chhollywoodcinema Archives - शहर सत्ता https://shaharsatta.com/tag/chhollywoodcinema/ Thu, 24 Jul 2025 04:36:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 Chhollywood: अंजली सिंह चौहान का अभिनय सफर और सपना ‘बहादुर कलारिन’ https://shaharsatta.com/2025/07/24/chhollywood-anjali-singh-chauhans-acting-journey-and-dream-bahadur-kalarin/ https://shaharsatta.com/2025/07/24/chhollywood-anjali-singh-chauhans-acting-journey-and-dream-bahadur-kalarin/#respond Thu, 24 Jul 2025 04:35:50 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3127 0 मां सिर्फ किरदार नहीं, साधना है . शहरसात्ता/रायपुर।मां के किरदार को निभाना अभिनय नहीं, एक साधना है, ‘chhollywood’ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की दमदार अभिनेत्री अंजली सिंह चौहान ने अपने…

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0 मां सिर्फ किरदार नहीं, साधना है .

शहरसात्ता/रायपुर।मां के किरदार को निभाना अभिनय नहीं, एक साधना है, ‘chhollywood’ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की दमदार अभिनेत्री अंजली सिंह चौहान ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास पहचान बनाई है। 22 से अधिक सुपरहिट फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी अंजली ने ‘कारी’, ‘दइहान’, ‘मय दीया तैं मोर बाती’, ‘मया 3’, ‘बी.ए. फाइनल ईयर’, ‘माटीपुत्र’, ‘मोर छईया भुइंया 2-3’, जैसी चर्चित फिल्मों में विविध और गहरे किरदार निभाए हैं।

किरदारों में वजन.

अंजली का कहना है, “सपनों का कोई अंत नहीं होता। मां और सास जैसे किरदार मुझे गहराई से जोड़ते हैं, क्योंकि उनमें भावनाएं और चुनौतियाँ दोनों होती हैं।” उनका मानना है कि उम्र के साथ अनुभव और समझ बढ़ती है, जिससे किरदारों में वजन और सच्चाई खुद-ब-खुद आ जाती है।अभिनय के प्रति उनकी ईमानदारी इस बात से झलकती है कि अगर निर्देशक उन्हें 25 साल की लड़की का रोल दें, तो भी वह पूरे समर्पण से उस किरदार को निभाने को तैयार रहती हैं।

अभिनय के प्रति जुनून और समर्पण

जब उनसे पूछा गया कि अब तक का सबसे प्रिय किरदार कौन-सा है, तो उन्होंने बिना रुके कहा बहादुर कलारिन.यह किरदार उनके दिल के बेहद करीब है, और इसे निभाना उनका सपना है।अंजली आज भी मानती हैं कि कोई भी रोल छोटा नहीं होता, उसे बड़ा बनाना कलाकार की सोच और मेहनत पर निर्भर करता है। उनके अभिनय के प्रति जुनून और समर्पण छत्तीसगढ़ी सिनेमा की प्रेरणा है।

 

 

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Chhollywood: बस्तर के जंगलों से निकली प्रेम और प्रतिरोध की गूंज – छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘माटी’ का फर्स्ट लुक रायपुर प्रेस क्लब में लॉन्च https://shaharsatta.com/2025/07/21/chhollywood-echo-of-love-and-resistance-emerged-from-the-forests-of-bastar-first-look-of-chhattisgarhi-film-maati-launched-at-raipur-press-club/ https://shaharsatta.com/2025/07/21/chhollywood-echo-of-love-and-resistance-emerged-from-the-forests-of-bastar-first-look-of-chhattisgarhi-film-maati-launched-at-raipur-press-club/#respond Mon, 21 Jul 2025 16:29:49 +0000 https://shaharsatta.com/?p=3098 रायपुर/शहरसत्ता।छत्तीसगढ़ी chhollywood सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक नई पेशकश “माटी” का फर्स्ट लुक और पोस्टर आज रायपुर प्रेस क्लब में धूमधाम से लॉन्च किया गया। इस…

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रायपुर/शहरसत्ता।छत्तीसगढ़ी chhollywood सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक नई पेशकश “माटी” का फर्स्ट लुक और पोस्टर आज रायपुर प्रेस क्लब में धूमधाम से लॉन्च किया गया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ी सिनेमा के प्रतिष्ठित निर्देशक सतीश जैन, मनोज वर्मा और वरिष्ठ निर्माता रॉक दाशवानी विशेष रूप से मौजूद रहे।

द्वंद्व और संघर्ष से जन्मी है ये फिल्म 

फिल्म “माटी” केवल एक प्रेम कथा नहीं है, बल्कि यह बस्तर की उस जमीनी हकीकत की कहानी है, जहां प्रेम और हिंसा एक-दूसरे से टकराते हैं। जहां आदिवासी संस्कृति की खुशबू है, वहीं जल, जंगल और ज़मीन के नाम पर छीनाझपटी, खून-खराबा और सत्ता की भूख भी है। इसी द्वंद्व और संघर्ष से जन्मी है ये फिल्म  एक सशक्त प्रतिरोध की प्रतीक।जब बंदूकें संवाद करने लगती हैं, तब प्रेम सबसे बड़ा विद्रोह बन जाता है।फिल्म “माटी” उसी विद्रोह की गाथा है, जहां इंसानियत, संवेदना और प्रेम अब भी ज़िंदा है।

