Sukant rajput Archives - शहर सत्ता https://shaharsatta.com/tag/sukant-rajput/ Tue, 05 Aug 2025 05:23:58 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 Chhollywood: रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी, एसोसिएट डायरेक्शन से एनिमेशन फिल्मों के सपने तक का सफर… https://shaharsatta.com/2025/08/05/chhollywood-bobby-soni-nagvanshi-of-raipur-journey-from-associate-direction-to-the-dream-of-animation-films/ https://shaharsatta.com/2025/08/05/chhollywood-bobby-soni-nagvanshi-of-raipur-journey-from-associate-direction-to-the-dream-of-animation-films/#respond Tue, 05 Aug 2025 05:23:49 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3172 शहरसात्ता/रायपुर. (Chhollywood) रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी ने 2019 से फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी, हिंदी और इंग्लिश फिल्मों के साथ-साथ एड फिल्म्स,…

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शहरसात्ता/रायपुर. (Chhollywood) रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी ने 2019 से फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी, हिंदी और इंग्लिश फिल्मों के साथ-साथ एड फिल्म्स, म्यूजिक एल्बम और अवॉर्ड-विनिंग स्टॉप मोशन शॉर्ट फिल्मों का निर्देशन किया है,बॉबी मानते हैं कि डायरेक्टर और एसोसिएट डायरेक्टर का काम एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है,जहाँ डायरेक्टर दिमाग होता है, वहीं एसोसिएट डायरेक्टर, जो विज़न को हकीकत में बदलता है।

बॉबी को पहला बड़ा ब्रेक सोनी लिव की वेब सीरीज जहानाबाद से मिला, जहाँ उन्होंने मुंबई के असिस्टेंट डायरेक्टर्स के साथ मिलकर बड़े स्केल पर काम किया। वहीं से उन्हें लगा कि अब वे वाकई फिल्मी दुनिया का हिस्सा हैं। उनकी पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म में सुपरस्टार अनुज शर्मा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और सबके सामने तारीफ़ की, जिसे बॉबी अपनी ज़िंदगी का टर्निंग पॉइंट मानते हैं।

एक इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म में तो उन्होंने अकेले ही कई डिपार्टमेंट्स संभाले, कैमरा असिस्टेंट से लेकर प्रोडक्शन तक। अंग्रेज़ी भाषा की दिक्कतों और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद उनकी जुगाड़ू सोच और शांत दिमाग ने डायरेक्टर को बेहद प्रभावित किया।

बॉबी के मुताबिक, एक सफल एसोसिएट डायरेक्टर बनने के लिए मैनेजमेंट, क्रिएटिव विज़न और प्रॉब्लम सॉल्विंग की स्किल्स बेहद ज़रूरी हैं। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि बड़े डायरेक्टर बनने से पहले छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स में असिस्टेंट की भूमिका निभाकर अनुभव हासिल करें।

बॉबी आगे चलकर  एनिमेशन फिल्मों का निर्देशन करना चाहते हैं और खुद को एक सफल एनिमेशन फ़िल्ममेकर के रूप में देखना चाहते हैं।

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Chhollywood: अंजली सिंह चौहान का अभिनय सफर और सपना ‘बहादुर कलारिन’ https://shaharsatta.com/2025/07/24/chhollywood-anjali-singh-chauhans-acting-journey-and-dream-bahadur-kalarin/ https://shaharsatta.com/2025/07/24/chhollywood-anjali-singh-chauhans-acting-journey-and-dream-bahadur-kalarin/#respond Thu, 24 Jul 2025 04:35:50 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3127 0 मां सिर्फ किरदार नहीं, साधना है . शहरसात्ता/रायपुर।मां के किरदार को निभाना अभिनय नहीं, एक साधना है, ‘chhollywood’ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की दमदार अभिनेत्री अंजली सिंह चौहान ने अपने…

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शहरसात्ता/रायपुर।मां के किरदार को निभाना अभिनय नहीं, एक साधना है, ‘chhollywood’ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की दमदार अभिनेत्री अंजली सिंह चौहान ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास पहचान बनाई है। 22 से अधिक सुपरहिट फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी अंजली ने ‘कारी’, ‘दइहान’, ‘मय दीया तैं मोर बाती’, ‘मया 3’, ‘बी.ए. फाइनल ईयर’, ‘माटीपुत्र’, ‘मोर छईया भुइंया 2-3’, जैसी चर्चित फिल्मों में विविध और गहरे किरदार निभाए हैं।

किरदारों में वजन.

