0 पति-पत्नी ने मिलकर रची ठगी की साजिश, स्व सहायता समूह बनाकर बैंकों से निकाले लाखों के ऋण
शहरसत्ता/डेस्क। गांव की औरतें जब एकजुट होती हैं, तो वे सिर्फ चूल्हा-चौका नहीं संभालतीं, बल्कि पूरे समाज का हौसला (CRIME) बन जाती हैं। लेकिन जब उनके भरोसे को ही कोई तोड़ दे, तो दर्द और बेबसी का कोई हिसाब नहीं रहता।गांधीनगर थाना क्षेत्र की रहने वाली कुछ महिलाएं आज इसी पीड़ा से गुजर रही हैं।
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‘रोजगार भत्ता’ के नाम पर लोन का जाल
महेश पाल और उसकी पत्नी मधुमिता पाल ने अंबिकापुर के कई वार्डों में महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन करवाया। महिलाओं को बताया गया कि सरकार रोजगार भत्ता दे रही है — और इसके तहत उन्हें 10,000 रुपये मिलेंगे। लेकिन सच्चाई कुछ और ही थी। हर महिला के नाम पर ₹40,000 से ₹45,000 तक के लोन अलग-अलग बैंकों से निकाले गए। (CRIME) महिलाओं को नकद में सिर्फ ₹10,000 दिए गए और विश्वास दिलाया गया कि बैंक की किश्तें वे खुद जमा करेंगे।
जब बैंक का नोटिस पहुंचा घर
लेकिन जैसे ही लोन की किश्तें नहीं भरी गईं, बैंकों से नोटिस और रिकवरी का दबाव आने लगा। तब जाकर महिलाओं को पता चला कि वे धोखाधड़ी का शिकार बन चुकी हैं।महिलाओं के विरोध के बाद पति-पत्नी ने 12 मार्च 2025 को नोटरी दस्तावेज बनाकर (CRIME) यह लिखित आश्वासन दिया कि वे कर्ज चुकाएंगे। 30 से अधिक महिलाएं बनीं शिकार पीड़ितों में कलावती, मिथला यादव, मुन्नी देवी, सरिता देवी, अनिता तिर्की जैसी दर्जनों महिलाएं शामिल हैं, गांधीनगर पुलिस ने शिकायत के बाद आरोपी पति-पत्नी के खिलाफ धारा 318(4), 3(5) के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.