फिल्म से जुड़ी प्रमुख जानकारियाँ:

प्रोडक्शन:चन्द्रिका फिल्म प्रोडक्शन,

कथा व निर्माण: सम्पत झा

पटकथा/छायांकन/संपादन/निर्देशन: अविनाश प्रसाद

सहायक निर्देशक: मनोज पाण्डेय, आशुतोष प्रसाद

कैमरा असिस्टेंट: आदित्य प्रसाद, पदम नाथ कश्यप

गीत-संगीत: मनोज पाण्डेय, संतोष दानी, यशपाल ठाकुर, दिलीप पाण्डेय,नृत्य निर्देशन: राकेश यादव, भूमिका साहा

रूपसज्जा और परिधान: राकेश यादव, रीना बघेल, सविता रामटेके, नीलिमा दास मानिकपुरी,

बैकग्राउंड म्यूज़िक: अमित प्रधान, ऑडियोग्राफी: नीरज वर्मा

वितरण: लक्की रंगशाही, ग्राफिक्स: चिली फिल्म्स

पोस्टर डिज़ाइनिंग: मंडल ग्राफिक्स,ट्रैक रिकॉर्डिंग: मिलन स्टूडियो,पोस्ट प्रोडक्शन: श्री प्रसाद फिल्म्स

प्रोडक्शन कंट्रोल: शिराज गाजी, डिजिटल पार्टनर: दिग्विजय वर्मा, क्रिएटिव विजन

फिल्म से जुड़े कलाकारों और तकनीकी टीम ने प्रेस क्लब में मौजूद सभी दर्शकों और मीडिया प्रतिनिधियों से फिल्म को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

माटी” न केवल मनोरंजन करेगी, बल्कि दर्शकों को बस्तर की सच्चाइयों से रूबरू कराएगी।

31 अक्टूबर 2025 से यह फिल्म बड़े पर्दे पर दस्तक देगी और छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

 

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CHHOLLYWOOD: हीरो को तवज्जो, हीरोइनों की अनदेखी,जब ग्लैमर भारी पड़े टैलेंट पर… https://shaharsatta.com/2025/07/15/chhollywood-heroes-get-importance-heroines-are-ignored-when-glamour-overpowers-talent/ https://shaharsatta.com/2025/07/15/chhollywood-heroes-get-importance-heroines-are-ignored-when-glamour-overpowers-talent/#respond Tue, 15 Jul 2025 06:00:06 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2907 ० छालीवुड में एक भी निर्माता ऐसा नहीं, जो ‘राज़ी’, ‘मॉम’ जैसी महिला प्रधान फिल्में बनाए छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री में औसतन महीने में तीन से चार फिल्में बनती हैं,(CHHOLLYWOOD) बावजूद…

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० छालीवुड में एक भी निर्माता ऐसा नहीं, जो ‘राज़ी’, ‘मॉम’ जैसी महिला प्रधान फिल्में बनाए

छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री में औसतन महीने में तीन से चार फिल्में बनती हैं,(CHHOLLYWOOD) बावजूद इसके अब तक छालीवुड में फीमेल एक्ट्रेस की अनदेखी करते हुए इंडस्ट्री को मेल एक्टर्स के लिए समर्पित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में बेहतरीन महिला अभिनेत्रियों की न तो कमी है और न ही प्रदेश में महिला प्रधान विषयों की। बावजूद इसके, बॉलीवुड में श्रीदेवी अभिनीत फिल्म मॉम, आलिया भट्ट अभिनीत राज़ी जैसी कई ऐसी फिल्में हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर कामयाब रही हैं। कमोबेश बॉलीवुड की तर्ज पर छालीवुड में भी महिला विषयक फिल्में न बनना यह दर्शाता है कि फिल्म निर्माता मेल एक्टर्स को तरजीह देते हैं और फीमेल एक्टर्स को सिर्फ सुंदर गुलदान में रखे फूल की तरह प्रदर्शित करके अपने काम की इतिश्री कर लेते हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ की कुछ उभरती अभिनेत्रियों से शहर सत्ता के कला समीक्षक पुरन किरी ने चर्चा की। उन्होंने क्या कहा, उनके संपादित अंश यहां प्रस्तुत हैं।

ELSA GOSH ACTREES

एल्सा घोष बोलीं ,मैं शोपीस नहीं, किरदार निभाती हूं.

