News Archives - शहर सत्ता https://shaharsatta.com/tag/news/ Fri, 24 Jan 2025 13:26:04 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 साप्ताहिक स्तंभ : बातों-बातों में…राम लगाएंगे बेड़ा पार…धमकी “मैं यहां से लडूंगा”… https://shaharsatta.com/2025/01/24/weekly-column-baton-baton-me-by-sukant-rajput/ https://shaharsatta.com/2025/01/24/weekly-column-baton-baton-me-by-sukant-rajput/#respond Fri, 24 Jan 2025 13:26:04 +0000 https://shaharsatta.com/?p=1200 छत्तीसगढ़ साप्ताहिक स्तंभ: वर्ष 2017 से सुकांत राजपूत द्वारा छत्तीसगढ़ की सियासत, नौकरशाही और खबरों के मुत्तल्लिक़ जरुरी मुद्दों पर अनवरत प्रकाशित साप्ताहिक स्तंभ बातों-बातों में… अलहदा अंदाज़ में परोसा…

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छत्तीसगढ़ साप्ताहिक स्तंभ: वर्ष 2017 से सुकांत राजपूत द्वारा छत्तीसगढ़ की सियासत, नौकरशाही और खबरों के मुत्तल्लिक़ जरुरी मुद्दों पर अनवरत प्रकाशित साप्ताहिक स्तंभ बातों-बातों में… अलहदा अंदाज़ में परोसा जाता रहा है। कई इदारों में भीतरखाने की खबरों को अब शहर सत्ता साप्ताहिक समाचार पत्र और शहर सत्ता वेब पोर्टल पर भी आप के लिए इबारत पेश है…

राम लगाएंगे बेड़ा पार…

अयोध्या से लेकर रायपुर के राम मंदिर धाम का ऐसा इक्षापूर्ति प्रताप है कि यहां पैठ रखने वाले सभी की नैय्या पार लग रही है। रायपुर के VIP क्षेत्र मौलश्री से लगे राम मंदिर में दर्शन से जितना लाभ नहीं होता, उससे कहीं ज्यादा राम, लखन, वैदेही, हनुमान और सुग्रीव भवन में सटीक समय पर पहुंचने से हो रहा है। अयोध्या में संपत राय जी और उनके सहायक धर्मवीर की तूती बोलती है तो रायपुर के राम धाम में मंदिर के मुख्य कर्ता-धर्ता का सिक्का चलता है। फिर आगंतुकों को पार्टी में पद तो अफसर पदोन्नति के लिए श्रेणी, कार्य और वजनदारी के अनुपात में अपनी इक्षापूर्ति कर रहे हैं। बातों ही बातों में पार्टी सूत्र ने याद दिलाया कि डीजीपी की दौड़ में शामिल तीन अफसर फुल वर्दी में संघ कार्यालय में नंगे पैर इंतजार में बैठे थे और फोटो खूब वायरल हुई थी। इसलिए तब से अब राम, लक्षमण भवन में राम की क्षत्रछाया में पूर्णतः सुरक्षित व्हाइट कॉलर्स गोधूलि बेला से रात 12 बजे तक छत्तीसगढ़ के पॉवर सेंटर की भक्ति करते देखे जा सकते हैं।