अंजली का कहना है, “सपनों का कोई अंत नहीं होता। मां और सास जैसे किरदार मुझे गहराई से जोड़ते हैं, क्योंकि उनमें भावनाएं और चुनौतियाँ दोनों होती हैं।” उनका मानना है कि उम्र के साथ अनुभव और समझ बढ़ती है, जिससे किरदारों में वजन और सच्चाई खुद-ब-खुद आ जाती है।अभिनय के प्रति उनकी ईमानदारी इस बात से झलकती है कि अगर निर्देशक उन्हें 25 साल की लड़की का रोल दें, तो भी वह पूरे समर्पण से उस किरदार को निभाने को तैयार रहती हैं।

अभिनय के प्रति जुनून और समर्पण

जब उनसे पूछा गया कि अब तक का सबसे प्रिय किरदार कौन-सा है, तो उन्होंने बिना रुके कहा बहादुर कलारिन.यह किरदार उनके दिल के बेहद करीब है, और इसे निभाना उनका सपना है।अंजली आज भी मानती हैं कि कोई भी रोल छोटा नहीं होता, उसे बड़ा बनाना कलाकार की सोच और मेहनत पर निर्भर करता है। उनके अभिनय के प्रति जुनून और समर्पण छत्तीसगढ़ी सिनेमा की प्रेरणा है।

 

 

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Accident: केदार कश्यप के भतीजे निखिल कश्यप की दर्दनाक मौत, बुलेट बाइक की रफ्तार बनी जानलेवा https://shaharsatta.com/2025/07/23/accident-kedar-kashyaps-nephew-nikhil-kashyap-dies-a-painful-death-the-speed-of-the-bullet-bike-proved-fatal/ https://shaharsatta.com/2025/07/23/accident-kedar-kashyaps-nephew-nikhil-kashyap-dies-a-painful-death-the-speed-of-the-bullet-bike-proved-fatal/#respond Wed, 23 Jul 2025 08:23:39 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3120 शहरसात्ता/रायपुर. (Accident) 23 जुलाई 2025  राजधानी रायपुर में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप के भतीजे निखिल कश्यप (उम्र 19 वर्ष) की मौके पर…

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शहरसात्ता/रायपुर. (Accident) 23 जुलाई 2025  राजधानी रायपुर में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप के भतीजे निखिल कश्यप (उम्र 19 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा मंदिर हसौद थाना क्षेत्र में हुआ, जब निखिल तेज रफ्तार बुलेट बाइक से सड़क डिवाइडर से टकरा गया।
Nikhil kashyap

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक की गति अत्यधिक तेज थी, और टक्कर के बाद घटनास्थल पर ही निखिल ने दम तोड़ दिया। वहीं बाइक पर सवार एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे उपचार के लिए सत्य साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

Kedar kashyap

निखिल कश्यप पूर्व भाजपा सांसद दिनेश कश्यप के पुत्र थे। हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल के मर्च्युरी में भेज दिया गया।

हादसे में जिस बुलेट का इस्तेमाल हुआ, उस पर विधानसभा पास भी चिपका हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे के वक्त बाइक की रफ्तार 140 किमी प्रति घंटे के आसपास थी। पुलिस ने बुलेट को जब्त कर लिया है और आगे की कार्रवाई जारी है।

यह हादसा एक बार फिर से युवा राइडर्स के बीच स्पीड को लेकर लापरवाही और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर सवाल खड़े करता है।

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Bollywood: थिएटर से ‘वीर सावरकर’ तक, संतोष ओझा का बेबाक सफर, जिसे नकारना अब मुमकिन नहीं… https://shaharsatta.com/2025/07/22/bollywood-from-theatre-to-veer-savarkar-santosh-ojhas-outspoken-journey-which-is-now-impossible-to-deny/ https://shaharsatta.com/2025/07/22/bollywood-from-theatre-to-veer-savarkar-santosh-ojhas-outspoken-journey-which-is-now-impossible-to-deny/#respond Tue, 22 Jul 2025 04:25:57 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3102 शहर सत्ता/मुंबई/रायपुर. BOLLYWOOD बिहार के बक्सर से निकलकर FTII और चंडीगढ़ इंडियन थिएटर से अभिनय की बारीकियां सीखने वाले संतोष ओझा का मानना है कि करियर में मिली पहली “ना”…

