कबीरधाम। छत्तीसगढ़ वनाधिकार मंच द्वारा कबीरधाम जिला मुख्यालय में वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन एवं कमजोर आदिवासी समूहों के लिए उत्पन्न चुनौतियों पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के 35 से अधिक संगठनों, संस्थाओं और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
पचराही गाँव की गोमती बैगा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “वनाधिकार कानून के 20 साल बाद भी हमें अपनी जमीन पर अधिकार नहीं मिला है, हम अब भी दर-दर भटक रहे हैं। यहाँ से हम कलेक्टर ऑफिस जाकर फिर अपनी गुहार लगाएंगे।” बैगा समुदाय, जो कि एक संरक्षित एवं कमजोर आदिवासी समूह है, पूरी तरह वनों पर निर्भर है, लेकिन अभी भी उन्हें उनकी काबिज जमीनों पर अधिकार नहीं मिला है।
ग्रामसभाओं की अनदेखी और अधूरे अधिकार
सर्व आदिवासी समाज के देवन सिंह धुरवे ने कहा कि उनके गाँव ने सामुदायिक वन संसाधन अधिकार का दावा दो वर्ष पूर्व प्रस्तुत किया था, लेकिन उन्हें केवल आधे-अधूरे अधिकार ही सौंपे गए। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन द्वारा ग्रामसभा को मान्यता नहीं दी जा रही है।
चोरभट्टी से आए एकता परिषद के शिकारी बैगा ने बताया कि उनके गाँव के 14 परिवारों के पास सभी दस्तावेज मौजूद हैं, फिर भी प्रशासन ने उनके दावों को अस्वीकार कर दिया।









