poorankiriactor Archives - शहर सत्ता https://shaharsatta.com/tag/poorankiriactor/ Wed, 06 Aug 2025 02:35:03 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 Chhollywood: छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनिंग को पहचान दिलाने की राह पर करुणा देवांगन… https://shaharsatta.com/2025/08/06/chhollywood-karuna-devangan-on-the-path-of-getting-recognition-for-dress-designing-in-chhollywood/ https://shaharsatta.com/2025/08/06/chhollywood-karuna-devangan-on-the-path-of-getting-recognition-for-dress-designing-in-chhollywood/#respond Wed, 06 Aug 2025 02:34:51 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3182 शहरसात्ता/रायपुर। फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब करुणा देवांगन ने (chhollywood) छॉलीवुड में कदम रखा, तो उनके मन में सपना था कि हर फिल्म में कुछ नया…

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शहरसात्ता/रायपुर। फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब करुणा देवांगन ने (chhollywood) छॉलीवुड में कदम रखा, तो उनके मन में सपना था कि हर फिल्म में कुछ नया और क्रिएटिव करने का अवसर मिलेगा। लेकिन हकीकत उनसे थोड़ी अलग रही। करुणा बताती हैं कि शुरुआत में काम का दायरा बेहद सीमित था। ज़्यादातर मौकों पर उनका काम केवल कपड़े अरेंज करने तक सीमित रहा, जबकि डिज़ाइनिंग का स्कोप बेहद कम था। हालांकि कुछ प्रोजेक्ट्स में उन्हें अपनी कला दिखाने का मौका जरूर मिला, लेकिन ऐसे मौके बहुत कम रहे।

करुणा का कहना है कि छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनर्स को आज भी वह पहचान और मेहनताना नहीं मिलता, जिसके वे हकदार हैं। उनका काम पर्दे पर सीधे नज़र नहीं आता, जिस वजह से उन्हें क्रेडिट कम मिलता है। साथ ही, कम बजट होने के कारण मेहनताना भी सीमित रहता है, जबकि मेहनत बहुत अधिक करनी पड़ती है।वे मानती हैं कि बजट की कमी का असर क्रिएटिविटी और मेहनताना दोनों पर पड़ता है। सीमित संसाधनों के चलते डिज़ाइनर्स अपनी पूरी क्रिएटिविटी दिखा नहीं पाते और तकनीकी टीम में सबसे पहले कटौती ड्रेस डिपार्टमेंट पर ही होती है।

करुणा का मानना है कि यदि सही बजट, प्रोफेशनल टीम और स्टैंडर्ड पे स्ट्रक्चर उपलब्ध हो, तो छॉलीवुड में भी ड्रेस डिज़ाइनिंग को एक इंडस्ट्री का रूप दिया जा सकता है। लड़कियों के लिए इस फील्ड में सबसे बड़ी चुनौतियाँ सेफ्टी और पहचान हैं, क्योंकि कई बार लोकेशन पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं होती और मेहनत करने के बावजूद उन्हें क्रेडिट नहीं मिलता।

फैशन डिजाइनिंग में ग्रैजुएट और पोस्ट-ग्रैजुएट करुणा देवांगन पिछले दो सालों से छॉलीवुड में शॉर्ट फिल्मों, म्यूजिक वीडियो और फीचर फिल्मों में बतौर कॉस्ट्यूम स्टाइलिस्ट और डिज़ाइनर काम कर रही हैं। उनका सपना है कि छॉलीवुड में ड्रेस डिज़ाइनिंग को एक अलग पहचान और सम्मान मिले।

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Chhollywood: रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी, एसोसिएट डायरेक्शन से एनिमेशन फिल्मों के सपने तक का सफर… https://shaharsatta.com/2025/08/05/chhollywood-bobby-soni-nagvanshi-of-raipur-journey-from-associate-direction-to-the-dream-of-animation-films/ https://shaharsatta.com/2025/08/05/chhollywood-bobby-soni-nagvanshi-of-raipur-journey-from-associate-direction-to-the-dream-of-animation-films/#respond Tue, 05 Aug 2025 05:23:49 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3172 शहरसात्ता/रायपुर. (Chhollywood) रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी ने 2019 से फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी, हिंदी और इंग्लिश फिल्मों के साथ-साथ एड फिल्म्स,…

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शहरसात्ता/रायपुर. (Chhollywood) रायपुर के बॉबी सोनी नागवंशी ने 2019 से फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी, हिंदी और इंग्लिश फिल्मों के साथ-साथ एड फिल्म्स, म्यूजिक एल्बम और अवॉर्ड-विनिंग स्टॉप मोशन शॉर्ट फिल्मों का निर्देशन किया है,बॉबी मानते हैं कि डायरेक्टर और एसोसिएट डायरेक्टर का काम एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है,जहाँ डायरेक्टर दिमाग होता है, वहीं एसोसिएट डायरेक्टर, जो विज़न को हकीकत में बदलता है।