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शहर सत्ता/मुंबई/रायपुर. BOLLYWOOD बिहार के बक्सर से निकलकर FTII और चंडीगढ़ इंडियन थिएटर से अभिनय की बारीकियां सीखने वाले संतोष ओझा का मानना है कि करियर में मिली पहली “ना” और “हां” दोनों ही उनके असली गुरु रहे हैं। उन्होंने ‘लक्ष्मी बॉम्ब’, ‘मेड इन हेवन 2’ और हालिया ‘वीर सावरकर’ में लोकमान्य तिलक की भूमिका निभाकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
Santosh ojha Bollywood actor

संतोष मानते हैं कि सिर्फ लुक्स की पहचान कलाकार को संतुष्ट नहीं कर सकती। वे विविध और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में यकीन रखते हैं। सीमाएं तोड़ने की बात पर उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों को पार कर एक किरदार में खुद को ढाला।

Santosh ojha Bollywood actor

बॉलीवुड में आउटसाइडर होने के दर्द पर वो साफ कहते हैं, “यहां सिर्फ टैलेंट नहीं, किस्मत और जुझारूपन भी चाहिए।” उन्होंने स्वीकार किया कि करियर बचाने के लिए कुछ नकारात्मक रोल भी निभाने पड़े जिन्हें करते वक्त आत्मग्लानि हुई, पर परफॉर्मेंस का संतोष मिला।

सुपरस्टार बनने की चाह में उन्होंने गांव, मिट्टी और बचपन की बहुत-सी चीजें खो दीं, लेकिन आज भी सकारात्मक सोच के साथ जद्दोजहद कर रहे हैं। युवाओं को उनका संदेश है मस्ती में मेहनत करो, भक्ति और शक्ति से जीवन को साधो।

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Chhollywood: बस्तर के जंगलों से निकली प्रेम और प्रतिरोध की गूंज – छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘माटी’ का फर्स्ट लुक रायपुर प्रेस क्लब में लॉन्च https://shaharsatta.com/2025/07/21/chhollywood-echo-of-love-and-resistance-emerged-from-the-forests-of-bastar-first-look-of-chhattisgarhi-film-maati-launched-at-raipur-press-club/ https://shaharsatta.com/2025/07/21/chhollywood-echo-of-love-and-resistance-emerged-from-the-forests-of-bastar-first-look-of-chhattisgarhi-film-maati-launched-at-raipur-press-club/#respond Mon, 21 Jul 2025 16:29:49 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3098 रायपुर/शहरसत्ता।छत्तीसगढ़ी chhollywood सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक नई पेशकश “माटी” का फर्स्ट लुक और पोस्टर आज रायपुर प्रेस क्लब में धूमधाम से लॉन्च किया गया। इस…

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रायपुर/शहरसत्ता।छत्तीसगढ़ी chhollywood सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक नई पेशकश “माटी” का फर्स्ट लुक और पोस्टर आज रायपुर प्रेस क्लब में धूमधाम से लॉन्च किया गया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ी सिनेमा के प्रतिष्ठित निर्देशक सतीश जैन, मनोज वर्मा और वरिष्ठ निर्माता रॉक दाशवानी विशेष रूप से मौजूद रहे।

द्वंद्व और संघर्ष से जन्मी है ये फिल्म 

फिल्म “माटी” केवल एक प्रेम कथा नहीं है, बल्कि यह बस्तर की उस जमीनी हकीकत की कहानी है, जहां प्रेम और हिंसा एक-दूसरे से टकराते हैं। जहां आदिवासी संस्कृति की खुशबू है, वहीं जल, जंगल और ज़मीन के नाम पर छीनाझपटी, खून-खराबा और सत्ता की भूख भी है। इसी द्वंद्व और संघर्ष से जन्मी है ये फिल्म  एक सशक्त प्रतिरोध की प्रतीक।जब बंदूकें संवाद करने लगती हैं, तब प्रेम सबसे बड़ा विद्रोह बन जाता है।फिल्म “माटी” उसी विद्रोह की गाथा है, जहां इंसानियत, संवेदना और प्रेम अब भी ज़िंदा है।

