150 ईरानी छात्राओं की मौत की जांच की मांग:ईरान का अमेरिका पर मिसाइल हमले का आरोप; US बोला- हम स्कूलों को निशाना नहीं बनाते
शहर सत्ता/रायपुर। (Fifth Day Of The US-Israel-Iran War )अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज पांचवां दिन है। खामेनेई का आज तेहरान में अंतिम संस्कार किये जाने की खबर है। साथ ही उनके अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया जायेगा। वहीँ UN के मानवाधिकार कार्यालय ने ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले की जांच कराने की मांग की है। इस हमले में 150 छात्राओं की मौत हुई थी।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा है कि इस मामले की जल्द, निष्पक्ष और पूरी जांच होनी चाहिए। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिकी सेना जानबूझकर किसी स्कूल को निशाना नहीं बनाती। वहीं इजराइल ने कहा है कि वह इस घटना की जांच कर रहा है। जिनेवा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने कहा कि जिस पक्ष ने हमला किया है, उसी की जिम्मेदारी है कि वह इसकी जांच करे। उन्होंने इस घटना को बहुत डरावना बताया और कहा कि सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे इस संघर्ष की तबाही और दर्द को दिखाती हैं।

नया सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई
ईरान जंग के पांचवे दिन पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 88 मौलवियों वाली एक्सपर्ट्स असेंबली ने उन्हें चुना है। अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले में मौत हो गई थी।
मौलवियों की इस असेंबली का कोई औपचारिक सत्र नहीं हुआ है, बल्कि सुरक्षा कारणों से वोटिंग ऑनलाइन कराई गई। इससे पहले खबर आई थी कि नए सुप्रीम लीडर का चयन अगले हफ्ते होगा।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अपने दूसरे बेटे मुजतबा खामेनेई को साल 2024 में उत्तराधिकारी बनाया था। खामेनेई ने बीमारी के चलते यह फैसला लिया था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की एक्सपर्ट असेंबली ने 26 सितंबर 2024 को ही नए सुप्रीम लीडर का चुनाव कर लिया था। खामेनेई ने असेंबली के 60 सदस्यों को बुलाकर गोपनीय तरीके से उत्तराधिकारी पर फैसला लेने कहा था।
मुजतबा अपने पिता की तरह ही इस्लामिक मामलों के जानकार हैं। वे पहली बार 2009 में दुनिया की नजरों में आए। उन्होंने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से कुचला, जिसमें कई लोग मारे गए। तब राष्ट्रपति चुनाव में कट्टरपंथी नेता महमूद अहमदीनेजाद को सुधारवादी नेता मीर होसैन मौसवी पर जीत मिली थी।






