ODISHAPOLICE Archives - शहर सत्ता https://shaharsatta.com/tag/odishapolice/ Tue, 15 Jul 2025 05:21:52 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 Editorial by sukant rajput: चल भाग चलें… https://shaharsatta.com/2025/07/15/editorial-by-sukant-rajput-lets-run-away/ https://shaharsatta.com/2025/07/15/editorial-by-sukant-rajput-lets-run-away/#respond Tue, 15 Jul 2025 05:21:39 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2904 चल भाग चलें…शहर सत्ता साप्ताहिक समाचार पत्र में प्रकाशित संपादकीय सुकांत राजपूत (Editorial by sukant rajput)समाज के अगुवा जमीन में मुंह गाड़े हैं। पुलिस कबरी बिलाई जैसी भूमिका अदा कर…

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चल भाग चलें…शहर सत्ता साप्ताहिक समाचार पत्र में प्रकाशित संपादकीय

सुकांत राजपूत

(Editorial by sukant rajput)समाज के अगुवा जमीन में मुंह गाड़े हैं। पुलिस कबरी बिलाई जैसी भूमिका अदा कर रही है। क्षेत्रीय नेताओं की तो वोट की वजह से घिग्घी बंध जाती है। ऐसे में पवित्र प्रेम परवान कौन चढ़ाएगा। प्यार को परवान चढाने के बजाए सूली चढाने वाली खाप पंचायतों और प्रेमी युगल को हल में जोतकर कोड़े बरसते हुए खेत जोतने मजबूर करना हमारे गांव रीत बन गई है। आधुनिक सुविधाओं, संसाधनों और पैसे वाली होती पंचायतों के लिए प्यार-व्यार सिर्फ व्यभिचार के सामान है।

रायगड़ा जिले में स्वगोत्रीय युवक-युवती के बीच प्रेम हो जाने से समाज और गांव ने उन्हें सजा देने के लिए हल में बैलों की जगह जोता, खेत जुतवाया, और कोड़े मार-मारकर गांव से निकाल दिया। वीडियो जब वायरल हुआ तो पुलिस ने मामले की जांच चालू की है, लेकिन यह जोड़ा अब कहीं मिल नहीं रहा है। इन्हें सजा देने के पहले गांव में देवी की पूजा करवाई गई, और वहां के आदिवासी समाज की प्रचलित प्रथाओं के मुताबिक इस वर्जित संबंध पर सामाजिक बैठक ने सजा तय कर दी, और इस तरह इस अवांछित जोड़े से छुटकारा पा लिया गया। यह जोड़ा किसी दूसरी जगह बसकर जिंदगी गुजार सकता है, या जान देकर दुनिया भी छोड़ सकता है। दोनों ही नौबतों में इस जोड़े से उसका गांव छूट जा रहा है। ऐसे में गरीब से प्रेम की सजा भुगतने के बदले ग्रामीण प्रेमी यह नहीं बोलेंगे…चल भाग चलें…!

गोत्रीय-स्वगोत्रीय की सजा साधारण प्रेमी युगल को ही है। क्योंकिसालों पहले ऐसे ही स्वगोत्रीय विवाह के विवाद में फंसे राजस्थान के एक शाही परिवार और उस शादी में शामिल हुए सभी सामंती मेहमानों को क्षत्रिय समाज ने जवाब-तालाब किया था। कई राजवाड़ों ने अनभिज्ञता जाहिर कर मुआफ़ी मांग जान छुड़ा लिए। शाही परिवार ने बेटी और अपने दीवान के बेटे के स्वगोत्रीय विवाह को सहीं साबित करने जुगत लगाया। दूर की कौड़ी राजा साहब ने लगाई पुरोहितों की मंडली से तोड़ निकाला गया कि खानदान में अगर तीन पीढ़ियों में कोई स्वगोत्रीय विवाह नहीं हुआ है तो वह जायज है। छुटईया गैंगों ने जो फैसला सुनाया तो शाही परिवार और सामंती वर्चस्व संतुष्ट हुआ। लेकिन रायगड़ा के गरीब प्रेमियों को कौन बचाएगा..!

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