फिल्म से जुड़ी प्रमुख जानकारियाँ:

प्रोडक्शन:चन्द्रिका फिल्म प्रोडक्शन,

कथा व निर्माण: सम्पत झा

पटकथा/छायांकन/संपादन/निर्देशन: अविनाश प्रसाद

सहायक निर्देशक: मनोज पाण्डेय, आशुतोष प्रसाद

कैमरा असिस्टेंट: आदित्य प्रसाद, पदम नाथ कश्यप

गीत-संगीत: मनोज पाण्डेय, संतोष दानी, यशपाल ठाकुर, दिलीप पाण्डेय,नृत्य निर्देशन: राकेश यादव, भूमिका साहा

रूपसज्जा और परिधान: राकेश यादव, रीना बघेल, सविता रामटेके, नीलिमा दास मानिकपुरी,

बैकग्राउंड म्यूज़िक: अमित प्रधान, ऑडियोग्राफी: नीरज वर्मा

वितरण: लक्की रंगशाही, ग्राफिक्स: चिली फिल्म्स

पोस्टर डिज़ाइनिंग: मंडल ग्राफिक्स,ट्रैक रिकॉर्डिंग: मिलन स्टूडियो,पोस्ट प्रोडक्शन: श्री प्रसाद फिल्म्स

प्रोडक्शन कंट्रोल: शिराज गाजी, डिजिटल पार्टनर: दिग्विजय वर्मा, क्रिएटिव विजन

फिल्म से जुड़े कलाकारों और तकनीकी टीम ने प्रेस क्लब में मौजूद सभी दर्शकों और मीडिया प्रतिनिधियों से फिल्म को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

माटी” न केवल मनोरंजन करेगी, बल्कि दर्शकों को बस्तर की सच्चाइयों से रूबरू कराएगी।

31 अक्टूबर 2025 से यह फिल्म बड़े पर्दे पर दस्तक देगी और छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

 

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Bollywood: रोल छिना, आत्मसम्मान टूटा,लेकिन हारा नहीं, बॉलीवुड एक्टर नवीन पंडिता… https://shaharsatta.com/2025/07/15/bollywood-role-taken-away-self-esteem-broken-but-did-not-give-up-bollywood-actor-naveen-pandita/ https://shaharsatta.com/2025/07/15/bollywood-role-taken-away-self-esteem-broken-but-did-not-give-up-bollywood-actor-naveen-pandita/#respond Tue, 15 Jul 2025 14:43:44 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2924 पहली ‘हाँ’ और ‘ना’ ने सिखाया क्या करना है. नविन पंडिता की शरसत्ता से एक्सक्लूसिव बातचीत. मैंने अपने Bollywoodकरियर की पहली ‘हाँ’ से सीखा कि मुझे क्या नहीं करना है,…

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पहली ‘हाँ’ और ‘ना’ ने सिखाया क्या करना है.

नविन पंडिता की शरसत्ता से एक्सक्लूसिव बातचीत.

मैंने अपने Bollywoodकरियर की पहली ‘हाँ’ से सीखा कि मुझे क्या नहीं करना है, और पहली ‘ना’ से सीखा कि मुझे क्या करना है,कुछ इसी अंदाज़ में अपनी सफर की शुरुआत पर बात करते हैं बॉलीवुड एक्टर नवीन पंडिता, जो अपने हर फैसले को सीख में बदलना जानते हैं।

Actor Naveen pandita

फिटनेस फ्रीक माने जाने वाले नवीन बताते हैं, मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि फिट दिखूं, कपड़े मुझ पर सूट करें और स्क्रीन पर अच्छा दिखूं। लेकिन एक बार मुझे एक शॉर्ट फिल्म के लिए थोड़ा अनफिट लुक अपनाना था, पेट बाहर निकालना पड़ा। मैं तैयार था, लेकिन शूट के वक़्त मुझे लुक की वजह से रिप्लेस कर दिया गया।शायद मैं उस फ्रेम में फिट नहीं बैठा पर मैंने पूरी कोशिश की थी।

Actor Naveen pandita

वो आगे कहते हैं, जिस तरह का आर्टिस्ट मैं बनना चाहता हूं, उसमें लुक बदलना, फिजिक बदलना, ये सब मेरी आर्टिस्ट्री का हिस्सा है। उनके लिए शरीर भी एक कलाकार का माध्यम है, चाहे पतले का रोल हो या हट्टे-कट्टे का।

