RAIPURPRESSCLUB Archives - शहर सत्ता https://shaharsatta.com/tag/raipurpressclub/ Wed, 28 May 2025 08:57:10 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 Raipur bouncers & journalists Conflict : अस्पताल और डॉक्टर्स की हिफाज़त पहलवानों के जिम्मे क्यों ? https://shaharsatta.com/2025/05/28/raipur-bouncers-journalists-conflict-why-is-the-protection-of-hospital-and-doctors-in-the-hands-of-wrestlers/ https://shaharsatta.com/2025/05/28/raipur-bouncers-journalists-conflict-why-is-the-protection-of-hospital-and-doctors-in-the-hands-of-wrestlers/#respond Wed, 28 May 2025 08:56:23 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2499 0 बाउंसर्स और रायपुर के पत्रकारों के बीच बढ़ा विवाद, आरोपी पहलवानों के समर्थन में जूनियर डॉक्टर्स तो पत्रकारों के पक्ष में उतरे वकील शहरसात्ता/रायपुर। Raipur bouncers & journalists Conflict…

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0 बाउंसर्स और रायपुर के पत्रकारों के बीच बढ़ा विवाद, आरोपी पहलवानों के समर्थन में जूनियर डॉक्टर्स तो पत्रकारों के पक्ष में उतरे वकील

शहरसात्ता/रायपुर। Raipur bouncers & journalists Conflict : “बाउंसर” एक ऐसा शब्द जो हमें सुरक्षा, शक्ति और नियंत्रण की याद दिलाता है। इनकी तैनाती इसलिए की जाती है ताकि ये सेलिब्रिटी, राजनेता, और खास शख्सियतों को अनचाही भीड़ या संभावित खतरों से हिफाज़त कर सकें। लेकिन जब यही सुरक्षा के रक्षक, हिंसा के प्रतीक बनने लगें, तो सवाल उठना लाज़मी है। क्या किसी ने उन्हें पीटने, मारने या धमकाने का अधिकार दिया है कि वो ‘सुरक्षा’ के नाम पर आम नागरिक या किसी को भी पीटें? क्या “सुरक्षा” की परिभाषा में लात-घूंसे और घसीटकर मारना शामिल है? राजधानी रायपुर समेत छत्तीसगढ़ और अन्य मेट्रो सिटीज़ में बाउंसर्स तैनाती स्टेटस सिंबॉल से कारोबार में तब्दील हो चूका है।

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल डॉ भीमराव अम्बेडकर (मेकाहारा) में अस्पताल प्रबंधन द्वारा बाउंसर्स की तैनाती और पत्रकार बिरादरी का विवाद चर्चा में है। पुलिस चौकी अस्पताल में है, सिक्युरिटी गार्ड्स भी हैं फिर भी महंगे बाउंसर्स को अस्पताल और डॉक्टर्स की हिफाज़त में तैनात किया जाना अपने आप में कई सवालों को पैदा करता है। दो दिन पूर्व हुए पत्रकार और बाउंसर्स के बीच विवाद हाथापाई और सड़क तक पहुंच गई थी

मामला शांत होने की बजाये (bouncers & journalists Conflict)न्यायलय और समर्थन में उतरे वकील और डॉक्टर्स के दोनों पक्षों को सहीं बताने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। जिनियर डॉक्टर्स संघ का कहना है कुछ पहलवान और बाउंसर्स टाइप के पत्रकारों ने विवाद पैदा किया और अस्पताल में नियम विरुद्ध घुसकर घटना को विवादित किये हैं। जबकि पत्रकार और वकील बाउंसर्स और अस्पताल प्रबंधन को इसका दोष दे रहे हैं। हालांकि पुलिस ने आरोपी बाउंसर्स का मुंडन करके जुलुस निकल भी दिया है। पत्रकारों का कहना है कि उनको कवरेज से रोका गया और हिंसात्मक रवैया बाउंसर्स ने अख्तियार कर रखा था।

‘संयम’ से सुरक्षा करना है ‘हिंसा’ से नहीं

बाउंसरों की ड्यूटी है भीड़ को कंट्रोल करना, स्थिति को संभालना, न कि विवाद को और बढ़ाना। लेकिन कई बार आयोजनों, क्लबों और राजनीतिक रैलियों में, मामूली विवादों पर बाउंसरों द्वारा की गई मारपीट सामने आती है। और तब सवाल उठता है क्या उन्हें आदेश दिया गया था यह करने या ये उनकी अपनी मनमानी थी? अगर नहीं, तो फिर इन बाउंसरों की ट्रेनिंग, जवाबदेही और सीमा तय कौन कर रहा है।