बॉबी को पहला बड़ा ब्रेक सोनी लिव की वेब सीरीज जहानाबाद से मिला, जहाँ उन्होंने मुंबई के असिस्टेंट डायरेक्टर्स के साथ मिलकर बड़े स्केल पर काम किया। वहीं से उन्हें लगा कि अब वे वाकई फिल्मी दुनिया का हिस्सा हैं। उनकी पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म में सुपरस्टार अनुज शर्मा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और सबके सामने तारीफ़ की, जिसे बॉबी अपनी ज़िंदगी का टर्निंग पॉइंट मानते हैं।

एक इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म में तो उन्होंने अकेले ही कई डिपार्टमेंट्स संभाले, कैमरा असिस्टेंट से लेकर प्रोडक्शन तक। अंग्रेज़ी भाषा की दिक्कतों और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद उनकी जुगाड़ू सोच और शांत दिमाग ने डायरेक्टर को बेहद प्रभावित किया।

बॉबी के मुताबिक, एक सफल एसोसिएट डायरेक्टर बनने के लिए मैनेजमेंट, क्रिएटिव विज़न और प्रॉब्लम सॉल्विंग की स्किल्स बेहद ज़रूरी हैं। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि बड़े डायरेक्टर बनने से पहले छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स में असिस्टेंट की भूमिका निभाकर अनुभव हासिल करें।

बॉबी आगे चलकर  एनिमेशन फिल्मों का निर्देशन करना चाहते हैं और खुद को एक सफल एनिमेशन फ़िल्ममेकर के रूप में देखना चाहते हैं।

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Modeling: डबल मास्टर्स से मिस छत्तीसगढ़ तक,डिम्पल ठाकुर की अनोखी उड़ान https://shaharsatta.com/2025/07/28/modeling-from-double-masters-to-miss-chhattisgarh-dimple-thakurs-unique-flight/ https://shaharsatta.com/2025/07/28/modeling-from-double-masters-to-miss-chhattisgarh-dimple-thakurs-unique-flight/#respond Mon, 28 Jul 2025 09:53:06 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3141 0 ग्लैमर और ज्ञान का संगम शहरसात्ता/रायपुर। पढ़ाई और ग्लैमर की दुनिया का दुर्लभ संगम हैं डिम्पल ठाकुर। (Modelling) कंप्यूटर साइंस और आर्ट्स में डबल मास्टर्स करने के बाद उन्होंने…

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0 ग्लैमर और ज्ञान का संगम

शहरसात्ता/रायपुर। पढ़ाई और ग्लैमर की दुनिया का दुर्लभ संगम हैं डिम्पल ठाकुर। (Modelling) कंप्यूटर साइंस और आर्ट्स में डबल मास्टर्स करने के बाद उन्होंने कॉलेज प्रोफेसर के रूप में करियर की शुरुआत की, लेकिन कला के प्रति अपने जुनून को भी कभी पीछे नहीं छोड़ा।

मेहनत से मिलती है असली पहचान, पैसों से नहीं

सिलाई-कढ़ाई, पेंटिंग, कुकिंग और ब्यूटी कोर्सेज़ के साथ उन्होंने अपनी पहचान बनाई और खुद डिज़ाइन किए कपड़े पहनकर इवेंट्स में छाई रहीं। उनकी मेहनत ने उन्हें मिस कोरबा और मिस छत्तीसगढ़ जैसे बड़े खिताब दिलाए।

फिल्मी दुनिया ठुकराई

फिल्मों और एलबम्स से ऑफ़र आने के बावजूद उन्होंने फिल्मी दुनिया को ठुकराया। उनका कहना है,आज मॉडलिंग इवेंट्स हमारे प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं, पर कहीं-कहीं पैसों के दम पर विजेता चुनने से असली टैलेंट दब जाता है। सपने देखना हर किसी का हक़ है, इसलिए सही प्लेटफ़ॉर्म चुनकर मेहनत करें और जागरूक रहें।

डिम्पल ठाकुर ने सभी युवाओं से अपील की कि “Be Aware & Stay Hard Working”, क्योंकि मेहनत और सच्ची लगन ही असली सफलता की कुंजी है।

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Chhollywood: अंजली सिंह चौहान का अभिनय सफर और सपना ‘बहादुर कलारिन’ https://shaharsatta.com/2025/07/24/chhollywood-anjali-singh-chauhans-acting-journey-and-dream-bahadur-kalarin/ https://shaharsatta.com/2025/07/24/chhollywood-anjali-singh-chauhans-acting-journey-and-dream-bahadur-kalarin/#respond Thu, 24 Jul 2025 04:35:50 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3127 0 मां सिर्फ किरदार नहीं, साधना है . शहरसात्ता/रायपुर।मां के किरदार को निभाना अभिनय नहीं, एक साधना है, ‘chhollywood’ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की दमदार अभिनेत्री अंजली सिंह चौहान ने अपने…

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0 मां सिर्फ किरदार नहीं, साधना है .