Actor Naveen pandita

आउटसाइडर होने पर नवीन बेझिझक बोलते हैं,

ये एक माइंडसेट की बात है। अगर काम आता है, सीखने की इच्छा है, तो इंडस्ट्री में बहुत काम है।वो कहते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत और कार्तिक आर्यन जैसे स्टार्स की सक्सेस इस बात का सबूत है कि टैलेंट और मेहनत अपना रास्ता बना ही लेते हैं। हालांकि, कुछ तजुर्बे कड़वे भी रहे। एक टीवी रोल के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि सेट पर ट्रीटमेंट वैसा ही मिलता है जैसा आपका रोल होता है।

Actor Naveen pandita

“मेरा सेल्फ-एस्टीम डाउन हो गया था। उसे दोबारा गेन करने में वक्त लगा।पर सीख यहीं से मिली,बहुत सोच समझ कर ‘हाँ’ बोलिए, और अपने गट इंस्टिंक्ट की सुनिए। नवीन मानते हैं कि आर्टिस्ट के लिए इंस्टिंक्ट सबसे बड़ा गाइड होता है, अच्छा, बुरा, सही, गलत सब वही बताता है।

Actor Naveen pandita

सुपरस्टार बनने की चाह तो है, लेकिन वो कहते हैं, “पता नहीं बना हूँ या नहीं, पर मैं सिर्फ खुद को बेहतर बनाने में लगा हूं।नवीन हर तरह की फिल्में करना चाहते हैं,मसाला, आर्ट, सब्जेक्ट बेस्ड क्योंकि उनके लिए असली लड़ाई खुद से है, और जीत भी खुद पर ही होनी चाहिए।

और अंत में, वो बड़ी विनम्रता से कहते हैं

मैंने कुछ खोया नहीं, सिर्फ पाया है… क्योंकि नंगे आए थे, धीरे-धीरे पा रहे हैं। और इसके लिए मैं दिल से grateful हूं।

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शिक्षा गुणवत्ता सुधारने रायपुर में “मिशन उत्कर्ष” की शुरुआत https://shaharsatta.com/2025/07/08/mission-utkarsh-started-in-raipur-to-improve-the-quality-of-education/ https://shaharsatta.com/2025/07/08/mission-utkarsh-started-in-raipur-to-improve-the-quality-of-education/#respond Tue, 08 Jul 2025 07:08:22 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2849 पढ़े रायपुर, बढ़े रायपुर: 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में 100% रिजल्ट का लक्ष्य रायपुर (शहर सत्ता)। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप रायपुर जिला प्रशासन ने विद्यार्थियों की शिक्षा गुणवत्ता…

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पढ़े रायपुर, बढ़े रायपुर: 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में 100% रिजल्ट का लक्ष्य

रायपुर कलेक्टर गाैरव सिंह एवं एसएसपी लाल उमेंद सिंह।

रायपुर (शहर सत्ता)। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप रायपुर जिला प्रशासन ने विद्यार्थियों की शिक्षा गुणवत्ता सुधारने और बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करने के लिए “मिशन उत्कर्ष” की औपचारिक शुरुआत की है। इस अवसर पर न्यू सर्किट हाउस रायपुर में जिले के सभी स्कूल प्राचार्यों की विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें मिशन की कार्ययोजना, रणनीतियां और क्रियान्वयन की रूपरेखा साझा की गई।

विषयवार रणनीति से मिलेगी सफलता : कलेक्टर

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि “मिशन उत्कर्ष” केवल परीक्षा की तैयारी भर नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को समग्र मार्गदर्शन और प्रेरणा देने का अभियान है। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि वह पूरे वर्ष की विषयवार शैक्षणिक कार्ययोजना तैयार करे और परिणामोन्मुखी कार्यशैली अपनाए।

कलेक्टर ने सभी प्राचार्यों से आग्रह किया कि स्कूल जाते समय हेलमेट पहनने की अनिवार्यता सुनिश्चित करें और बच्चों, अभिभावकों व शिक्षकों को भी ट्रैफिक नियमों के पालन के प्रति जागरूक करें। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए स्कूलों में पौधारोपण अभियान चलाने का भी आह्वान किया।

