
समाधान है – लेकिन इच्छाशक्ति नहीं
अगर नगर निगम शहर में फिल्म पोस्टर लगाने के लिए चिन्हित जगहें तय कर दे, और उन्हीं जगहों को बुकिंग सिस्टम के तहत आवंटित करे – तो ना केवल यह झगड़े बंद होंगे बल्कि इससे नगर निगम का राजस्व भी बढ़ेगा।जिस फिल्म की रिलीज पहले है, वो पहले बुकिंग करे – उसका हक पक्का। अगर एक ही दिन दो फिल्में हैं, तो तय स्थान को समान रूप से बांट दिया जाए।

फायदे क्या होंगे
राजस्व में इजाफा: हर फिल्म से पोस्टर लगाने की फीस वसूली जाए तो लाखों का अतिरिक्त इनकम संभव है।झगड़ों पर लगाम: प्रमोटर्स के बीच के टकराव खत्म होंगे।शहर की खूबसूरती बनी रहेगी: अंधाधुंध पोस्टरबाज़ी से छुटकारा मिलेगा।इंडस्ट्री को सम्मान मिलेगा: व्यवस्थित प्रचार से छत्तीसगढ़ी सिनेमा की छवि निखरेगी।

निगम सिर्फ मुकदर्शक बना रहेगा या कोई ठोस कदम उठाएगा
छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री ने अब तक अपने दम पर बहुत कुछ किया है।अब वक्त आ गया है कि सिस्टम भी सहयोग करे और समाधान निकाले!







