
संतोष मानते हैं कि सिर्फ लुक्स की पहचान कलाकार को संतुष्ट नहीं कर सकती। वे विविध और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में यकीन रखते हैं। सीमाएं तोड़ने की बात पर उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों को पार कर एक किरदार में खुद को ढाला।

बॉलीवुड में आउटसाइडर होने के दर्द पर वो साफ कहते हैं, “यहां सिर्फ टैलेंट नहीं, किस्मत और जुझारूपन भी चाहिए।” उन्होंने स्वीकार किया कि करियर बचाने के लिए कुछ नकारात्मक रोल भी निभाने पड़े जिन्हें करते वक्त आत्मग्लानि हुई, पर परफॉर्मेंस का संतोष मिला।

सुपरस्टार बनने की चाह में उन्होंने गांव, मिट्टी और बचपन की बहुत-सी चीजें खो दीं, लेकिन आज भी सकारात्मक सोच के साथ जद्दोजहद कर रहे हैं। युवाओं को उनका संदेश है मस्ती में मेहनत करो, भक्ति और शक्ति से जीवन को साधो।