रायपुर बने प्रदेश का मॉडल : एसएसपी

एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने कहा कि रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी है और यहां किया गया हर कार्य प्रदेश के लिए मिसाल बनता है। उन्होंने मिशन उत्कर्ष को सफल बनाने की प्रतिबद्धता जताई और कहा कि सभी मिलकर रायपुर को प्रदेश के टॉप-3 जिलों में शामिल करें।
उन्होंने स्कूली बच्चों को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, साइबर अपराधों से बचाव और ट्रैफिक नियमों के प्रति भी सजग करने पर बल दिया।

“मिशन उत्कर्ष” का फोकस

100% उत्तीर्णता सुनिश्चित करना

80%+ अंक पाने वाले छात्रों की संख्या में वृद्धि

राज्य मेरिट सूची में रायपुर जिले के अधिक से अधिक विद्यार्थियों को स्थान दिलाना

बोर्ड पैटर्न पर मूल्यांकन: मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाएं

मॉडल उत्तर लेखन, विषय आधारित अभ्यास, और नियमित फीडबैक प्रणाली

कमजोर छात्रों के लिए संदेह समाधान सत्र और विशेष कक्षाएं

श्रेष्ठ शिक्षकों, स्कूलों और टॉपर्स को “लंच विथ कलेक्टर” जैसे विशेष पुरस्कार

सहयोगी विभागों की भागीदारी

पुलिस विभाग ने साइबर क्राइम के खतरों से सतर्क करते हुए स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया। स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान भारत और वय वंदना कार्ड की जानकारी दी और ऑन स्पॉट कार्ड निर्माण का तरीका समझाया। कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।

भविष्य की ओर एक मजबूत कदम

“मिशन उत्कर्ष” सिर्फ परीक्षा परिणाम सुधारने की योजना नहीं, बल्कि रायपुर के स्कूली शिक्षा स्तर को राज्य में आदर्श बनाने की दूरदर्शी पहल है। इस कार्यशाला में जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन, एएसपी श्री लखन लाल पटले, अपर कलेक्टर श्रीमती अभिलाषा पैकरा, डीईओ श्री विजय खंडेलवाल, जिला समन्वयक श्री केएस पटले समेत बड़ी संख्या में अधिकारी और प्राचार्य उपस्थित रहे।

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Editorial by sukant rajput: ख़त्म होती पवित्रता  https://shaharsatta.com/2025/07/08/editorial-by-sukant-rajput-purity-is-vanishing/ https://shaharsatta.com/2025/07/08/editorial-by-sukant-rajput-purity-is-vanishing/#respond Tue, 08 Jul 2025 05:50:45 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2845 सम्पादिकी सुकांत राजपूत  शहरसात्ता/ रायपुर. कुछ समय पहले तक यह सोचा भी नहीं जा सकता था कि कोई आईएएस अधिकारी गिरफ्तार हो जाएगा। भारत में अधिकारी गिरफ्तार नहीं होते थे।…

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सम्पादिकी सुकांत राजपूत 
Sukant Rajput (Editor in Chief)

शहरसात्ता/ रायपुर. कुछ समय पहले तक यह सोचा भी नहीं जा सकता था कि कोई आईएएस अधिकारी गिरफ्तार हो जाएगा। भारत में अधिकारी गिरफ्तार नहीं होते थे। घोटालों में नेता बदनाम होते थे या पकड़े जाते थे। अधिकारी बेदाग रहते थे। बोफोर्स से लेकर चारा घोटाले और संचार से लेकर आदर्श घोटाले तक किसी अधिकारी के पकड़े जाने की शायद ही मिसाल हो। कोयला घोटाले में जरूर एक आईएएस फंसे थे लेकिन अदालत ने उनको भी बरी कर दिया है। परंतु अब आए दिन किसी न किसी अधिकारी के गिरफ्तार होने की खबर आती है। अकेले झारखंड में तीन आईएएस अधिकारी अभी जेल में हैं। विनय चौबे और छवि रंजन कार्यरत आईएएस हैं और अमित प्रकाश रिटायर हैं। ये तीनों किसी न किसी मामले में जेल में बंद हैं। कुछ दिन पहले ही लंबा समय जेल में बिता कर आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल जमानत पर छूटी हैं।