शहरसात्ता/रायपुर।मां के किरदार को निभाना अभिनय नहीं, एक साधना है, ‘chhollywood’ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की दमदार अभिनेत्री अंजली सिंह चौहान ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास पहचान बनाई है। 22 से अधिक सुपरहिट फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी अंजली ने ‘कारी’, ‘दइहान’, ‘मय दीया तैं मोर बाती’, ‘मया 3’, ‘बी.ए. फाइनल ईयर’, ‘माटीपुत्र’, ‘मोर छईया भुइंया 2-3’, जैसी चर्चित फिल्मों में विविध और गहरे किरदार निभाए हैं।

किरदारों में वजन.

अंजली का कहना है, “सपनों का कोई अंत नहीं होता। मां और सास जैसे किरदार मुझे गहराई से जोड़ते हैं, क्योंकि उनमें भावनाएं और चुनौतियाँ दोनों होती हैं।” उनका मानना है कि उम्र के साथ अनुभव और समझ बढ़ती है, जिससे किरदारों में वजन और सच्चाई खुद-ब-खुद आ जाती है।अभिनय के प्रति उनकी ईमानदारी इस बात से झलकती है कि अगर निर्देशक उन्हें 25 साल की लड़की का रोल दें, तो भी वह पूरे समर्पण से उस किरदार को निभाने को तैयार रहती हैं।

अभिनय के प्रति जुनून और समर्पण

जब उनसे पूछा गया कि अब तक का सबसे प्रिय किरदार कौन-सा है, तो उन्होंने बिना रुके कहा बहादुर कलारिन.यह किरदार उनके दिल के बेहद करीब है, और इसे निभाना उनका सपना है।अंजली आज भी मानती हैं कि कोई भी रोल छोटा नहीं होता, उसे बड़ा बनाना कलाकार की सोच और मेहनत पर निर्भर करता है। उनके अभिनय के प्रति जुनून और समर्पण छत्तीसगढ़ी सिनेमा की प्रेरणा है।

 

 

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Bollywood: थिएटर से ‘वीर सावरकर’ तक, संतोष ओझा का बेबाक सफर, जिसे नकारना अब मुमकिन नहीं… https://shaharsatta.com/2025/07/22/bollywood-from-theatre-to-veer-savarkar-santosh-ojhas-outspoken-journey-which-is-now-impossible-to-deny/ https://shaharsatta.com/2025/07/22/bollywood-from-theatre-to-veer-savarkar-santosh-ojhas-outspoken-journey-which-is-now-impossible-to-deny/#respond Tue, 22 Jul 2025 04:25:57 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3102 शहर सत्ता/मुंबई/रायपुर. BOLLYWOOD बिहार के बक्सर से निकलकर FTII और चंडीगढ़ इंडियन थिएटर से अभिनय की बारीकियां सीखने वाले संतोष ओझा का मानना है कि करियर में मिली पहली “ना”…

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शहर सत्ता/मुंबई/रायपुर. BOLLYWOOD बिहार के बक्सर से निकलकर FTII और चंडीगढ़ इंडियन थिएटर से अभिनय की बारीकियां सीखने वाले संतोष ओझा का मानना है कि करियर में मिली पहली “ना” और “हां” दोनों ही उनके असली गुरु रहे हैं। उन्होंने ‘लक्ष्मी बॉम्ब’, ‘मेड इन हेवन 2’ और हालिया ‘वीर सावरकर’ में लोकमान्य तिलक की भूमिका निभाकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
Santosh ojha Bollywood actor

संतोष मानते हैं कि सिर्फ लुक्स की पहचान कलाकार को संतुष्ट नहीं कर सकती। वे विविध और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में यकीन रखते हैं। सीमाएं तोड़ने की बात पर उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों को पार कर एक किरदार में खुद को ढाला।

Santosh ojha Bollywood actor

बॉलीवुड में आउटसाइडर होने के दर्द पर वो साफ कहते हैं, “यहां सिर्फ टैलेंट नहीं, किस्मत और जुझारूपन भी चाहिए।” उन्होंने स्वीकार किया कि करियर बचाने के लिए कुछ नकारात्मक रोल भी निभाने पड़े जिन्हें करते वक्त आत्मग्लानि हुई, पर परफॉर्मेंस का संतोष मिला।

सुपरस्टार बनने की चाह में उन्होंने गांव, मिट्टी और बचपन की बहुत-सी चीजें खो दीं, लेकिन आज भी सकारात्मक सोच के साथ जद्दोजहद कर रहे हैं। युवाओं को उनका संदेश है मस्ती में मेहनत करो, भक्ति और शक्ति से जीवन को साधो।