शहर सत्ता/रायपुर।छत्तीसगढ़ी फिल्मों में काम करने वाली बंगाल की बेटी एल्सा घोष ने महज़ 9 साल की उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था।(CHHOLLYWOOD) तेलुगु, बंगाली, उड़िया और छत्तीसगढ़ी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। 15 वर्षों के अनुभव में वे 20 से अधिक फिल्मों में नज़र आ चुकी हैं और हर बार उन्होंने दमदार भूमिका निभाई है।
ग्लैमर से आगे अभिनय मैं सिर्फ ग्लैमर का चेहरा नहीं हूं, मैं किरदार में जीती हूं।” एल्सा साफ़ कहती हैं कि वे हमेशा स्पष्ट और ईमानदार काम की प्रक्रिया में विश्वास रखती हैं।
नेपोटिज़्म और राजनीति पर: नेपोटिज़्म हर जगह है, सिर्फ छॉलीवुड में नहीं। लेकिन जीत हमेशा टैलेंट और मेहनत की होती है।”एक्ट्रेस को शोपीस समझे जाने पर: कभी-कभी ऐसा लगता है कि हमें सिर्फ सजावट की चीज़ समझ लिया गया है। गाने और सुंदर कपड़े पहनाने तक ही सीमित कर देते हैं। जबकि एक्ट्रेस उससे कहीं ज़्यादा होती है।छत्तीसगढ़ी सिनेमा की क्वालिटी पर: अगर मुझे पावर मिले, तो सबसे पहले बेहूदी फिल्मों की भीड़ को रोकूंगी। क्वालिटी ज़रूरी है, क्वांटिटी नहीं। 50 खराब फिल्मों के बाद जब कोई अच्छी फिल्म आती है, तब भी लोग नहीं देखते क्योंकि पहले से छवि खराब हो चुकी होती है।पछतावा नहीं, फोकस है: जो हुआ, जैसे हुआ, वह अनुभव था। मैं आज भी सही ट्रैक पर हूं। मैं सिनेमा को सजाने नहीं, संवारने आई हूं।नए कलाकारों के लिए संदेश: सिर्फ काम पर ध्यान दो, पॉलिटिक्स से दूर रहो और मेहनत करते जाओ ,यही रास्ता है आगे बढ़ने का।

ISHIKA YADAV ACTREES

ईशिका यादव का साफ़ कहना ,कॉम्प्रोमाइज़ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं.

छत्तीसगढ़ी फिल्मों की जानी-मानी अदाकारा ईशिका यादव ने इंडस्ट्री में अपने 7 साल पूरे कर लिए हैं। (CHHOLLYWOOD) अब तक उन्होंने 9–10 फिल्मों में अभिनय किया है और हर बार अपनी सादगी और गहराई से दर्शकों को प्रभावित किया है।
आत्मसम्मान सबसे ऊपर: मैं रोल चुनते वक्त आत्म-सम्मान को प्राथमिकता देती हूं। छत्तीसगढ़ का दर्शक सादगी पसंद करता है, इसलिए मैं सोच-समझकर काम करती हूं।
कंप्रोमाइज़ नहीं किया: मैं बहुत स्ट्रिक्ट हूं, इसलिए शायद ही किसी ने कभी कोशिश की हो कि मैं समझौता करूं।
नेपोटिज़्म पर बेबाक राय: यहां काम की कद्र होती है, रिश्तों की नहीं। जो अच्छा करता है, उसे ज़रूर मौका मिलता है।
ग्लैमर डॉल की छवि पर: मैं हमेशा से महिला-केंद्रित फिल्म करना चाहती थी, लेकिन शायद निर्माता रिस्क लेने से डरते हैं।
पछतावे भरे पल: अभिनेत्री बनने के बाद सबसे बड़ा नुकसान ये रहा कि मैं अपने परिवार और संस्कारों से दूर हो गई।
अगर प्रोड्यूसर होतीं तो:लोग सोचते हैं कि प्रोड्यूसर के पास बहुत पावर होती है, पर सच यह है कि सब कुछ उनके हाथ में नहीं होता।
नए कलाकारों को सलाह: बोलो जो सही है, ईमानदारी से काम करो और बेशरम बनो , वरना इंडस्ट्री तुम्हें कमजोर समझेगी।
आख़िरी बात: मैं अपने काम से प्यार करती हूं। किसी को परेशान नहीं किया। बस इतना चाहती हूं कि लोग जुड़ें, लेकिन परेशान न करें। हमारी इंडस्ट्री बहुत अच्छी है ,बस आपसी जलन और खींचतान खत्म करनी होगी।

RAAYA DINGORIYA ACTREES

राया डिंगोरिया ने कहा ,मुझे एक्टिंग से प्यार नहीं, लत है.

