नहीं टूट रही नागरिक आपूर्ति निगम के जिम्मेदारों की कुंभकरणीय नींद, बालोद, खैरागढ़ और रायपुर के सेंटर में चलता है संतोष अग्रवाल का सिस्टम, खाद्य मंत्री के पीए और नान के डिप्टी एजीएम के प्रेशर गेम से 3 ओएसडी हटे
सुकांत राजपूत/रायपुर
रायपुर। Civil Supply Corporation Chhattisgarh : एक बार फिर बीजेपी सरकार के सुशासन और डबल इंजिन की सरकार को मार्कफेड तथा नान की वजह से पलीता लग रहा है। नए चांवल के बदले मिलर्स द्वारा पुराने चांवल को खपाने का गोरखधंधा अब खुलकर शुरू हो गया है। खासकर बालोद, खैरागढ़ और रायपुर के सेंटरों में तो नए चांवल और पुराने चांवल का यह खेल बाकायदा खाद्य मंत्री की नाक के नीचे अंजाम दिया जा रहा है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक नान के डिप्टी एजीएम और विभागीय मंत्री दयालदास बघेल के पीए. संतोष अग्रवाल का पूरा सिस्टम प्रभावी है। गड़बड़ियों और बेजा वसूली की शिकायतें भाजपा संगठन से लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक से की गई है। बावजूद इसके संतोष अग्रवाल के प्रभाव से मंत्री के तीन ओएसडी क्रमशः अजय यादव, दिलीप अग्रवाल, संजय गंजघाटे (फ़िलहाल इस्तीफा दे चुके हैं) अब तक सिस्टम के शिकार होकर चलता कर दिए गए पर करोड़ों की अफरा-तफरी और वसूली बंद नहीं हुई।

बताते हैं कि नान के डिप्टी एजीएम और खाद्य मंत्री के पीए पूर्व में तेजतर्रार मंत्री रहे अजय चंद्राकर के यहां भी थे और बेआबरू होकर रवाना भी कर दिए गए थे। मामला विधानसभा में उठ चूका है समिति भी गठित की गई है और जांच के लिए बैठकों का दौर भी बदस्तूर जारी है, बस कार्रवाई की कसर बाकि है।
इन सेंटरों में ज्यादा गड़बड़ियां
बालोद जिले के सबसे ज्यादा गड़बड़ी वाले सेंटरों में डौंडी, डौंडी-लोहरा, का नाम बदनाम है। इसी तरह बालोद के ही गुंडरदेही(मटेवा) और चितौद सेंटर हैं। खैरागढ़ और रायपुर सेंटर भी लेव्ही वसूली में टॉप पर हैं। सूत्रों की मानें तो बालोद से 45 करोड़ क्वालिटी पर, रायपुर से तकरीबन 100 करोड़ की वसूली होती है। इन दावों में कितनी सच्चाई है इसका शहर सत्ता कोई दवा नहीं करता लेकिन अगर ऐसा है तो एक उच्च स्तरीय जांच समिति से प्रति क्विंटल 5 रूपये लेव्ही वसूली और चांवल की क्वालिटी की जाँच होनी चाहिए।

