0 आज इंडस्ट्रीज के सबसे बेस्ट वीडियो एडिटर और रिकॉर्डिस्ट में शुमार हुआ नूतन सिन्हा का नाम
शहर सत्ता/रायपुर। साल 2002 की बात है। एक नौजवान, जिसका दिल वीडियो एडिटिंग (chhollywood) की दुनिया में बस चुका था, ने अपनी मंज़िल तय कर ली। हुआ यूँ कि एक दिन अपने दोस्त के साथ उसके दोस्त के घर पहुँचा, जहाँ शादी-ब्याह के वीडियो की एडिटिंग चल रही थी। स्क्रीन पर नाचते-गाते रंगीन दृश्य, और कंप्यूटर पर कट-पेस्ट करते हाथों ने उसे इतना मोहित किया कि उसने उसी पल तय कर लिया — मुझे वीडियो एडिटर बनना है!
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रात-रात भर जागकर, बिना थके-रुके, उसने एडिटिंग सीखनी शुरू की। जल्द ही उसका नाम छत्तीसगढ़ी एल्बमों की दुनिया में चमकने लगा। गाने, एल्बम, लोकगीत — सब पर उसकी एडिटिंग की छाप दिखने लगी। इसी दौर में उसने एक न्यूज़ चैनल जॉइन किया, जहाँ अनुभव की नई दुनिया खुली। लेकिन असली मोड़ तब आया जब एक दिन चैनल से घर लौटते वक्त उसकी मुलाकात दिलीप बैस जी से हुई। एल्बम के समय के परिचित दिलीप जी ने पूछा, “क्या तुम मनोज वर्मा जी के स्वप्निल डिजिटल स्टूडियो जॉइन करोगे?”
वो प्रस्ताव उसके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। उसने तुरंत हाँ कहा और अगले ही दिन स्टूडियो का हिस्सा बन गया। स्टूडियो में उसने न जाने कितनी फिल्मों की एडिटिंग की, हर प्रोजेक्ट के साथ निखरता गया। फिर एक और चुनौती सामने आई — वहाँ के ऑडियो रिकॉर्डिस्ट को सरकारी नौकरी मिल गई, और पोस्ट खाली हो गई। लेकिन उसने इस चुनौती को भी मौके में बदल दिया। खुद ही ऑडियो का काम सीख लिया और अब एक साथ दो भूमिकाओं में काम कर रहा है — एडिटर और रिकॉर्डिस्ट। आज ये कहानी सिर्फ उसके सफ़र की नहीं, बल्कि जुनून, मेहनत और सीखने की ललक की मिसाल बन चुकी है। यही जज़्बा है जो सपनों को हक़ीक़त में बदलता है।