उधर ओडिशा ने 10 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए आईएएस अधिकारी धीमान चकमा को गिरफ्तार किया गया है। उनको घर से 37 लाख रुपए नकद मिले। वे जेल में बंद हैं। ओडिशा में ही राजस्व सेवा के एक अधिकारी जो ईडी के डिप्टी डायरेक्टर थे उनको भी घूस लेते गिरफ्तार किया गया। छत्तीसगढ़ में आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई और रानू साहू को गिरफ्तार किया गया था। दोनों को हाल ही में जमानत मिली है। लेकिन पूर्व आईएएस अभी जेल में बंद हैं उनको जमानत नहीं मिली है। इस बीच रानू साहू को आईएएस पति जयप्रकाश मौर्य को भी कोयला घोटाले में आरोपी बनाया गया है। यह सिर्फ झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल राज्यों का मामला नहीं है। बिहार में भी आईएएस अधिकारी संजीव हंस जेल में बंद हैं। यह बिल्कुल नई परिघटना है। इसका एक नतीजा यह हुआ है कि नेताओं की तरह अधिकारियों की छवि भी आम लोगों की नजर में खराब हो रही है।

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BOLLYWOOD: मुंबई बॉलीवुड कास्टिंग काउच का कड़वा सच: नेहा सिंघानिया ने दिखाई राह, कहा,टैलेंट की कद्र है, समझौते की नहीं! https://shaharsatta.com/2025/07/08/mumbai-the-bitter-truth-of-bollywood-casting-couch-neha-singhania-showed-the-way-said-talent-is-valued-not-compromise/ https://shaharsatta.com/2025/07/08/mumbai-the-bitter-truth-of-bollywood-casting-couch-neha-singhania-showed-the-way-said-talent-is-valued-not-compromise/#respond Tue, 08 Jul 2025 02:49:32 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2823 हर सपना चमकता नहीं, कुछ जले हुए किस्सों से भी भरा होता है… शहरसात्ता/मुंबई. (Bollywood) मुंबई सपनों का शहर, जहाँ हर दिन कोई न कोई लड़की अपने सपनों की गठरी…

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हर सपना चमकता नहीं, कुछ जले हुए किस्सों से भी भरा होता है…

शहरसात्ता/मुंबई. (Bollywood) मुंबई सपनों का शहर, जहाँ हर दिन कोई न कोई लड़की अपने सपनों की गठरी लेकर स्टेशन पर उतरती है। उनमें से एक बनना चाहती है सुपरस्टार, कोई बनना चाहती है रोल मॉडल। लेकिन इस चमकती दुनिया के पीछे एक अंधेरा भी है कास्टिंग काउच।

Casting director /Neha singhania

कास्टिंग डायरेक्टर नेहा सिंघानिया, जो मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में नई प्रतिभाओं को मौका देने के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने सोशल मीडिया पर एक सशक्त वीडियो शेयर करते हुए बताया कि, जब कोई नई लड़की इंडस्ट्री में आती है, तो हम नहीं जानते कि वो किन हालातों से गुज़र कर यहां तक पहुंची है। क्या उसको फैमिली का सपोर्ट है? क्या वो घर से भागकर आई है? क्या वो आर्थिक रूप से सक्षम है? ये हम कभी नहीं जानते.

नेहा ने खास तौर पर कास्टिंग काउच जैसे ट्रैप पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह लड़कियों को प्राइवेट ऑडिशन के नाम पर होटल रूम में बुलाया जाता है, और वहां उन्हें कहा जाता है

इंडस्ट्री में काम ऐसे ही मिलता है, अगर एडजस्ट नहीं किया, तो चांस नहीं मिलेगा…

लेकिन नेहा सिंघानिया का साफ संदेश है 

“डरो नहीं, रुको नहीं, झुको नहीं! टैलेंट की हमेशा वैल्यू होती है, न कि किसी समझौते की।”

उन्होंने लड़कियों को यह भी सलाह दी 

👉 ऐसे किसी कॉल पर भरोसा न करें जहाँ जगह साफ़ न बताई गई हो।

👉 किसी ऑडिशन या मीटिंग पर अकेले न जाएँ।

👉 किसी भरोसेमंद व्यक्ति को लोकेशन की जानकारी दें।

👉 ज़रूरत पड़े तो पुलिस या महिला आयोग की मदद लेने में हिचकिचाएँ नहीं।

नेहा का यह वीडियो न सिर्फ़ हिम्मत देने वाला है, बल्कि इंडस्ट्री के काले सच को बेनकाब करता है। वह कहती हैं,

