
बॉबी को पहला बड़ा ब्रेक सोनी लिव की वेब सीरीज जहानाबाद से मिला, जहाँ उन्होंने मुंबई के असिस्टेंट डायरेक्टर्स के साथ मिलकर बड़े स्केल पर काम किया। वहीं से उन्हें लगा कि अब वे वाकई फिल्मी दुनिया का हिस्सा हैं। उनकी पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म में सुपरस्टार अनुज शर्मा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और सबके सामने तारीफ़ की, जिसे बॉबी अपनी ज़िंदगी का टर्निंग पॉइंट मानते हैं।

एक इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म में तो उन्होंने अकेले ही कई डिपार्टमेंट्स संभाले, कैमरा असिस्टेंट से लेकर प्रोडक्शन तक। अंग्रेज़ी भाषा की दिक्कतों और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद उनकी जुगाड़ू सोच और शांत दिमाग ने डायरेक्टर को बेहद प्रभावित किया।

बॉबी के मुताबिक, एक सफल एसोसिएट डायरेक्टर बनने के लिए मैनेजमेंट, क्रिएटिव विज़न और प्रॉब्लम सॉल्विंग की स्किल्स बेहद ज़रूरी हैं। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि बड़े डायरेक्टर बनने से पहले छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स में असिस्टेंट की भूमिका निभाकर अनुभव हासिल करें।

बॉबी आगे चलकर एनिमेशन फिल्मों का निर्देशन करना चाहते हैं और खुद को एक सफल एनिमेशन फ़िल्ममेकर के रूप में देखना चाहते हैं।







