सिद्धालय की ओर महा-प्रयाण: तप शिरोमणि का कालजयी ‘समाधि-मरण’ जहाँ नश्वर माटी इसी धरा पर छूट गई, और विशुद्ध आत्मा ने मृत्यु को ‘महोत्सव’ बना लिया
शहर सत्ता/रायपुर। (Jain community of Chhattisgarh)संयम के शिखर साधक गादिया परिवार के स्तंभ, वात्सल्य और सादगी के प्रतीक संथारा साधक, तप शिरोमणि श्री मीठालाल जी गादिया अपनी 33 दिनों की जागृत संथारा साधना पूर्ण समता के साथ, 5 मार्च 2026 को शाम 06:07 मिनिट को देह का त्याग कर ‘समाधि-मरण’ को प्राप्त हो गए हैं। यह तेरापंथ के स्वर्णिम इतिहास का एक जीवंत ‘मृत्यु-महोत्सव’ है।
जहाँ एक ओर पंचम काल की यह माटी शिथिल हो रही थी, वहीं दूसरी ओर उनकी आत्मा गौतम स्वामी की भांति अंतिम राग से मुक्त होकर, सुधर्मा स्वामी की ‘आगम-चेतना’ को ओढ़े, और प्रथम आचार्य भिक्षु स्वामी के अडिग ‘सत्य और समता’ के मार्ग पर चलते हुए सिद्ध-यात्रा पर निकल पड़ी। जयाचार्य की ‘विघ्न हरण’ ढाल को अपनी श्वासों में चरितार्थ करते हुए, उनकी विशुद्ध चेतना अब सीधे श्री सीमंधर स्वामी के समवशरण में नतमस्तक है।

आज अंतिम दर्शन एवं बैकुंठी यात्रा
पुण्यात्मा की मृत्यु महोत्सव यात्रा आज 06 मार्च दिन शुक्रवार को प्रातः 10:30 बजे हमारे निज निवास से मारवाड़ी श्मशान घाट के लिए प्रस्थान करेगी। निवास: C-22, न्यू दिल्ली स्वीट्स, शैलेन्द्र नगर, रायपुर से यात्रा निकलेगी। “गौतम सा ‘मोह-क्षय’ किया, भिक्षु सा तप महान। विघ्न-हरण कर देह तजी, पाया पद निर्वाण॥”
चिकत्सक और मेडिकल साइंस भी मौन
संयम के शिखर साधक गादिया परिवार के स्तंभ श्री मीठालाल जी गादिया को 33 दिनों पूर्व राजधानी रायपुर के एक प्रसिद्ध अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तीन से चार दिनों तक चिकत्सकों ने मेडिकल साइंस की वह साडी तरकीबें आजमाए और आखिरकार हाथ खड़े कर दिए थे। बता दें कि जीवन रक्षक दवाओं और मशीनों के भरोसे रखने के बाद लंबा चौड़ा बिल भी परिवार को दिया गया था। चिकत्सकों और मेडिकल साइंस को अपने तपोबल से संयम के शिखर साधक श्री मीठालाल जी गादिया और परिवारजनों के समक्ष जागृत संथारा साधना किये। जिन्हें चिक्तिसक महज चंद घंटे या दिन का मेहमान बता रहे थे उस पुण्यात्मा ने 33 दिनों तक बिना किसी जीवन रक्षक दवाओं, मशीनों के समाज, साधकों और मेडिकल साइंस को भी चौंका दिया तथा देह का त्याग कर ‘समाधि-मरण’ को प्राप्त हुए।