बॉलीवुड और छॉलीवुड(CHHOLLYWOOD) की चमकती अदाकारा राया डिंगोरिया का फिल्मी सफर  सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि ज़िद, जुनून और खुद पर भरोसे का उदाहरण है।
सपना नहीं था, आज पैशन है: राया बताती हैं कि उन्होंने कभी एक्टिंग का सपना नहीं देखा था। परिवार की सख़्ती के बीच जब उन्हें पहला विज्ञापन मिला, तो किस्मत ने दरवाज़ा खोला। उसके बाद ‘कुंडली भाग्य’, ‘प्रोफेसर पांडे के पांच परिवार’ जैसे टीवी शो और वेब सीरीज़ के ज़रिए अभिनय की शुरुआत हुई और फिर छत्तीसगढ़ी सिनेमा में कदम रखा। आज वे अपनी तीसरी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं।
कहानी मायने रखती है, नहीं कि कैसे दिख रही हूं: मैं वही रोल चुनती हूं जो मुझे भीतर से चुनौती दे। किरदार में डूबना मेरे लिए सबसे ज़रूरी है।
कंप्रोमाइज़ से दूरी: अब तक कभी कंप्रोमाइज़ नहीं किया। मैं कम लेकिन दमदार प्रोजेक्ट चुनती हूं, सतर्क रहती हूं।
नेपोटिज़्म पर राय: हर सेक्टर में नेपोटिज़्म है। लेकिन मुझे जो भी मिला, वह या तो ऑडिशन या काम देखकर मिला।
ग्लैमर डॉल टैग से दूरी: छॉलीवुड में मुझे जो रोल मिले, वे सशक्त किरदारों पर आधारित रहे हैं। मुझे कभी शोपीस नहीं बनाया गया।
अंतिम मंत्र: मेहनत करो और इतनी ज़िद रखो कि खुद भगवान भी न रोक सकें। सफलता का शॉर्टकट नहीं होता। जो लोग सफर को एंजॉय करते हैं, मंज़िल उन्हीं को मिलती है।
पहचान क्या चाहती हैं: मैं चाहती हूं कि लोग मुझे एक बेहतरीन कलाकार और एक अच्छे इंसान के रूप में याद करें। क्योंकि अच्छा इंसान बनना सबसे ज़रूरी है , बाकी सब पीछे पीछे आता है।

 

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Chhollywood: 25 लाख की लेनदेन के आरोपी डीओपी की तलाश https://shaharsatta.com/2025/06/24/chhollywood-search-for-dop-accused-of-25-lakh-transaction/ https://shaharsatta.com/2025/06/24/chhollywood-search-for-dop-accused-of-25-lakh-transaction/#respond Tue, 24 Jun 2025 04:26:30 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2694 0 मोहित साहू ने की पता या जानकारी देने की सोशल मीडिया में अपील शहरसात्ता/रायपुर.छॉलीवुड (Chhollywood) इंडस्ट्री में विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा।एक कथित DOP पर 25…

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0 मोहित साहू ने की पता या जानकारी देने की सोशल मीडिया में अपील

शहरसात्ता/रायपुर.छॉलीवुड (Chhollywood) इंडस्ट्री में विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा।एक कथित DOP पर 25 लाख रुपये की अवैध वसूली का गंभीर आरोप लग रहा है,कभी अश्लील गानों को लेकर विरोध,कभी फिल्म का सेंसर पास न होना,तो कभी फिल्म के हीरो का  रिलीज़ से ग़ायब हो जाना,और अब नया बम फूटा है DOP के ग़ायब होने को लेकर। Nmahi films के निर्माता मोहित साहू ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए सनसनी फैला दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके फिल्म के DOP (कैमरामैन) ग़ायब हो गए हैं।

मोहित साहू का कहना है

मोहित साहू निर्माता

जिसे भी हमारे DOP का पता हो, कृपया जानकारी दें… सुपरस्टार को शूटिंग में लाने के लिए 25 लाख लिए गए थे!

इस बयान ने छॉलीवुड सर्कल में हलचल मचा दी है।

क्या वाकई DOP ने 25 लाख लेकर काम अधूरा छोड़ दिया?क्या ये मामला सिर्फ़ प्रोफेशनल मिस कम्युनिकेशन है या इसके पीछे कोई गहरी साज़िश है? इन सवालों के जवाब तब तक अधूरे रहेंगे जब तक खुद DOP सामने आकर अपनी बात नहीं रखते।

फिलहाल, (Chhollywood) छॉलीवुड की छवि को लगते इन एक के बाद एक झटकों ने दर्शकों और फिल्म निर्माताओं,दोनों को चिंता में डाल दिया है। उम्मीद है कि सच्चाई जल्द सामने आए और इंडस्ट्री को राहत मिले।

क्या कहता है फिल्म का क्रू?

क्या मोहित साहू सबूतों के साथ आएंगे सामने?

क्या DOP चुप्पी तोड़ेंगे?

इस पूरे घटनाक्रम पर हमारी शहरसात्ता की नजर बनी हुई है। अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए।

🎥 छॉलीवुड में चल रहे इस ‘ड्रामा’ का क्लाइमैक्स क्या होगा?