समाचारों के अपडेट्स के लिए ये भी देखें SHAHAR SATTA (26 May to 01 June 2025)

कानून से ऊपर नहीं है बाउंसर्स

बाउंसर कोई न्यायाधीश या पुलिस नहीं हैं, जो मौके पर फैसला सुना सकें। उनके हाथों में ताकत जरूर है, लेकिन कानून का पालन करना उनकी भी उतनी ही जिम्मेदारी है जितनी किसी आम नागरिक की। अगर विपरीत परिस्थितियां निर्मित भी हों तब भी कानून को बिना हाथ में लिए एक दायरा तैयार कर बाउंसर्स को उक्त संस्थान और शख्सियतों की रक्षा करना है। बात बिगड़ने पर इन्हें हायर करने वाली संस्थान या व्यक्ति या फिर एजेंसी भी जिम्मेदार होगी।

जब ताकत बेकाबू हो जाती है तो…

कई घटनाओं में देखने को मिला है कि किसी क्लब में एंट्री ना देने की बात पर, बाउंसरों ने ग्राहक को बेरहमी से पीटा है। किसी शादी या इवेंट में हंगामा हुआ – तो मेहमानों को जबरदस्ती धकेला गया। सवाल उठता है कि क्या ये ‘सुरक्षा’ है या ‘शक्ति प्रदर्शन’? बाउंसर को एक हद तक सुरक्षा के लिए रखा जाता है, डर फैलाने के लिए नहीं। उनका काम है संवेदनशीलता और संयम के साथ स्थिति को संभालना ना कि ताकत के नशे में लोगों की इज्जत और शरीर दोनों को घायल करना। समय आ गया है जब बाउंसरों की भूमिका, अधिकार और ज़िम्मेदारी पर एक खुली और स्पष्ट नीति बनें। ताकि सुरक्षा की आड़ में हिंसा को कोई और नाम ना दिया जा सके।

सुलगते सवाल

1. क्या बाउंसरों को उचित ट्रेनिंग मिल रही है?
2. क्या उनके काम की सीमाएं तय हैं?
3. अगर कोई घटना घटती है, तो जिम्मेदारों की भूमिका ?
4. बाउंसरों की कार्रवाई की निगरानी कौन करेगा ?
5. क्या मामले बिगड़ने पर सिर्फ बाउंसर ही दोषी होगा?

आवश्यक योग्यता और नियम (Norms)

1. आयु सीमा: आमतौर पर 21–40 वर्ष
2. कद: न्यूनतम 5 फीट 8 इंच (कुछ एजेंसियाँ 6 फीट प्राथमिकता देती हैं)
3. शारीरिक बनावट: बलिष्ठ, फिट और दमदार शरीर
4. स्वास्थ्य: मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट ज़रूरी

समाचारों के अपडेट्स के लिए ये भी देखें SHAHAR SATTA (26 May to 01 June 2025)

शैक्षणिक योग्यता

1.न्यूनतम योग्यता: आमतौर पर 10वीं या 12वीं पास
2. अंग्रेज़ी या स्थानीय भाषा का ज्ञान: क्लब, होटल, इवेंट आदि में संवाद के लिए
प्रशिक्षण (Training)

प्रशिक्षण और यह नियम अनिवार्य

Private Security Agencies Regulation Act (PSARA) के तहत कुछ राज्यों में सुरक्षा गार्ड्स की तरह बाउंसरों के लिए भी प्रशिक्षण और नियम अनिवार्य है।

0 इनकी ट्रेनिंग में शामिल होता है….

1. भीड़ नियंत्रण (Crowd management)
2. आत्मरक्षा (Self-defense)
3. कानून की सामान्य जानकारी (Legal awareness)
4. आपात स्थिति में प्रतिक्रिया (Emergency response)

0 पुलिस वेरिफिकेशन

1. बाउंसर नियुक्त करने से पहले पुलिस सत्यापन (Police Verification) आवश्यक होता है।
2. कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।

0 प्रमाणन / लाइसेंस

1. यदि बाउंसर किसी प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी के माध्यम से काम करता है, तो उस एजेंसी के पास PSARA लाइसेंस होना अनिवार्य है।
2. व्यक्तिगत बाउंसरों को आमतौर पर अलग से कोई लाइसेंस नहीं चाहिए, लेकिन क्लब या होटल में काम करते समय ID कार्ड और नियुक्ति पत्र अनिवार्य होता है।

समाचारों के अपडेट्स के लिए ये भी देखें SHAHAR SATTA (26 May to 01 June 2025)

0 व्यवसायिक व्यवहार और प्रशिक्षण

1. बाउंसर को धैर्यवान, संयमित और संयोजक होना चाहिए।
2. गुस्से में या उकसावे पर हिंसा नहीं करनी चाहिए।
3. महिलाओं और बच्चों के प्रति संवेदनशील और सजग व्यवहार अपेक्षित होता है।