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Chhollywood: बस्तर के जंगलों से निकली प्रेम और प्रतिरोध की गूंज – छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘माटी’ का फर्स्ट लुक रायपुर प्रेस क्लब में लॉन्च https://shaharsatta.com/2025/07/21/chhollywood-echo-of-love-and-resistance-emerged-from-the-forests-of-bastar-first-look-of-chhattisgarhi-film-maati-launched-at-raipur-press-club/ https://shaharsatta.com/2025/07/21/chhollywood-echo-of-love-and-resistance-emerged-from-the-forests-of-bastar-first-look-of-chhattisgarhi-film-maati-launched-at-raipur-press-club/#respond Mon, 21 Jul 2025 16:29:49 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3098 रायपुर/शहरसत्ता।छत्तीसगढ़ी chhollywood सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक नई पेशकश “माटी” का फर्स्ट लुक और पोस्टर आज रायपुर प्रेस क्लब में धूमधाम से लॉन्च किया गया। इस…

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रायपुर/शहरसत्ता।छत्तीसगढ़ी chhollywood सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक नई पेशकश “माटी” का फर्स्ट लुक और पोस्टर आज रायपुर प्रेस क्लब में धूमधाम से लॉन्च किया गया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ी सिनेमा के प्रतिष्ठित निर्देशक सतीश जैन, मनोज वर्मा और वरिष्ठ निर्माता रॉक दाशवानी विशेष रूप से मौजूद रहे।

द्वंद्व और संघर्ष से जन्मी है ये फिल्म 

फिल्म “माटी” केवल एक प्रेम कथा नहीं है, बल्कि यह बस्तर की उस जमीनी हकीकत की कहानी है, जहां प्रेम और हिंसा एक-दूसरे से टकराते हैं। जहां आदिवासी संस्कृति की खुशबू है, वहीं जल, जंगल और ज़मीन के नाम पर छीनाझपटी, खून-खराबा और सत्ता की भूख भी है। इसी द्वंद्व और संघर्ष से जन्मी है ये फिल्म  एक सशक्त प्रतिरोध की प्रतीक।जब बंदूकें संवाद करने लगती हैं, तब प्रेम सबसे बड़ा विद्रोह बन जाता है।फिल्म “माटी” उसी विद्रोह की गाथा है, जहां इंसानियत, संवेदना और प्रेम अब भी ज़िंदा है।

फिल्म से जुड़ी प्रमुख जानकारियाँ:

प्रोडक्शन:चन्द्रिका फिल्म प्रोडक्शन,

कथा व निर्माण: सम्पत झा

पटकथा/छायांकन/संपादन/निर्देशन: अविनाश प्रसाद

सहायक निर्देशक: मनोज पाण्डेय, आशुतोष प्रसाद

कैमरा असिस्टेंट: आदित्य प्रसाद, पदम नाथ कश्यप

गीत-संगीत: मनोज पाण्डेय, संतोष दानी, यशपाल ठाकुर, दिलीप पाण्डेय,नृत्य निर्देशन: राकेश यादव, भूमिका साहा

रूपसज्जा और परिधान: राकेश यादव, रीना बघेल, सविता रामटेके, नीलिमा दास मानिकपुरी,

बैकग्राउंड म्यूज़िक: अमित प्रधान, ऑडियोग्राफी: नीरज वर्मा

वितरण: लक्की रंगशाही, ग्राफिक्स: चिली फिल्म्स

पोस्टर डिज़ाइनिंग: मंडल ग्राफिक्स,ट्रैक रिकॉर्डिंग: मिलन स्टूडियो,पोस्ट प्रोडक्शन: श्री प्रसाद फिल्म्स

प्रोडक्शन कंट्रोल: शिराज गाजी, डिजिटल पार्टनर: दिग्विजय वर्मा, क्रिएटिव विजन

फिल्म से जुड़े कलाकारों और तकनीकी टीम ने प्रेस क्लब में मौजूद सभी दर्शकों और मीडिया प्रतिनिधियों से फिल्म को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

माटी” न केवल मनोरंजन करेगी, बल्कि दर्शकों को बस्तर की सच्चाइयों से रूबरू कराएगी।

31 अक्टूबर 2025 से यह फिल्म बड़े पर्दे पर दस्तक देगी और छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

 

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Bollywood: रोल छिना, आत्मसम्मान टूटा,लेकिन हारा नहीं, बॉलीवुड एक्टर नवीन पंडिता… https://shaharsatta.com/2025/07/15/bollywood-role-taken-away-self-esteem-broken-but-did-not-give-up-bollywood-actor-naveen-pandita/ https://shaharsatta.com/2025/07/15/bollywood-role-taken-away-self-esteem-broken-but-did-not-give-up-bollywood-actor-naveen-pandita/#respond Tue, 15 Jul 2025 14:43:44 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2924 पहली ‘हाँ’ और ‘ना’ ने सिखाया क्या करना है. नविन पंडिता की शरसत्ता से एक्सक्लूसिव बातचीत. मैंने अपने Bollywoodकरियर की पहली ‘हाँ’ से सीखा कि मुझे क्या नहीं करना है,…

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पहली ‘हाँ’ और ‘ना’ ने सिखाया क्या करना है.

नविन पंडिता की शरसत्ता से एक्सक्लूसिव बातचीत.