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Chhollywood: मोहित साहू की फ़िल्म ‘जानकी’ को सर्टिफिकेट देने से इंकार, https://shaharsatta.com/2025/06/12/chhollywood/ https://shaharsatta.com/2025/06/12/chhollywood/#respond Thu, 12 Jun 2025 04:46:58 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2618 0 मुंबई में सेंसर बोर्ड की आपत्ति शहरसात्ता/रायपुर.छत्तीसगढ़ी (Chhollywood) फ़िल्म निर्माता मोहित साहू की बहुचर्चित हिंदी फ़िल्म ‘जानकी’ भाग 1 को सेंसर बोर्ड से झटका लगा है। मुंबई स्थित सेंसर…

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0 मुंबई में सेंसर बोर्ड की आपत्ति

शहरसात्ता/रायपुर.छत्तीसगढ़ी (Chhollywood) फ़िल्म निर्माता मोहित साहू की बहुचर्चित हिंदी फ़िल्म ‘जानकी’ भाग 1 को सेंसर बोर्ड से झटका लगा है। मुंबई स्थित सेंसर बोर्ड दफ्तर ने फ़िल्म के शीर्षक ‘जानकी’ पर आपत्ति जताते हुए प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया है।

रिवाइजिंग कमेटी और हाईकोर्ट जाने की तैयारी

इस वक्त मुंबई में मौजूद मोहित साहू  से मोबाइल पर बातचीत में कहा कि वे अब रिवाइजिंग कमेटी के पास जाएंगे और यदि वहां भी न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट की शरण लेंगे। गौरतलब है कि इस फिल्म की कहानी खुद मोहित साहू ने लिखी है और इसमें जानकी नाम एक केंद्रीय पात्र के रूप में रखा गया है।

मोहित साहू का कहना है 

लगता है सेंसर बोर्ड पुरुष प्रधान हो गया है। कहा जा रहा है कि ‘जानकी’ नाम हटाओ, तभी प्रमाणपत्र मिलेगा। मैं अपनी कहानी की हत्या नहीं कर सकता। अगर रिवाइजिंग कमेटी में भी न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा।

निर्देशक कौशल उपाध्याय ने भी तंज कसते हुए लिखा

आज समझ आया कि ‘जानकी’ से बेहतर नाम ‘कमीने’ होता। वाह सेंसर बोर्ड, वाह…

अब देखना होगा कि ‘जानकी’ को रिवाइजिंग कमेटी या न्यायालय से न्याय मिलता है या नहीं, लेकिन इतना तय है कि यह मामला सिर्फ एक फिल्म का नहीं, रचनात्मक स्वतंत्रता और नामकरण के अधिकार से जुड़ा अहम मसला बन चुका है।

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chhollywood: ड्रेसमैन बिना अधूरी है फिल्म: थानू साहू की मेहनत की कहानी https://shaharsatta.com/2025/06/09/chhollywood-a-film-is-incomplete-without-a-dressman-the-story-of-thanu-sahus-hard-work/ https://shaharsatta.com/2025/06/09/chhollywood-a-film-is-incomplete-without-a-dressman-the-story-of-thanu-sahus-hard-work/#respond Mon, 09 Jun 2025 15:21:11 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2609 शहरसत्ता/रायपुर।छत्तीसगढ़ी सिनेमा के परदे के पीछे कई ऐसे चेहरे हैं जो (chhollywood) फिल्म को संवारते हैं लेकिन अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। ऐसे ही एक समर्पित कलाकार हैं थानू साहू,जो…

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शहरसत्ता/रायपुर।छत्तीसगढ़ी सिनेमा के परदे के पीछे कई ऐसे चेहरे हैं जो (chhollywood) फिल्म को संवारते हैं लेकिन अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। ऐसे ही एक समर्पित कलाकार हैं थानू साहू,जो अब इंडस्ट्री में बतौर मुख्य ड्रेसमैन अपनी पहचान बना चुके हैं।थानू ने 2013-14 में पब्लिसिटी से शुरुआत की थी,लेकिन 2016-17 में तरुण सोनी की फिल्म ‘मयारू गंगा’ से उन्हें प्रोडक्शन में पहला मौका मिला। फिर ‘राजा भईया’, ‘चलहट कोनो देख लिहीं’,ले सुरु होंगे मया के कहानी’ जैसी फिल्मों में सहायक ड्रेसमैन के रूप में कार्य किया।