0 बाउंसर से जुड़े सुझाव और बदलाव बदलाव

1. कुछ राज्यों में अब यह मांग उठी है कि बाउंसरों की सरकारी मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग होनी चाहिए।
2. CCTV निगरानी और ड्यूटी के समय बॉडी कैमरा लगाने की भी मांग की गई है।
3. क्लब मालिकों और आयोजकों पर भी ज़िम्मेदारी डालने की योजना है।

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Raipur Press Club : अध्ययनशील पत्रकारों को सर्वसुविधायुक्त गोविंद लाल वोरा लाइब्रेरी समर्पित https://shaharsatta.com/2025/04/13/raipur-press-club/ https://shaharsatta.com/2025/04/13/raipur-press-club/#respond Sun, 13 Apr 2025 18:32:27 +0000 https://shaharsatta.com/?p=1812 विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की किताबों के लिए 1 लाख रुपये देने की घोषणा, रायपुर प्रेस क्लब, अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने की पत्रकारों द्वारा किताब लिखने पर प्रति…

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विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की किताबों के लिए 1 लाख रुपये देने की घोषणा, रायपुर प्रेस क्लब, अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने की पत्रकारों द्वारा किताब लिखने पर प्रति वर्ष दो किताबों का प्रकाशन करवाने की घोषणा

शहर सत्ता/रायपुर। Raipur Press Club : तत्कालीन मध्य प्रदेश के दूसरे और छत्तीसगढ़ प्रदेश के सबसे पहले प्रेस क्लब रायपुर प्रेस क्लब में स्वर्गीय गोविंद लाल वोरा लाइब्रेरी का शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल और विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री उमेश त्रिवेदी की गौरवमयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह ने प्रेस क्लब लाइब्रेरी में किताबों के लिए स्वनिधि से 1 लाख रुपए देने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि 30 दिन के भीतर किताबों के लिए राशि हस्तांतरित कर दी जाएगी। स्व गोविंद लाल वोरा को याद करते हुए डॉ. रमन सिंह ने उनकी शालीनता और जीवन पर्यंत पत्रकारिता करते रहने की बातें साझा की। उन्होंने कहा, मेरे मुख्यमंत्री रहते और उससे पहले भी कभी भी वोरा जी ने मुझसे किसी काम के लिए नहीं कहा। उन्होंने याद करते बताया कि मजाक में वे वोरा जी को संपादकों का देवानंद कहते थे।

इस मौके पर ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल ने किताबों और पढ़ने-लिखने के महत्व के अनुभव साझा किए, राजनांदगांव की लाइब्रेरी में किताब पढ़ने की शुरुआत के प्रसंग साझा करते हुए, उन्होंने पत्रकारों को पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार उमेश त्रिवेदी ने कहा, भले ही वे मध्यप्रदेश से हैं, लेकिन दोनों प्रदेशों में पत्रकारिता का डीएनए एक ही रहा है। उन्होंने रायपुर प्रेस क्लब के प्रयासों की तारीफ की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक श्री अरुण वोरा ने भी लाइब्रेरी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और प्रेस क्लब के प्रयासों की सराहना की।

रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने आगामी दिनों में प्रेस क्लब में वीडियो प्रोडक्शन स्टूडियो, फोटो गैलरी बनाने के योजना साझा की। साथ ही पत्रकारों से, विशेषकर नए पत्रकारों से आग्रह किया कि वे रायपुर प्रेस क्लब की लाइब्रेरी का सदुपयोग करें। इस अवसर पर उन्होंने पत्रकारों द्वारा किताब लिखने पर प्रति वर्ष दो किताबों के प्रकाशन की जिम्मेदारी प्रेस क्लब द्वारा उठाने की घोषणा की। उन्होंने पत्रकारों के लिए फेलोशिप और पत्रकारिता पुरस्कार दिए जाने सम्बन्धी योजनाओं की भी जानकारी दी।

रायपुर प्रेस क्लब के महासचिव वैभव शिव पांडे ने भी पत्रकारों को पुस्तकालय में किताब पठन के लिए प्रेरित किया, साथ ही बहुत ही जल्द लाइब्रेरी में हर प्रकार की किताबों के संकलन होने की बात कही। इस मौके पर रायपुर प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष संदीप शुक्ला, कोषाध्यक्ष रमन हलवाई, संयुक्त सचिव तृप्ति सोनी एवं अरविंद सोनवानी समेत बड़ी संख्या में वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब सदस्य उपस्थित रहे।

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