मैंने अपने Bollywoodकरियर की पहली ‘हाँ’ से सीखा कि मुझे क्या नहीं करना है, और पहली ‘ना’ से सीखा कि मुझे क्या करना है,कुछ इसी अंदाज़ में अपनी सफर की शुरुआत पर बात करते हैं बॉलीवुड एक्टर नवीन पंडिता, जो अपने हर फैसले को सीख में बदलना जानते हैं।

Actor Naveen pandita

फिटनेस फ्रीक माने जाने वाले नवीन बताते हैं, मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि फिट दिखूं, कपड़े मुझ पर सूट करें और स्क्रीन पर अच्छा दिखूं। लेकिन एक बार मुझे एक शॉर्ट फिल्म के लिए थोड़ा अनफिट लुक अपनाना था, पेट बाहर निकालना पड़ा। मैं तैयार था, लेकिन शूट के वक़्त मुझे लुक की वजह से रिप्लेस कर दिया गया।शायद मैं उस फ्रेम में फिट नहीं बैठा पर मैंने पूरी कोशिश की थी।

Actor Naveen pandita

वो आगे कहते हैं, जिस तरह का आर्टिस्ट मैं बनना चाहता हूं, उसमें लुक बदलना, फिजिक बदलना, ये सब मेरी आर्टिस्ट्री का हिस्सा है। उनके लिए शरीर भी एक कलाकार का माध्यम है, चाहे पतले का रोल हो या हट्टे-कट्टे का।

Actor Naveen pandita

आउटसाइडर होने पर नवीन बेझिझक बोलते हैं,

ये एक माइंडसेट की बात है। अगर काम आता है, सीखने की इच्छा है, तो इंडस्ट्री में बहुत काम है।वो कहते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत और कार्तिक आर्यन जैसे स्टार्स की सक्सेस इस बात का सबूत है कि टैलेंट और मेहनत अपना रास्ता बना ही लेते हैं। हालांकि, कुछ तजुर्बे कड़वे भी रहे। एक टीवी रोल के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि सेट पर ट्रीटमेंट वैसा ही मिलता है जैसा आपका रोल होता है।

Actor Naveen pandita

“मेरा सेल्फ-एस्टीम डाउन हो गया था। उसे दोबारा गेन करने में वक्त लगा।पर सीख यहीं से मिली,बहुत सोच समझ कर ‘हाँ’ बोलिए, और अपने गट इंस्टिंक्ट की सुनिए। नवीन मानते हैं कि आर्टिस्ट के लिए इंस्टिंक्ट सबसे बड़ा गाइड होता है, अच्छा, बुरा, सही, गलत सब वही बताता है।

Actor Naveen pandita

सुपरस्टार बनने की चाह तो है, लेकिन वो कहते हैं, “पता नहीं बना हूँ या नहीं, पर मैं सिर्फ खुद को बेहतर बनाने में लगा हूं।नवीन हर तरह की फिल्में करना चाहते हैं,मसाला, आर्ट, सब्जेक्ट बेस्ड क्योंकि उनके लिए असली लड़ाई खुद से है, और जीत भी खुद पर ही होनी चाहिए।

और अंत में, वो बड़ी विनम्रता से कहते हैं

मैंने कुछ खोया नहीं, सिर्फ पाया है… क्योंकि नंगे आए थे, धीरे-धीरे पा रहे हैं। और इसके लिए मैं दिल से grateful हूं।

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CHHOLLYWOOD: हीरो को तवज्जो, हीरोइनों की अनदेखी,जब ग्लैमर भारी पड़े टैलेंट पर… https://shaharsatta.com/2025/07/15/chhollywood-heroes-get-importance-heroines-are-ignored-when-glamour-overpowers-talent/ https://shaharsatta.com/2025/07/15/chhollywood-heroes-get-importance-heroines-are-ignored-when-glamour-overpowers-talent/#respond Tue, 15 Jul 2025 06:00:06 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2907 ० छालीवुड में एक भी निर्माता ऐसा नहीं, जो ‘राज़ी’, ‘मॉम’ जैसी महिला प्रधान फिल्में बनाए छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री में औसतन महीने में तीन से चार फिल्में बनती हैं,(CHHOLLYWOOD) बावजूद…

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० छालीवुड में एक भी निर्माता ऐसा नहीं, जो ‘राज़ी’, ‘मॉम’ जैसी महिला प्रधान फिल्में बनाए

छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री में औसतन महीने में तीन से चार फिल्में बनती हैं,(CHHOLLYWOOD) बावजूद इसके अब तक छालीवुड में फीमेल एक्ट्रेस की अनदेखी करते हुए इंडस्ट्री को मेल एक्टर्स के लिए समर्पित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में बेहतरीन महिला अभिनेत्रियों की न तो कमी है और न ही प्रदेश में महिला प्रधान विषयों की। बावजूद इसके, बॉलीवुड में श्रीदेवी अभिनीत फिल्म मॉम, आलिया भट्ट अभिनीत राज़ी जैसी कई ऐसी फिल्में हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर कामयाब रही हैं। कमोबेश बॉलीवुड की तर्ज पर छालीवुड में भी महिला विषयक फिल्में न बनना यह दर्शाता है कि फिल्म निर्माता मेल एक्टर्स को तरजीह देते हैं और फीमेल एक्टर्स को सिर्फ सुंदर गुलदान में रखे फूल की तरह प्रदर्शित करके अपने काम की इतिश्री कर लेते हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ की कुछ उभरती अभिनेत्रियों से शहर सत्ता के कला समीक्षक पुरन किरी ने चर्चा की। उन्होंने क्या कहा, उनके संपादित अंश यहां प्रस्तुत हैं।

ELSA GOSH ACTREES

एल्सा घोष बोलीं ,मैं शोपीस नहीं, किरदार निभाती हूं.

शहर सत्ता/रायपुर।छत्तीसगढ़ी फिल्मों में काम करने वाली बंगाल की बेटी एल्सा घोष ने महज़ 9 साल की उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था।(CHHOLLYWOOD) तेलुगु, बंगाली, उड़िया और छत्तीसगढ़ी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। 15 वर्षों के अनुभव में वे 20 से अधिक फिल्मों में नज़र आ चुकी हैं और हर बार उन्होंने दमदार भूमिका निभाई है।
ग्लैमर से आगे अभिनय मैं सिर्फ ग्लैमर का चेहरा नहीं हूं, मैं किरदार में जीती हूं।” एल्सा साफ़ कहती हैं कि वे हमेशा स्पष्ट और ईमानदार काम की प्रक्रिया में विश्वास रखती हैं।
नेपोटिज़्म और राजनीति पर: नेपोटिज़्म हर जगह है, सिर्फ छॉलीवुड में नहीं। लेकिन जीत हमेशा टैलेंट और मेहनत की होती है।”एक्ट्रेस को शोपीस समझे जाने पर: कभी-कभी ऐसा लगता है कि हमें सिर्फ सजावट की चीज़ समझ लिया गया है। गाने और सुंदर कपड़े पहनाने तक ही सीमित कर देते हैं। जबकि एक्ट्रेस उससे कहीं ज़्यादा होती है।छत्तीसगढ़ी सिनेमा की क्वालिटी पर: अगर मुझे पावर मिले, तो सबसे पहले बेहूदी फिल्मों की भीड़ को रोकूंगी। क्वालिटी ज़रूरी है, क्वांटिटी नहीं। 50 खराब फिल्मों के बाद जब कोई अच्छी फिल्म आती है, तब भी लोग नहीं देखते क्योंकि पहले से छवि खराब हो चुकी होती है।पछतावा नहीं, फोकस है: जो हुआ, जैसे हुआ, वह अनुभव था। मैं आज भी सही ट्रैक पर हूं। मैं सिनेमा को सजाने नहीं, संवारने आई हूं।नए कलाकारों के लिए संदेश: सिर्फ काम पर ध्यान दो, पॉलिटिक्स से दूर रहो और मेहनत करते जाओ ,यही रास्ता है आगे बढ़ने का।

ISHIKA YADAV ACTREES

ईशिका यादव का साफ़ कहना ,कॉम्प्रोमाइज़ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं.

छत्तीसगढ़ी फिल्मों की जानी-मानी अदाकारा ईशिका यादव ने इंडस्ट्री में अपने 7 साल पूरे कर लिए हैं। (CHHOLLYWOOD) अब तक उन्होंने 9–10 फिल्मों में अभिनय किया है और हर बार अपनी सादगी और गहराई से दर्शकों को प्रभावित किया है।
आत्मसम्मान सबसे ऊपर: मैं रोल चुनते वक्त आत्म-सम्मान को प्राथमिकता देती हूं। छत्तीसगढ़ का दर्शक सादगी पसंद करता है, इसलिए मैं सोच-समझकर काम करती हूं।
कंप्रोमाइज़ नहीं किया: मैं बहुत स्ट्रिक्ट हूं, इसलिए शायद ही किसी ने कभी कोशिश की हो कि मैं समझौता करूं।
नेपोटिज़्म पर बेबाक राय: यहां काम की कद्र होती है, रिश्तों की नहीं। जो अच्छा करता है, उसे ज़रूर मौका मिलता है।
ग्लैमर डॉल की छवि पर: मैं हमेशा से महिला-केंद्रित फिल्म करना चाहती थी, लेकिन शायद निर्माता रिस्क लेने से डरते हैं।
पछतावे भरे पल: अभिनेत्री बनने के बाद सबसे बड़ा नुकसान ये रहा कि मैं अपने परिवार और संस्कारों से दूर हो गई।
अगर प्रोड्यूसर होतीं तो:लोग सोचते हैं कि प्रोड्यूसर के पास बहुत पावर होती है, पर सच यह है कि सब कुछ उनके हाथ में नहीं होता।
नए कलाकारों को सलाह: बोलो जो सही है, ईमानदारी से काम करो और बेशरम बनो , वरना इंडस्ट्री तुम्हें कमजोर समझेगी।
आख़िरी बात: मैं अपने काम से प्यार करती हूं। किसी को परेशान नहीं किया। बस इतना चाहती हूं कि लोग जुड़ें, लेकिन परेशान न करें। हमारी इंडस्ट्री बहुत अच्छी है ,बस आपसी जलन और खींचतान खत्म करनी होगी।

RAAYA DINGORIYA ACTREES

राया डिंगोरिया ने कहा ,मुझे एक्टिंग से प्यार नहीं, लत है.