चर्चित फिल्मे मगर क्रेडिट किसी और को

फिल्म ‘वैदेही’ से उन्हें बतौर मुख्य ड्रेसमैन ब्रेक मिला, जिसके बाद ‘जीरो बनही हीरो’, ‘गुइयाँ’, ‘संघर्ष’ और ‘मोर छईयाँ भुइयाँ 3’ जैसी (chhollywood) चर्चित फिल्मों में उनका योगदान रहा। उनकी अगली फिल्म ‘मैं राजा तैं मोर रानी’ 4 जुलाई को रिलीज हो रही है।थानू कहते हैं,पहले छत्तीसगढ़ी फिल्में साल में 3-4 बनती थीं, अब हर महीने रिलीज हो रही हैं। छोटे शहरों में टॉकीज और मल्टीप्लेक्स खुल रहे हैं, जो इंडस्ट्री के लिए बड़ी उपलब्धि है।लेकिन एक अहम बात पर वे ध्यान दिलाते हैं, “फिल्मों में ड्रेस का सारा काम ड्रेसमैन करता है, फिर भी क्रेडिट में सिर्फ डिज़ाइनर का नाम होता है। हमें भी पहचान और सम्मान मिलना चाहिए।

थानू साहू जैसे कलाकारों की कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि एक फिल्म सिर्फ स्टारकास्ट या निर्देशक से नहीं, (chhollywood) बल्कि हर उस व्यक्ति की मेहनत से बनती है जो पर्दे के पीछे दिन-रात जुटा रहता है। अब समय है कि ऐसे लोगों को भी वो मंच और सम्मान मिले, जिसके वे हकदार हैं।

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chhollywood: रॉकी छॉलीवुड के नेपोलियन बोनापार्ट… https://shaharsatta.com/2025/05/31/chhollywood-rocky-the-napoleon-bonaparte-of-chhollywood/ https://shaharsatta.com/2025/05/31/chhollywood-rocky-the-napoleon-bonaparte-of-chhollywood/#respond Sat, 31 May 2025 16:35:04 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2542 Chhollywood: Rocky The Napoleon Bonaparte of Chhollywood 0 किराये में कॉमिक्स और फ़िल्मी मैगजीन से कमाई की शुरुआत , बचत और संघर्ष से बढ़ा आत्मविश्वास शहरसत्ता/रायपुर।  Rocky The Napoleon Bonaparte…

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Chhollywood: Rocky The Napoleon Bonaparte of Chhollywood

0 किराये में कॉमिक्स और फ़िल्मी मैगजीन से कमाई की शुरुआत , बचत और संघर्ष से बढ़ा आत्मविश्वास

शहरसत्ता/रायपुर।  Rocky The Napoleon Bonaparte of Chhollywood महज 5’5 फुट का छरहरा लड़का, एक छोटे से कस्बे से खाली हाथ बड़े ख्वाब लेकर राजधानी रायपुर पहुंचा। न पैसा था, न अनुभव, न नौकरी, सिर्फ अध्ययनशीलता और कर्मठता ही साथ थी। इन्हें छॉलीवुड इंडस्ट्री का नेपोलियन बोनापार्ट कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। संघर्षों से तपकर यह शख्स आज सफल बिजनेसमैन और फिल्म फाइनेंसर बन चुका है। बात हो रही है गरियाबंद से रायपुर आए रॉकी दासवानी की।

Rocky daswani(film producer)

शुरुआत गांव से

गरियाबंद एक मिट्टी की खुशबू से भरा गाँव, वहीं रॉकी का जन्म और बचपन बीता। पढ़ने का शौक बचपन से था, बारहवीं में गणित विषय के साथ अच्छे अंक लाए, लेकिन उन्हें पाठ्यक्रम से ज़्यादा साहित्यिक व ज्ञानवर्धक किताबें पसंद थीं। 12 साल की उम्र में कॉमिक्स किराए पर देना शुरू किया। पहली कमाई हुई,2 रुपये। धीरे-धीरे 3000-5000 किताबों का संग्रह बन गया।

Rockydaswani(filmproducer)

संघर्ष के दिन

रायपुर आने के बाद शुरुआती दिन बेहद कठिन थे। 300-400 रुपये किराये के कमरे में सिर्फ एक सूटकेस, पुराना पंखा और गद्दा। भूखे दिन, उधारी पर खाना, और मकान मालिक द्वारा सामान सड़क पर फेंके जाने जैसी घटनाएं आम थीं। ऐसे में संजय भैया नाम के जानने वाले ने सहारा दिया। S.T.D. बूथ में रात को बैठना और तीन कुर्सियों जोड़कर वहीं सो जाना ,ऐसे बीते कई दिन।

रॉकी-सतीश की जोड़ी क्यों खास?

मैं उनकी रचनात्मकता में हस्तक्षेप नहीं करता था, उन्हें पूरी स्वतंत्रता थी। वहीं मैं व्यावसायिक पक्ष संभालता। क्रिएटिव विज़न और प्रैक्टिकल सोच के इस संतुलन ने हमें मजबूत टीम बना दिया।

बॉलीवुड का अनुभव

बॉलीवुड एक सपना है,जो मैंने भी देखा और कोशिश की। वहाँ बहुत कुछ सीखने को मिला। आज जो भी मुझसे कुछ सीखना चाहता है, मैं तैयार हूँ।
सामाजिक और पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ, मैं समय का प्रबंधन करता हूँ,सेहत, परिवार, समाज, व्यापार सबको बराबरी से समय देता हूँ। मेरे लिए क्वालिटी ज़्यादा मायने रखती है। हर तीन-चार साल में एक फिल्म बनती है, लेकिन पूरी निष्ठा से।

गरियाबंद से रायपुर तक का सफर

खोने को कुछ नहीं था, सिर्फ संघर्ष था। हर दिन खुद को साबित करना था। यही मेरी असली पढ़ाई थी, ज़िंदगी की पढ़ाई।

भरोसे पर राय,कौन-कौन बने सहारा?