यह इंडस्ट्री मेहनत की भूखी है, मजबूरी की नहीं।

अगर आप सपनों के शहर में हैं, तो खुद को टूटने न दें। संघर्ष हर किसी के हिस्से आता है, लेकिन अपनी अस्मिता और आत्म-सम्मान को कभी गिरवी न रखें। ये दुनिया आपकी मेहनत से ही आपको पहचान देगी।

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Editorial by sukant rajput:गैजेट की गुलामी https://shaharsatta.com/2025/07/01/editorial-by-sukant-rajput-slavery-of-gadgets/ https://shaharsatta.com/2025/07/01/editorial-by-sukant-rajput-slavery-of-gadgets/#respond Tue, 01 Jul 2025 15:04:28 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2747   संपादकीय•सुकांत राजपूत उपकरणों के द्वारा, टीवी – मोबाइल से पता नहीं कितने विचार रोज हमारे मन तक पहुंच रहे हैं। कुछ विचार हमें निराश कर देते हैं। जो हमें…

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संपादकीय•सुकांत राजपूत

उपकरणों के द्वारा, टीवी – मोबाइल से पता नहीं कितने विचार रोज हमारे मन तक पहुंच रहे हैं। कुछ विचार हमें निराश कर देते हैं। जो हमें निराश कर देते हैं। ऐसे विचारों से बचें। अच्छे विचार हमारे जीवन में दिव्यता ला सकते हैं। (Editorial by sukant rajput) अगर हमारी संगति सकारात्मक और सात्विक है तो जीवन में उन्नति जरूर मिलेगी। खुद की, अपने परिजनों की और मित्रों की उन्नति के लिए बहुत आवश्यक भी है। लेकिन आज की पीढ़ी और उनकी मित्रमंडली उपकरणों से मिल रही ज्यादातर बुरी और कमतर अच्छी विचारधाराओं में उलझकर रह गई है। किशोर मन विचलित हो रहा है और सब कुछ जानने उसे महसूस करने के लिए तत्पर भी है। कोलकाता व्यभिचार में लिप्त आरोपियों की मनोदशा भी उपकरणों की उत्तेजना का ही परिणाम है। यहां संगती और सत्संग भी अहम् भूमिका में है।

हमें अपनी आत्मा पर दो बार काम करना चाहिए- सोने के पहले, उठने के बाद। फिर शरीर पर चार बार काम करना चाहिए- स्नान, पूजन, भोजन, शयन के समय। लेकिन मन पर प्रतिपल काम करना पड़ेगा। मन का मामला ऐसा है कि आपने जरा-सा मौका दिया तो मन काम दिखा जाएगा। सवाल उठता है मन पर प्रतिपल किन बातों का काम किया जाए। मन का संयम और शरीर की सावधानी- इससे आप ठीक हो जाएंगे। लेकिन

के प्रभाव से बीमार हुए तो इलाज आप ही को करना पड़ेगा। क्योंकि मन जो भीतर करता है, ये बाहर किसी को तभी पता चलता है जब घृणित कार्य के बाद परिणाम सामने होता है।

भारत में रात को सोने के पहले 80% लोग उपकरणों का उपयोग करते हैं और जब इलेक्ट्रॉनिक गैजेट हाथ से गिर जाता है, तब सोते हैं। 10 से 11 के बीच सोना सबसे अच्छा है। सोते समय और उठने के तुरंत बाद भी हमें उपकरणों से दूरी बनाए रखना चाहिए। उपकरण हमारे भीतर की जैविक घड़ी को बिगाड़ रहा है। इन्हीं वजहों से तो हम चिड़चिड़े हो रहे हैं। इसको अंग्रेजी में सर्केडियन रिदम कहते हैं। यह अच्छे-अच्छों का बिगड़ा हुआ है। अगर आप देर रात तक जाग रहे हैं, तो आपकी जैविक घड़ी गड़बड़ाएगी। दिनभर हम कामकाज, रिश्तों का दबाव लेते हैं और फिर उपकरणों के ब्लैक होल में समाते जाते हैं। स्वाभिक है ऐसे में रिश्ते और विचार आपके उपकरणीय यंत्रों के स्वादानुसार ही आएंगे।

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