बॉलीवुड और छॉलीवुड(CHHOLLYWOOD) की चमकती अदाकारा राया डिंगोरिया का फिल्मी सफर  सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि ज़िद, जुनून और खुद पर भरोसे का उदाहरण है।
सपना नहीं था, आज पैशन है: राया बताती हैं कि उन्होंने कभी एक्टिंग का सपना नहीं देखा था। परिवार की सख़्ती के बीच जब उन्हें पहला विज्ञापन मिला, तो किस्मत ने दरवाज़ा खोला। उसके बाद ‘कुंडली भाग्य’, ‘प्रोफेसर पांडे के पांच परिवार’ जैसे टीवी शो और वेब सीरीज़ के ज़रिए अभिनय की शुरुआत हुई और फिर छत्तीसगढ़ी सिनेमा में कदम रखा। आज वे अपनी तीसरी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं।
कहानी मायने रखती है, नहीं कि कैसे दिख रही हूं: मैं वही रोल चुनती हूं जो मुझे भीतर से चुनौती दे। किरदार में डूबना मेरे लिए सबसे ज़रूरी है।
कंप्रोमाइज़ से दूरी: अब तक कभी कंप्रोमाइज़ नहीं किया। मैं कम लेकिन दमदार प्रोजेक्ट चुनती हूं, सतर्क रहती हूं।
नेपोटिज़्म पर राय: हर सेक्टर में नेपोटिज़्म है। लेकिन मुझे जो भी मिला, वह या तो ऑडिशन या काम देखकर मिला।
ग्लैमर डॉल टैग से दूरी: छॉलीवुड में मुझे जो रोल मिले, वे सशक्त किरदारों पर आधारित रहे हैं। मुझे कभी शोपीस नहीं बनाया गया।
अंतिम मंत्र: मेहनत करो और इतनी ज़िद रखो कि खुद भगवान भी न रोक सकें। सफलता का शॉर्टकट नहीं होता। जो लोग सफर को एंजॉय करते हैं, मंज़िल उन्हीं को मिलती है।
पहचान क्या चाहती हैं: मैं चाहती हूं कि लोग मुझे एक बेहतरीन कलाकार और एक अच्छे इंसान के रूप में याद करें। क्योंकि अच्छा इंसान बनना सबसे ज़रूरी है , बाकी सब पीछे पीछे आता है।

 

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BOLLYWOOD: मुंबई बॉलीवुड कास्टिंग काउच का कड़वा सच: नेहा सिंघानिया ने दिखाई राह, कहा,टैलेंट की कद्र है, समझौते की नहीं! https://shaharsatta.com/2025/07/08/mumbai-the-bitter-truth-of-bollywood-casting-couch-neha-singhania-showed-the-way-said-talent-is-valued-not-compromise/ https://shaharsatta.com/2025/07/08/mumbai-the-bitter-truth-of-bollywood-casting-couch-neha-singhania-showed-the-way-said-talent-is-valued-not-compromise/#respond Tue, 08 Jul 2025 02:49:32 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2823 हर सपना चमकता नहीं, कुछ जले हुए किस्सों से भी भरा होता है… शहरसात्ता/मुंबई. (Bollywood) मुंबई सपनों का शहर, जहाँ हर दिन कोई न कोई लड़की अपने सपनों की गठरी…

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हर सपना चमकता नहीं, कुछ जले हुए किस्सों से भी भरा होता है…

शहरसात्ता/मुंबई. (Bollywood) मुंबई सपनों का शहर, जहाँ हर दिन कोई न कोई लड़की अपने सपनों की गठरी लेकर स्टेशन पर उतरती है। उनमें से एक बनना चाहती है सुपरस्टार, कोई बनना चाहती है रोल मॉडल। लेकिन इस चमकती दुनिया के पीछे एक अंधेरा भी है कास्टिंग काउच।

Casting director /Neha singhania

कास्टिंग डायरेक्टर नेहा सिंघानिया, जो मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में नई प्रतिभाओं को मौका देने के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने सोशल मीडिया पर एक सशक्त वीडियो शेयर करते हुए बताया कि, जब कोई नई लड़की इंडस्ट्री में आती है, तो हम नहीं जानते कि वो किन हालातों से गुज़र कर यहां तक पहुंची है। क्या उसको फैमिली का सपोर्ट है? क्या वो घर से भागकर आई है? क्या वो आर्थिक रूप से सक्षम है? ये हम कभी नहीं जानते.

