पहली ‘हाँ’ और ‘ना’ ने सिखाया क्या करना है.
नविन पंडिता की शरसत्ता से एक्सक्लूसिव बातचीत.
मैंने अपने Bollywoodकरियर की पहली ‘हाँ’ से सीखा कि मुझे क्या नहीं करना है, और पहली ‘ना’ से सीखा कि मुझे क्या करना है,कुछ इसी अंदाज़ में अपनी सफर की शुरुआत पर बात करते हैं बॉलीवुड एक्टर नवीन पंडिता, जो अपने हर फैसले को सीख में बदलना जानते हैं।

फिटनेस फ्रीक माने जाने वाले नवीन बताते हैं, मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि फिट दिखूं, कपड़े मुझ पर सूट करें और स्क्रीन पर अच्छा दिखूं। लेकिन एक बार मुझे एक शॉर्ट फिल्म के लिए थोड़ा अनफिट लुक अपनाना था, पेट बाहर निकालना पड़ा। मैं तैयार था, लेकिन शूट के वक़्त मुझे लुक की वजह से रिप्लेस कर दिया गया।शायद मैं उस फ्रेम में फिट नहीं बैठा पर मैंने पूरी कोशिश की थी।

वो आगे कहते हैं, जिस तरह का आर्टिस्ट मैं बनना चाहता हूं, उसमें लुक बदलना, फिजिक बदलना, ये सब मेरी आर्टिस्ट्री का हिस्सा है। उनके लिए शरीर भी एक कलाकार का माध्यम है, चाहे पतले का रोल हो या हट्टे-कट्टे का।

आउटसाइडर होने पर नवीन बेझिझक बोलते हैं,
ये एक माइंडसेट की बात है। अगर काम आता है, सीखने की इच्छा है, तो इंडस्ट्री में बहुत काम है।वो कहते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत और कार्तिक आर्यन जैसे स्टार्स की सक्सेस इस बात का सबूत है कि टैलेंट और मेहनत अपना रास्ता बना ही लेते हैं। हालांकि, कुछ तजुर्बे कड़वे भी रहे। एक टीवी रोल के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि सेट पर ट्रीटमेंट वैसा ही मिलता है जैसा आपका रोल होता है।

“मेरा सेल्फ-एस्टीम डाउन हो गया था। उसे दोबारा गेन करने में वक्त लगा।पर सीख यहीं से मिली,बहुत सोच समझ कर ‘हाँ’ बोलिए, और अपने गट इंस्टिंक्ट की सुनिए। नवीन मानते हैं कि आर्टिस्ट के लिए इंस्टिंक्ट सबसे बड़ा गाइड होता है, अच्छा, बुरा, सही, गलत सब वही बताता है।

सुपरस्टार बनने की चाह तो है, लेकिन वो कहते हैं, “पता नहीं बना हूँ या नहीं, पर मैं सिर्फ खुद को बेहतर बनाने में लगा हूं।नवीन हर तरह की फिल्में करना चाहते हैं,मसाला, आर्ट, सब्जेक्ट बेस्ड क्योंकि उनके लिए असली लड़ाई खुद से है, और जीत भी खुद पर ही होनी चाहिए।
और अंत में, वो बड़ी विनम्रता से कहते हैं
मैंने कुछ खोया नहीं, सिर्फ पाया है… क्योंकि नंगे आए थे, धीरे-धीरे पा रहे हैं। और इसके लिए मैं दिल से grateful हूं।