भरोसा टूटना नहीं चाहिए। कुछ लोगों ने तोड़ा, लेकिन कुछ ने संभाला भी। भरोसे से ही रिश्ते बनते हैं, और ज़िंदगी खूबसूरत बनती है।शुरुआत में चाचा राजो रासवानी के पास रहा। उन्होंने अकाउंट का काम सिखाया। धीरे-धीरे एक भरोसेमंद दोस्ती का दायरा बना। लेकिन असली सहारा मेरी किताबें रहीं, जिन्होंने मुझे टूटने नहीं दिया।

रॉकी की पसंद

निर्देशक: सतीश जैन, प्रेम चंद्राकर, मनोज वर्मा, मनीष मानिकपुरी, मृत्युंजय
अभिनेता: अनुज शर्मा, प्रकाश अवस्थी, कारण खान, अमलेश नागेश, दीपक साहू
अभिनेत्री: शिखा चिताम्बरे, एलसा घोष, अनिकृति चौहान, काजल सोनबेर, दीक्षा जायसवाल
चरित्र कलाकार: पुष्पेंद्र ठाकुर, संजय महानन्द, अनिल शर्मा, मनमोहन ठाकुर, अंजलि चौहान, उपासना वैष्णव

युवाओं के लिए संदेश

बड़ा सोचिए, अपने इंटरेस्ट को पहचानिए, ईमानदारी से मेहनत कीजिए। लगन से किया गया काम कभी व्यर्थ नहीं जाता।

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Chhollywood: रामलीला के लक्ष्मण से “गिरधारी” तक स्टारडम का सफर… https://shaharsatta.com/2025/05/30/chhollywood-the-journey-of-stardom-from-ramlilas-laxman-to-girdhari/ https://shaharsatta.com/2025/05/30/chhollywood-the-journey-of-stardom-from-ramlilas-laxman-to-girdhari/#respond Fri, 30 May 2025 17:39:43 +0000 https://shaharsatta.com/?p=2534 0 मनमोहन की सिने ज़िंदगी की असल और अनकट कहानी उनकी जुबानी   शहर सत्ता/रायपुर। छइयां भुइंया के ‘गिरधारी’ यानि की छत्तीसगढ़ (Chhollywood) के असली माटी पुत्र ठाकुर मनमोहन सिंह…

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0 मनमोहन की सिने ज़िंदगी की असल और अनकट कहानी उनकी जुबानी

 

शहर सत्ता/रायपुर। छइयां भुइंया के ‘गिरधारी’ यानि की छत्तीसगढ़ (Chhollywood) के असली माटी पुत्र ठाकुर मनमोहन सिंह बचपन में गाँव की रामलीला में लक्ष्मण का किरदार निभाया करते थे। लोगों की तालियों और तारीफों ने उनके अंदर एक कलाकार को जन्म दिया। धीरे-धीरे लोग कहने लगे हीरो जैसा दिखता है तू,और यही बात दिल में उतर गई। इसी उम्मीद के साथ निकल पड़े सपनों की नगरी मुंबई की ओर। लेकिन मुंबई में सपने जितने बड़े थे, संघर्ष उससे भी महाकाय निकला। तीन साल तक लगातार मेहनत, ऑडिशन, रिजेक्शन और मायूसियों के बाद हारकर वापस गाँव लौटना पड़ा। लगा सब खत्म हो गया।फिर एक दिन मौका मिला फिल्म छइहा भुइया में खलनायक ‘गिरधारी’ का किरदार। इस रोल ने न सिर्फ गाँव बल्कि शहर तक में तहलका मचा दिया। लोग उनका असली नाम भूल गए और ‘गिरधारी’ के नाम से पहचानने लगे। आज भी मनमोहन को लोग उसी नाम से पुकारते हैं, मनमोहन उर्फ गिरधारी।

संघर्ष और सिद्धांत की कहानी

विलन होते हुए भी मैंने फिल्में छांट कर की। मनमोहन ने यह साबित कर दिया कि एक अभिनेता का आत्मसम्मान उसकी सबसे बड़ी पूंजी होती है। (Chhollywood) उन्होंने कभी ‘हीरो-हीरोइन की मर्जी’ वाली फिल्मों में घुसपैठ नहीं की, बल्कि खुद के टैलेंट पर विश्वास रखा। कोई ताकत मुझे बिजी नहीं देखना चाहती थी। ये लाइन छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री में छिपी हुई राजनीति की गहराई तक झांकती है। एक कलाकार के संघर्ष को दबाने की कोशिशें हर कोने में दिखीं। निजी रिश्ते, गलतफहमियाँ और टूटता विश्वास भी सहा हूं।