सब यहीं के हो रहे…

छत्तीसगढ़ और खासकर राजधानी रायपुर की तासीर ही कुछ ऐसी है कि सब यहीं के होकर रह जा रहे हैं ! यहां कि आब-ओ-हवा है भी कुछ यूं कि फिर कोई कैसा भी हो उसे अपना लिया जाता है। चंद सालों में सीधे-सादे शहर ने बाहरी ठेकेदारों, IPS और IAS अफसरों से लेकर अपराधियों तक को पसंद आया है। रायपुर के बाशिंदों कारोबार की असीम संभावनाएं और हवा-पानी के साथ खान-पान के मद्देनजर यहां की पुलिस भी सीधी-सादी मानी जाती है। बस और क्या चाहिए, बाहरी गैंग भी यहीं पैबस्त हो गए हैं। अवैध हथियार, चंद लूटपाट, छुरेबाजी, अपहरण, हत्या, दुष्कर्म, सट्टा और बेइंतेहा नशा यूपी, बिहार, झारखंड की मानिंद आम है। बातों ही बातों में एक बेबाक वर्दीधारी ने बताया बहारी राज्यों के स्लीपर सेल की यही पनाहगाह है। अंदाज लगाना आसान है रायपुर पुलिस भी खुलासे के वक्त यही कहती है… बिहारी, झारखंडी, यूपी और तुर्रा यह कि बंगाली गैंग ने यह किया। समझ नहीं आता ये रायपुर है या बाहरी लोगों की आरामगाह ?

पत्तलकार दो फाड़…

इन दिनों क्राइम रिपोर्टिंग उतनी दिलचस्प नहीं रही जब सहीं मायनों में ख़बरें विवेचना का आधार बनती थी। समय पर पुलिस ब्रीफिंग, सीनियरों का साथी क्राइम रिपोर्टर्स को सीखाना-समझाना और नयों का शिद्दत से उसे अमल पर लाया जाता था।उस वक्त अपराधों की रोकथाम की समीक्षात्मक ख़बरों के लिए महकमे के अफसरों की आतुरता से अख़बारों का दोंदर भरता था। अब पत्तलकार गैंग अपना पेट पाल रहे है। समय बीता परम्पराएं टूटी और बचे-खुचे खबरनवीस भी पत्तलकार बनते दिख रहे है। तुर्रा यह कि इनकी बिरादरी भी दो फाड़ हो गई है। इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, पोर्टल और तोपचंद ब्रांड वाली ब्रीड ही दरबारी की भूमिका में है। इसका नतीजा यह कि कोई खबर बनाकर भी व्यथित है और गैंग उसे अलग चलने के नाम पर उसका हुक्का-पानी बंद कर दे रहा है। वहीं अफसरों के चेहते पत्तलकारों के पास पूरी फुटेज, अंदरूनी जानकारी के बाद भी भापुसे. से खबर नहीं बनाने या उसे फेवर में पलटाने का नुस्खा हासिल बदनाम बिरादरी अंदर-बहार, जमीन विवाद से लेकर हर वह कमाई का जरिया बन चुकी है।

धमकी “मैं यहां से लडूंगा”…

सूबे में नगरीय निकाय का ऐलान हो चुका, नामांकन का दौर ज़ारी है। कांग्रेस भाजपा अभी अपने प्रत्याशियों के लिए सिर फुट्टवल से बचने के लिए एक सिस्टम बनाकर चुनाव की बात कह रही है। हालांकि इसके उलट कांग्रेस के एक निवर्तमान महापौर ने फ़िल्मी स्टाइल में अपने ही पार्टियों के प्रतिद्वंदियों को धमकी दी है। ख़बर है कि पहले निवर्तमान महापौर ने अपनी पार्टी से उन नेताओं को बुलवाया जो उनके पुराने वार्ड से सटा हुआ है। मीटिंग ली…चाय नाश्ता भी करवाया फिर…तुगलकी फरमान सुनाते हुए ये कहा कि “मैं महापौर हूँ…अब मुझे इस वार्ड से चुनाव लड़ना है…तो अपनी अर्ज़ियाँ वापस ले लें।” मीटिंग में इस बात को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और विरोध भी किया, पर जिला चयन समिति ने पूर्व सूबा-ए-सदर के ख़ासमख़ास का सिंगल नाम भेजकर पूरा खेल ही पलट दिया। इससे एक बात तो साफ़ है पीसीसी में आज भी वर्तमान से अध्यक्ष से ज़्यादा पूर्व मुखिया का सिक्का चलता है।

