामिल है। कलेक्टर ने बताया कि, शाम 4 बजे जगह-जगह सायरन बजाए जाएंगे।
युद्ध के दौरान बचाव के लिए मॉकड्रिल जरुरी
अगर दुश्मन देश हमला करे, तो इलाके को अंधेरे में कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे दुश्मन को निशाना साधने में मुश्किल होती है। मॉक ड्रिल यानी एक तरह की “प्रैक्टिस” जिसमें हम यह देखते हैं कि अगर कोई इमरजेंसी (जैसे एयर स्ट्राइक या बम हमला) हो जाए, तो आम लोग और प्रशासन कैसे और कितनी जल्दी रिएक्ट करता है। ब्लैकआउट एक्सरसाइज का मतलब है कि एक तय समय के लिए पूरे इलाके की लाइटें बंद कर देना।

ड्रिल के दौरान क्या-क्या होगा?
– सायरन बजाए जाएंगे और चेतावनी दी जाएगी।
– इंडियन एयर फोर्स से रेडियो और हॉटलाइन से संपर्क किया जाएगा।
– कंट्रोल रूम और शैडो कंट्रोल रूम एक्टिव होंगे।
– आम लोगों और छात्रों को सुरक्षा की ट्रेनिंग दी जाएगी।
– फायर ब्रिगेड, वार्डन, रेस्क्यू टीम जैसी सेवाएं सक्रिय होंगी।
– ब्लैकआउट और जरूरी ठिकानों को छिपाने की प्रक्रिया की जांच की जाएगी।
– लोगों को निकालने की योजना पर अभ्यास किया जाएगा।
– बंकरों की सफाई और उपयोग की तैयारी भी की जाएगी।