केमिकल जांच और सैंपल सील से होगा खुलासा
बालोद में ही अकेले 5 सेंटर(गोदाम) हैं। यहां नए चांवल के बदले मिलर्स द्वारा दिए गए पुराने चांवलों की केमिकल टेस्टिंग करवाने से बड़ी गड़बड़ियां सामने आएंगी। एक्सपर्ट्स की मानें तो क्वालिटी इंस्पेक्टरों की टीम से यहां रखे चांवल के नए या पुराने होने का टेस्ट होगा तो सबकुछ साफ हो जायेगा। वैसे विभाग के 92 क्यूआई.(गुणवत्ता निरीक्षक)भी एक ही थैले के चट्टे-बट्टे हैं। इसलिए उनसे चांवलों के सीलबंद सैंम्पल एकत्र करवाकर अगर शासन बाहर के लैब में जाँच करवाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।
ऐसे होती है क्वालिटी टेस्टिंग
मिलर्स द्वारा भेजे गए गोदामों में रखे चांवल नए धान के हैं या पुराने के इसका पता लगाने एक केमिकल डालकर देखा जाता है। केमिकल डालते ही नया चांवल ग्रीन या लाइट ग्रीन हो जाता है। अगर चांवल पुराण या गुणवत्ताहीन या मापदंडों के विपरीत है तो फिर चांवल का रंग पीला या ऑरेंज हो जायेगा। एक्सपर्ट्स ने नाम नहीं छपने की शर्त पर बताया कि मार्कफेड से नया धन मिलर्स लेते हैं और डिफ़रेंस वेट को बराबर करने बाहरी राज्यों से पुरना चांवल खपाते हैं। इतना ही नहीं सिर्फ गोदामों में गड़बड़ी नहीं है बल्कि बालोद, खैरागढ़ और रायपुर की सरकारी राशन दुकानों में जांच होगी तो बड़ा खुलासा होगा।
मंत्री-विधायकों और रिश्तेदारों की राईस मिलें
छत्तीसगढ़ में तकरीबन 2840 राईस मील हैं। देखा जाये तो उसना और अरवा मिलकर लगभग 6258 राईस मिलें हैं। मजे की बात यह कि ज्यादातर राईस मील मंत्रियों, पूर्व मंत्रियों, विधायकों और उनके रिश्तेदारों के नाम की हैं। नए और पुराने चांवल के इस खेल का सूत्रपात इन्हीं मीलों से होता है। अगर निष्पक्ष जांच शासन करवाए तो इन घोटालों में शामिल आंकड़ों का ग्राफ प्रति वर्ष 10 से 15 हजार करोड़ तक जायेगा। बता दें मार्कफेड से लेकर नान तक में भूपेश शासनकाल के समय धमतरी कुरुद के रौशन चंद्राकर पर एफसीआई चांवल को नान में कन्वर्ट करवाने का आरोप है। इसलिए ईडी के शिकंजे में जेल की हवा खा रहा है आरोपी रोशन। कस्टम मिलिंग का बीलिंग में आरोप गंभीर है।
गरीबों-किसानों के धान में यह खेल
नए धान का उठाव और पुराने चांवल की खपत के खेल में होता है बड़ा खेल। इसी तरह पुराने चांवल की गुणवत्ता मे भी है बड़ा घोटाला। प्रति क्विंटल धान में अवैध लेव्ही वसूली 4 से 5 रूपये हो रही है। जानकारी के मुताबिक दो वेरायटी के ग्रेड ‘ए’ यानि पतला और कॉमन मतलब मोटा क्वालिटी चांवल को बांटा गया है। लेकिन शासन का ख़रीदा गया धान गायब कर पुराने और बाहरी राज्यों के चांवल को खपाने का यह खेल कई हजार करोड़ का गोरखधंधे में तब्दील हो चूका है। पूर्वर्ती शासनकाल से मार्कफेड और नान का मापदंड, गुणवत्ता का का पूरा सिस्टम ट्रांसपोर्टिंग से लेकर बारदाना खरीदी तक कटघरे में है।

जांच हुई तेज लेकिन कार्रवाई की रफ़्तार धीमी
प्रदेश में 219 करोड़ रुपए से ज्यादा के चावल घोटाले की जांच तेज हो रही है। घोटाले की जांच के लिए बनी विधानसभा समिति अब खाद्य विभाग के अफसरों से पूछताछ करेगी। पिछले बजट सत्र के दौरान चावल घोटाले के लिए गठित विधानसभा जांच समिति की बैठक 18 मार्च को हुई थी। जांच के लिए गठित समिति की सातवीं बैठक थी। समिति की पहली बैठक 12 अगस्त 2024 को हुई थी। इसके बाद चार, पांच, 30 सितंबर, 19 नवंबर, 11 दिसंबर 2024 को हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार, घोटाले में संचालनालय के अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका भी सामने आना तय बताया जा रहा है। पूर्व खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले और दो पूर्व मंत्री राजेश मूणत और विक्रम उसेंडी सहित कांग्रेस के लखेश्वर बघेल व संगीता सिंह सदस्य है।
सुलगते सवाल
0 राशन दुकान के संचालकों ने लाखों का चावल बेच दिया, जांच अब तक सिफर
0 1 दिन में 433 मिनट के अंदर 460 से ज्यादा को राशन वितरण कैसे
0 एक व्यक्ति को राशन देने में तकरीबन 5 से 10 मिनट टाइम लगता है
0 किस फर्जी फर्जी अध्यक्ष ने गरीबों का चावल चोरी करके करोड़ों की संपत्ति बनाई
0 क्यों ईओडब्ल्यू में बेटे के साथ मिलकर हवाला का कारोबार करने वाले की नहीं हुई जांच
0 खाद्य अधिकारी, निरीक्षकों सहित नान के मैनेजर, ट्रांसपोर्टर सहित राशन दुकानदार बेख़ौफ़ क्यों?
वर्जन
”चावल घोटाले की जांच के लिए बैठकें हुई हैं। समिति अपनी जांच रिपोर्ट बना रही है। जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
-पुन्नूलाल मोहले, पूर्व खाद्य मंत्री