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बातों-बातों में…मंत्री से ज्यादा साए का रुआब, ‘पॉवर सेंटर’ का पता चल गया…कैसे रहे दोनों डिप्टी CM बेखबर ? https://shaharsatta.com/2025/01/05/in-the-course-of-conversation-the-shadow-has-more-authority-than-the-minister-the-power-center-was-revealed-how-did-both-deputy-cms-remain-unaware/ https://shaharsatta.com/2025/01/05/in-the-course-of-conversation-the-shadow-has-more-authority-than-the-minister-the-power-center-was-revealed-how-did-both-deputy-cms-remain-unaware/#comments Sun, 05 Jan 2025 12:55:25 +0000 https://shaharsatta.com/?p=739 छत्तीसगढ़ साप्ताहिक स्तंभ: वर्ष 2017 से सुकांत राजपूत द्वारा छत्तीसगढ़ की सियासत, नौकरशाही और खबरों के मुत्तल्लिक़ जरुरी मुद्दों पर अनवरत प्रकाशित साप्ताहिक स्तंभ बातों-बातों में… अलहदा अंदाज़ में परोसा…

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छत्तीसगढ़ साप्ताहिक स्तंभ: वर्ष 2017 से सुकांत राजपूत द्वारा छत्तीसगढ़ की सियासत, नौकरशाही और खबरों के मुत्तल्लिक़ जरुरी मुद्दों पर अनवरत प्रकाशित साप्ताहिक स्तंभ बातों-बातों में… अलहदा अंदाज़ में परोसा जाता रहा है। कई इदारों में भीतरखाने की खबरों को अलहदा अंदाज़ में पेश करते रहने के बाद अब से शहर सत्ता साप्ताहिक समाचार पत्र और शहर सत्ता वेब पोर्टल पर भी इबारत पढ़ें…

मंत्री से ज्यादा साए का रुआब…

कृषि और एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक विकास विभाग में वजीर से ज्यादा एक प्यादे का रुआब है। महकमें में खुलकर लोग बोलने भी लगे है….”बंगले से नहीं ऐश्वर्या रेसीडेंसी से नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है।” बातों ही बातों में हमारे कानों तक भी यह पहुंची तो मामले की तस्दीक करने बंगले पहुच गए। अफवाह सच साबित हुई। मंत्री से ज्यादा उनके साथ साए (परछाई) की तरह रहने वाला एक 50 से 52 साल का शख्स का रुआब दिखा। बंगले के गेट में एक संकेत भरे हॉर्न के बजते ही बिना सुरक्षा जांच के गाड़ी तेजी से अंदर आई। कार से मंत्री जी के पुराने एचएम स्कॉड की कमान सम्हालने वाला साया नीचे उतरा। तेज क़दमों से दफ्तर पहुंचते ही मंत्री के ओएसडी लोगों में प्रणाम करने की होड़ मच गई। धम्म से मंत्री के सोफे में बैठे शख्स ने आदेशात्मक अंदाज़ में वहां आए मुलाकातियों के सामने अफसर और स्टाफ को कुछ कहा और फिर सीधे अंदर चले गए। पड़ताल के बाद पता चला गृहमंत्री थे तब से लेकर अब एक बार फिर से राजेश भाई जी का ही सिक्का चलता है। यूं ही लोग नहीं कहते हैं “भाजपा के सदस्य ‘बनिये’ !”

