सालभर में एक बार विजयादशमी के दिन मां कंकाली विराजती हैं नागा साधुओं के मठ में
शहर सत्ता/रायपुर। (Temple of Capital Raipur)राजधानी रायपुर के ब्राम्हण पारा स्थित मठ के अंदर 1000 साल पुराने नागा साधुओं के कमंडल, कपड़े, चिमटा, त्रिशूल, ढाल और कुल्हाड़ी की आज पूजा की गई। साल में एक बार भक्तों के लिए खुलने वाले इस मठ में कंकाली मां और नागा साधुओं के शस्त्रों का दर्शन करने लम्बी कतार लगी रही। महंत कृपाल गिरी महाराज के बारहवीं पीढ़ी मठ की देखरेख कर रही है। इसकी महिमा का बखान और किसलिए यह परंपरा शुरू हुई इसका बखान कंकाली मठ के विजित गिरी ने किया। उन्होंने बताया कि एक दिन माता ने स्वप्न में कृपाल गिरी महाराज को निर्देश दिया कि तालाब किनारे मंदिर निर्माण के बाद प्रतिमा को वहां स्थापित किया जाए।

लेकिन मठ से मंदिर में माता को स्थापित करने के बाद से महंत कृपाल गिरी दुखी रहते थे। तब माता जी ने उन्हें दर्शन दिया और कहा कि विजय दशमी के दिन वे अपने पुराने घर में विराजमान होगी। इसलिए दशहरा के दिन मठ खोला जाता है और वहां पूजा होती है। दरअसल, विजयादशमी पर 18 घंटे के लिए मठ के कपाट खोला गया है। लोग सुबह 6 बजे से मठ में दर्शन करने पहुंचे। आज रात 12 बजे मंदिर का पट बंद कर दिया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन कंकाली देवी अपने अस्त्र शस्त्र के साथ मठ में विराजमान होती हैं।