नेहा ने खास तौर पर कास्टिंग काउच जैसे ट्रैप पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह लड़कियों को प्राइवेट ऑडिशन के नाम पर होटल रूम में बुलाया जाता है, और वहां उन्हें कहा जाता है

इंडस्ट्री में काम ऐसे ही मिलता है, अगर एडजस्ट नहीं किया, तो चांस नहीं मिलेगा…

लेकिन नेहा सिंघानिया का साफ संदेश है 

“डरो नहीं, रुको नहीं, झुको नहीं! टैलेंट की हमेशा वैल्यू होती है, न कि किसी समझौते की।”

उन्होंने लड़कियों को यह भी सलाह दी 

👉 ऐसे किसी कॉल पर भरोसा न करें जहाँ जगह साफ़ न बताई गई हो।

👉 किसी ऑडिशन या मीटिंग पर अकेले न जाएँ।

👉 किसी भरोसेमंद व्यक्ति को लोकेशन की जानकारी दें।

👉 ज़रूरत पड़े तो पुलिस या महिला आयोग की मदद लेने में हिचकिचाएँ नहीं।

नेहा का यह वीडियो न सिर्फ़ हिम्मत देने वाला है, बल्कि इंडस्ट्री के काले सच को बेनकाब करता है। वह कहती हैं,

यह इंडस्ट्री मेहनत की भूखी है, मजबूरी की नहीं।

अगर आप सपनों के शहर में हैं, तो खुद को टूटने न दें। संघर्ष हर किसी के हिस्से आता है, लेकिन अपनी अस्मिता और आत्म-सम्मान को कभी गिरवी न रखें। ये दुनिया आपकी मेहनत से ही आपको पहचान देगी।

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Chhollywood: साधारण शुरुआत से सुपरहिट फिल्मों तक, ये है स्टार विवेक चंद्रा का असली सफर… https://shaharsatta.com/2025/06/30/chhollywood-from-humble-beginnings-to-superhit-films-this-is-the-real-journey-of-star-vivek-chandra/ https://shaharsatta.com/2025/06/30/chhollywood-from-humble-beginnings-to-superhit-films-this-is-the-real-journey-of-star-vivek-chandra/#respond Mon, 30 Jun 2025 09:07:50 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2741 शहरसात्ता/रायपुर. (Chhollywood) कोरबा से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद विवेक चंद्रा ने भिलाई में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान नेहरू हाउस में थिएटर प्ले की तैयारी शुरू की। पढ़ाई…

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शहरसात्ता/रायपुर. (Chhollywood) कोरबा से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद विवेक चंद्रा ने भिलाई में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान नेहरू हाउस में थिएटर प्ले की तैयारी शुरू की। पढ़ाई के साथ-साथ रंगमंच के प्रति जुनून ने उन्हें एक अलग दिशा दी। प्रथम श्रेणी में इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने अपने सपनों की उड़ान के लिए मुंबई का रुख किया।
एक्टर मॉडल विवेक चंद्रा

मुंबई में कई टीवी सीरियल्स में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया, जहां निर्देशक अभिषेक सिंह ने उन्हें भरपूर मार्गदर्शन और सहयोग दिया। क्राइम पेट्रोल से उन्हें पहला ब्रेक मिला। इसके बाद एंड टीवी पर आने वाले धारावाहिक भीमराव अंबेडकर में उन्होंने ज़मींदार की भूमिका निभाई। स्टार भारत के लोकप्रिय धारावाहिक राधा-कृष्ण सहित कई सीरियल्स में उन्होंने अहम किरदार निभाए।

फिल्मों की दुनिया में उनका पहला बड़ा कदम 2022 में सुंदरानी वीडियो वर्ल्ड की सुपरहिट फिल्म मिस्टर मज़नू से हुआ, जिसमें उन्होंने लीड विलेन का किरदार निभाया। इसके बाद रक्षणम, ए दादा रे, और तही मोर आशिकी जैसी फिल्मों में लगातार काम करते रहे। कई म्यूज़िक एल्बम में भी उनकी दमदार मौजूदगी देखी गई।

उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्हें निर्देशक सतीश जैन की बहुचर्चित फिल्म मोर छैंया भुइयाँ 3 में अभिनय का अवसर मिला। इस फिल्म को उन्होंने प्रशिक्षण की तरह लिया, जहाँ सतीश जैन सर के मार्गदर्शन में उन्होंने अभिनय की गहराइयों को महसूस किया। इस दौरान उन्हें अलेक चौधरी, अमित शर्मा, सुनील साहू, भूपेंद्र चंदनिया, अशोक गौर और सलीम चाचा जैसे कलाकारों का भरपूर सहयोग मिला।

विवेक चंद्रा को उम्मीद है कि आने वाले समय में उन्हें इस प्रोडक्शन हाउस के साथ और भी बेहतर काम करने का अवसर मिलेगा। उनके सफर से यह स्पष्ट होता है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से किसी भी मंज़िल को पाया जा सकता है।

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