‘पॉवर सेंटर’ का पता चल गया…

नेता, अफसर और मिडिया तक छत्तीसगढ़ सरकार में ‘पॉवर सेंटर’ की पतासाजी में थे। सालभर की खासी मशकत्त के बाद भी सब सरकार में पॉवर सेंटर तलाशते रहे। आखिरकार थक-हार कर कुछ लोग अमित शाह और जय शाह को छत्तीसगढ़ का पॉवर सेंटर बताते रहे। दो शाह का नाम सुनते ही ट्रांसफर, पोस्टिंग, निकाय की टिकिट से लेकर निगम, मंडल, आयोग और प्राधिकरण की चाह रखने वाले निराश हो गए थे। अब पॉवर सेंटर का भी पता चल गया है और लोगों के काम भी लाइनअप होने लगे हैं। नौकरशाहों से लेकर अपने फ़रमाइशी कामों के लिए लोग संगठन महामंत्री पवन साय के निवास से लेकर प्रदेश कार्यालय की दूसरी मंजिल तक दौड़ लगाते देखे जा सकते हैं। पार्टी के एक व्यापारिक सदस्य ने बातों-बातों में ही बोल दिया…पॉवर सेंटर का खुलासा संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ कार में बगल की सीट पर बैठते ही हो गया था। पवन साय बहुत ही समर्पित संगठन पदाधीकारी भी हैं और ‘साय’ भी हैं। अजय जामवाल, नितिन नबीन भी संगठन प्रमुख पर पूरा एतबार कर रहे हैं। यहां तक सुनने में आ रहा है कि विधानसभा चुनाव में ज्यादातर टिकिट इनकी ही पसंद से दी गई थी और जीत भी मिली। पॉवर सेंटर की एक और पहचान ‘सवन्नी’ यहीं पाए जाते हैं।

कैसे रहे दोनों डिप्टी CM बेखबर ?

बस्तर में सरकारी काम के एवज में खजाने से करोड़ों रुपए भुगतान होता रहा। अरुण साव के पास पीडब्लूडी है और विजय शर्मा के पास पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग। फिर भी एक बावर्ची एसपीओ बन गया, फिर कांग्रेसी और ठेकेदारी में करोड़ों कमाकर भाजपाई बनते ही अपनी करतूत छुपाने के लिए बेरहम कातिल बन गया। लेकिन दोनों डिप्टी CM कैसे बीजापुर ही नहीं बस्तर की इस गड़बड़ी से बेखबर रहे ? 56 करोड़ की सड़क का 112 करोड़ पेमेंट कर दिया गया। पहले भी दंतेवाड़ा में आरईएस द्वारा बिना सड़क बनाए पैसे भुगतान पर विधानसभा में बवाल मचा था। इस पर पंचायत मंत्री विजय शर्मा ने चार अफसरों को सस्पेंड करने का ऐलान किया था। अब पत्रकार मुकेश चंद्राकार हत्याकांड में पीडब्लूडी के अफसर निशाने पर हैं। कानूनविद और अनुभवी मंत्री अरुण साव नक्सल बेल्ट में होने वाले करोड़ों के कथित सरकारी कार्यों की सच्चाई से पर्दा कब तक उठाएंगे इसका जवाब वक्त के गर्त में है। हालांकि पत्रकारों और RTI एक्टिविस्टों के पास बस्तर में खर्चे गए सरकारी पैसों का कच्चा चिट्ठा है।

26 जनवरी के बाद आचार संहिता…

छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के चुनाव की तैयारियां प्रशासनिक परंपरा के मुताबिक ठीक ही चल रही है। लेकिन हमेशा की तरह आचार संहिता को लेकर अटकलबाजों ने सभी को कन्फ्यूज कर दिया है। सबसे पहले कयास लगा 5 या 7 जनवरी को आचार संहिता लग जाएगी। ट्रांसफर-पोस्टिंग और मंत्री बैठकें तेज हो गई। फिर दिवाली, राज्योत्सव, सरकार का एक साल, अमित शाह का पखवाड़ेभर में दो बार दौरा और विधानसभा का शीतकालीन सत्र प्रशासनिक तंत्र को खासा व्यस्त रखा। इस दौरान फिर चर्चा में आचार संहिता की तारीख को लेकर हल्ला मच गया है कि 26 जनवरी को कुछ एलान करना पड़ा तो आचार संहिता की तारीख टलेगी। वैसे तो राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय और पंचायत चुनाव की पुख्ता तैयारी के साथ ही मतदाता पुनरीक्षण का काम भी पूर्णता की ओर है। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री 26 जनवरी को कुछ घोषणा करना चाहेंगे तो आचार संहिता 28 को लगेगी।

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