रिश्ते में आई दरार,पर हद में किया विरोध

लेकिन हर रिश्ते में दरार किसी एक घटना से नहीं, बल्कि राजनीति और आर्थिक खेलों से आती है।(Chhollywood) मेकअप लगा था, डांस कर रहा था, लेकिन अचानक एल्बम से हटा दिया गया। एक कलाकार के आत्मसम्मान को झकझोरने वाला अनुभव। मनमोहन ने प्रतिक्रिया में बाल और दाढ़ी तक मुंडवा दी — ये केवल लुक चेंज नहीं, एक मानसिक विद्रोह था। छत्तीसगढ़ी सिनेमा में सियासी खौफ का आलम है। यहाँ जो पॉलिटिक्स होती है, वैसी असल राजनीति में भी नहीं होती। मनमोहन की यह टिप्पणी इंडस्ट्री में पनपते अहंकार और गुटबाज़ी पर सीधा वार है। यूनियन बनाकर क्या करोगे, जब कलाकार ही अपने हक के लिए खड़े नहीं होते। यह सिस्टम नहीं, कलाकारों की निष्क्रियता पर सवाल है।

खलनायक बना फिर भी निर्विवाद रहा

मनमोहन का इंडस्ट्रीज में गुटबाजी, प्रतिस्पर्धा और मनमुटाव को लेकर स्पष्ट लेकिन सटीक संदेश है। (Chhollywood) उनका मानना है कि जो भी मतभेद हैं, पर्दे के पीछे रहना चाहिए, क्योंकि हम जैसे कलाकार आप जैसे लोगों से सीखते हैं। यह कथन विनम्रता, अनुभव और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। एक सच्चा कलाकार वही है, जो तमाम विवादों के बीच भी गरिमा बनाए रखे। मनमोहन की कहानी केवल एक कलाकार की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जो संघर्ष करता है, टूटता है, मगर सिद्धांतों से समझौता नहीं करता। “गिरधारी” बनकर लोगों के दिलों में जगह बनाई, और मनमोहन बनकर सिनेमा में अपनी सच्ची पहचान कायम रखी।

भूपेश सरकार ने बरती उदासीनता, लेटलतीफी

छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम को लेकर मेरा स्पष्ट मत है, इसे धीमी गति देने का सबसे बड़ा जिम्मेदार भूपेश बघेल और उनकी कांग्रेस सरकार है। पिछले 5 वर्षों तक प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रही। फिल्म विकास निगम की नीति पहले से तैयार थी, सब्सिडी की व्यवस्था भी प्रस्तावित थी, मगर उसके बावजूद निगम की स्थापना नहीं की गई। जब सारी रूपरेखा तय थी, तो इसे अमल में लाने से किसने रोका? साफ है कि (Chhollywood) फिल्म विकास निगम के गठन में देरी, और उसे रोकने में कांग्रेस सरकार की बड़ी भूमिका रही है। अब जब हमारी सरकार आई है, तो हमने फिल्म सिटी की घोषणा कर दी है, और इसके लिए केंद्रीय फंड भी आ चुका है। डेढ़ से दो साल के भीतर फिल्म सिटी बनकर तैयार हो जाएगी। जहाँ तक फिल्म विकास निगम की स्थापना का सवाल है, तो अभी आयोग की 16 या 18 पदों की लिस्ट बची हुई है। संभव है कि आने वाले दिनों में उसमें अध्यक्ष की घोषणा हो जाए और निगम का गठन पूरा हो जाए।

हिंदी से ज्यादा क्षेत्रीय फिल्म को मिले सब्सिडी

भूपेश बघेल सरकार ने एक पक्षपातपूर्ण नीति बनाई थी, जिसमें छत्तीसगढ़ी फिल्मों को कम और हिंदी फिल्मों को ज़्यादा सब्सिडी देने की बात थी।(Chhollywood) मैं चाहता हूँ कि यह नियम बदला जाए। कम से कम 50-50 का अनुपात होना चाहिए, बल्कि चूंकि यह छत्तीसगढ़ राज्य का फिल्म विकास निगम है, तो छत्तीसगढ़ी फिल्मों को 60% सब्सिडी मिलनी चाहिए और हिंदी को 40%। मुझे आशा है कि माननीय मुख्यमंत्री जी इस विषय को गंभीरता से लेंगे और छत्तीसगढ़ी सिनेमा को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे। बाहरी लोगों को निगम में स्थान देने की जो नीति कांग्रेस सरकार ने बनाई थी, वह छत्तीसगढ़ी आवाज़ को दबाने वाली थी। अब समय है कि हम अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपने सिनेमा को प्राथमिकता दें।

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