CHHOLLYWOOD: हीरो को तवज्जो, हीरोइनों की अनदेखी,जब ग्लैमर भारी पड़े टैलेंट पर…

० छालीवुड में एक भी निर्माता ऐसा नहीं, जो ‘राज़ी’, ‘मॉम’ जैसी महिला प्रधान फिल्में बनाए

छत्तीसगढ़ी सिनेमा इंडस्ट्री में औसतन महीने में तीन से चार फिल्में बनती हैं,(CHHOLLYWOOD) बावजूद इसके अब तक छालीवुड में फीमेल एक्ट्रेस की अनदेखी करते हुए इंडस्ट्री को मेल एक्टर्स के लिए समर्पित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में बेहतरीन महिला अभिनेत्रियों की न तो कमी है और न ही प्रदेश में महिला प्रधान विषयों की। बावजूद इसके, बॉलीवुड में श्रीदेवी अभिनीत फिल्म मॉम, आलिया भट्ट अभिनीत राज़ी जैसी कई ऐसी फिल्में हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर कामयाब रही हैं। कमोबेश बॉलीवुड की तर्ज पर छालीवुड में भी महिला विषयक फिल्में न बनना यह दर्शाता है कि फिल्म निर्माता मेल एक्टर्स को तरजीह देते हैं और फीमेल एक्टर्स को सिर्फ सुंदर गुलदान में रखे फूल की तरह प्रदर्शित करके अपने काम की इतिश्री कर लेते हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ की कुछ उभरती अभिनेत्रियों से शहर सत्ता के कला समीक्षक पुरन किरी ने चर्चा की। उन्होंने क्या कहा, उनके संपादित अंश यहां प्रस्तुत हैं।

ELSA GOSH ACTREES

एल्सा घोष बोलीं ,मैं शोपीस नहीं, किरदार निभाती हूं.

शहर सत्ता/रायपुर।छत्तीसगढ़ी फिल्मों में काम करने वाली बंगाल की बेटी एल्सा घोष ने महज़ 9 साल की उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था।(CHHOLLYWOOD) तेलुगु, बंगाली, उड़िया और छत्तीसगढ़ी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। 15 वर्षों के अनुभव में वे 20 से अधिक फिल्मों में नज़र आ चुकी हैं और हर बार उन्होंने दमदार भूमिका निभाई है।
ग्लैमर से आगे अभिनय मैं सिर्फ ग्लैमर का चेहरा नहीं हूं, मैं किरदार में जीती हूं।” एल्सा साफ़ कहती हैं कि वे हमेशा स्पष्ट और ईमानदार काम की प्रक्रिया में विश्वास रखती हैं।
नेपोटिज़्म और राजनीति पर: नेपोटिज़्म हर जगह है, सिर्फ छॉलीवुड में नहीं। लेकिन जीत हमेशा टैलेंट और मेहनत की होती है।”एक्ट्रेस को शोपीस समझे जाने पर: कभी-कभी ऐसा लगता है कि हमें सिर्फ सजावट की चीज़ समझ लिया गया है। गाने और सुंदर कपड़े पहनाने तक ही सीमित कर देते हैं। जबकि एक्ट्रेस उससे कहीं ज़्यादा होती है।छत्तीसगढ़ी सिनेमा की क्वालिटी पर: अगर मुझे पावर मिले, तो सबसे पहले बेहूदी फिल्मों की भीड़ को रोकूंगी। क्वालिटी ज़रूरी है, क्वांटिटी नहीं। 50 खराब फिल्मों के बाद जब कोई अच्छी फिल्म आती है, तब भी लोग नहीं देखते क्योंकि पहले से छवि खराब हो चुकी होती है।पछतावा नहीं, फोकस है: जो हुआ, जैसे हुआ, वह अनुभव था। मैं आज भी सही ट्रैक पर हूं। मैं सिनेमा को सजाने नहीं, संवारने आई हूं।नए कलाकारों के लिए संदेश: सिर्फ काम पर ध्यान दो, पॉलिटिक्स से दूर रहो और मेहनत करते जाओ ,यही रास्ता है आगे बढ़ने का।

ISHIKA YADAV ACTREES

ईशिका यादव का साफ़ कहना ,कॉम्प्रोमाइज़ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं.

