शहरसात्ता /रायपुर.आज (raipur city) रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही महिलाएं पारंपरिक परिधान और सोलह श्रृंगार में सजकर वट वृक्ष की पूजा के लिए मंदिरों औरसार्वजनिक स्थलों पर एकत्रित हुईं। बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर,प्रियदार्शनि नगर, मठ-मंदिरों और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बरगद के पेड़ों के नीचे पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ, जहां महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर कच्चा सूत बांधा और सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण किया।

वट सावित्री व्रत का महत्व
वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो इस वर्ष सोमवती अमावस्या के साथ संयोग में पड़ा। इस दुर्लभ योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री ने अपने तप और दृढ़ निश्चय से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए थे। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।
शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
अमावस्या तिथि 26 मई को दोपहर 12:11 बजे से प्रारंभ होकर 27 मई सुबह 8:31 बजे तक रही। पूजा का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक था, जिसे वट वृक्ष की पूजा के लिए विशेष शुभ माना गया।