छत्तीसगढ़ी फिल्मों की जानी-मानी अदाकारा ईशिका यादव ने इंडस्ट्री में अपने 7 साल पूरे कर लिए हैं। (CHHOLLYWOOD) अब तक उन्होंने 9–10 फिल्मों में अभिनय किया है और हर बार अपनी सादगी और गहराई से दर्शकों को प्रभावित किया है।
आत्मसम्मान सबसे ऊपर: मैं रोल चुनते वक्त आत्म-सम्मान को प्राथमिकता देती हूं। छत्तीसगढ़ का दर्शक सादगी पसंद करता है, इसलिए मैं सोच-समझकर काम करती हूं।
कंप्रोमाइज़ नहीं किया: मैं बहुत स्ट्रिक्ट हूं, इसलिए शायद ही किसी ने कभी कोशिश की हो कि मैं समझौता करूं।
नेपोटिज़्म पर बेबाक राय: यहां काम की कद्र होती है, रिश्तों की नहीं। जो अच्छा करता है, उसे ज़रूर मौका मिलता है।
ग्लैमर डॉल की छवि पर: मैं हमेशा से महिला-केंद्रित फिल्म करना चाहती थी, लेकिन शायद निर्माता रिस्क लेने से डरते हैं।
पछतावे भरे पल: अभिनेत्री बनने के बाद सबसे बड़ा नुकसान ये रहा कि मैं अपने परिवार और संस्कारों से दूर हो गई।
अगर प्रोड्यूसर होतीं तो:लोग सोचते हैं कि प्रोड्यूसर के पास बहुत पावर होती है, पर सच यह है कि सब कुछ उनके हाथ में नहीं होता।
नए कलाकारों को सलाह: बोलो जो सही है, ईमानदारी से काम करो और बेशरम बनो , वरना इंडस्ट्री तुम्हें कमजोर समझेगी।
आख़िरी बात: मैं अपने काम से प्यार करती हूं। किसी को परेशान नहीं किया। बस इतना चाहती हूं कि लोग जुड़ें, लेकिन परेशान न करें। हमारी इंडस्ट्री बहुत अच्छी है ,बस आपसी जलन और खींचतान खत्म करनी होगी।

RAAYA DINGORIYA ACTREES

राया डिंगोरिया ने कहा ,मुझे एक्टिंग से प्यार नहीं, लत है.

बॉलीवुड और छॉलीवुड(CHHOLLYWOOD) की चमकती अदाकारा राया डिंगोरिया का फिल्मी सफर  सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि ज़िद, जुनून और खुद पर भरोसे का उदाहरण है।
सपना नहीं था, आज पैशन है: राया बताती हैं कि उन्होंने कभी एक्टिंग का सपना नहीं देखा था। परिवार की सख़्ती के बीच जब उन्हें पहला विज्ञापन मिला, तो किस्मत ने दरवाज़ा खोला। उसके बाद ‘कुंडली भाग्य’, ‘प्रोफेसर पांडे के पांच परिवार’ जैसे टीवी शो और वेब सीरीज़ के ज़रिए अभिनय की शुरुआत हुई और फिर छत्तीसगढ़ी सिनेमा में कदम रखा। आज वे अपनी तीसरी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं।
कहानी मायने रखती है, नहीं कि कैसे दिख रही हूं: मैं वही रोल चुनती हूं जो मुझे भीतर से चुनौती दे। किरदार में डूबना मेरे लिए सबसे ज़रूरी है।
कंप्रोमाइज़ से दूरी: अब तक कभी कंप्रोमाइज़ नहीं किया। मैं कम लेकिन दमदार प्रोजेक्ट चुनती हूं, सतर्क रहती हूं।
नेपोटिज़्म पर राय: हर सेक्टर में नेपोटिज़्म है। लेकिन मुझे जो भी मिला, वह या तो ऑडिशन या काम देखकर मिला।
ग्लैमर डॉल टैग से दूरी: छॉलीवुड में मुझे जो रोल मिले, वे सशक्त किरदारों पर आधारित रहे हैं। मुझे कभी शोपीस नहीं बनाया गया।
अंतिम मंत्र: मेहनत करो और इतनी ज़िद रखो कि खुद भगवान भी न रोक सकें। सफलता का शॉर्टकट नहीं होता। जो लोग सफर को एंजॉय करते हैं, मंज़िल उन्हीं को मिलती है।
पहचान क्या चाहती हैं: मैं चाहती हूं कि लोग मुझे एक बेहतरीन कलाकार और एक अच्छे इंसान के रूप में याद करें। क्योंकि अच्छा इंसान बनना सबसे ज़रूरी है , बाकी सब पीछे पीछे आता है।

 

pooran kiri

जन्म तारीख 9 जनवरी 1980 को चारामा जिला कांकेर में हुआ। छत्तीसगढ़ी फिल्मों से लेकर बॉलीवुड और कई चैनलों में अभिनय कर चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया स्टैंडर्ड वर्ल्ड वाच न्यूज चैनल में सीनियर क्रिएटिव हेड समेत वीडियो एडिटर भी रहे। वर्तमान में शहर सत्ता साप्ताहिक अख़बार में बतौर कला समीक्षक कार्यरत है और सफल अभिनेता भी हैं। Actor, author, journalist

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