0 राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह ने हरी गुजर पैलेस में अंतिम सांस ली
शहर सत्ता/रायपुर। Sakti State Chhattisgarh : पूर्व केबिनेट मंत्री एवं सक्ती रियासत के राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह ने हरी गुजर पैलेस में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनते ही लोगो मे शोक की लहर दौड़ गई। आज 29 अप्रैल को दोपहर 2:45 बजे उन्होंने अंतिम सांसें लीन। उनके निधन की खबर से प्रदेश कांग्रेस से लेकर मध्य प्रदेश के पुराने कांग्रेसियों में शोक व्याप्त है।
वृद्धावस्था और उम्रजन्य समस्याओं से स्वर्गीय सक्ती महाराज लम्बे वक्त से जूझ रहे थे। बता दें कि सुरेंद्र बहादुर सिंह तत्कालीन मध्य प्रदेश में सबसे खाटी राजनेताओं में गिने जाते थे। कांग्रेस की सियासत में भी उनका ऊंचा मुकाम था। सक्ती रियासत के राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह की मजबूत सियासी शख्सियत ऐसी थी कि जब भी वो भोपाल प्रवास करते तो उनके राजनीतिक दुश्मन भी सियासी आशंकाओं से दुबक जाते थे। उनके जानने वाले बताते हैं कि राजा साहब सचुनाव में खड़े होते थे तो कहीं भी वोट और उन्हें चुनाव में जीत दिलाने की हाथ जोड़कर विनती वाला पोस्टर भी नहीं लगते थे। उनका सियासी सफर काफी दबंगई भरा रहा और तात्कालीन मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ खासकर सक्ती, बिलासपुर, जांजगीर का वर्चस्व बरक़रार रहा।

राजा सक्ती के सामने दिग्विजय भी थे नतमस्तक
कांग्रेस राजनीति में चाणक्य मने जाने वाले दिग्विजय सिंह भी राजा सक्ती की सियासी बखत का अंदाजा लगा चुके थे। मध्य प्रदेश की राजनीती से किनाराकश कर चुके एक वरिष्ठ कांग्रेसी ने हमें एक बार का वाक्या बताया जिसमें राजा साहब के जन्मदिन के मौके पर दिग्गी राजा ने उन्हें एक महंगी पेन गिफ्ट की, राजा सक्ती ने पेन को उलट-पलट कर देखा और कीमत पूछने के बाद चुटकी लेते हुए कहा था क्यों दिग्गी एक राजा को दूसरा राजा कैसी गिफ्ट देते हैं तुम्हें अंदाज़ा नहीं है। और यह कहते हुए उन्होंने अपनी शर्ट की ऊपरी जेब से एक चमचमाती गोल्ड मेड पेन निकाले और उनको थमते हुए कहा था पेन की ढक्कन में ऊपर हिरा भी जड़ा है रख लो। यह किस्सा जब हुआ तब चश्मदीद कांग्रेसी वहां मौजूद थे।
राजकुमार कॉलेज विवाद के बाद शुरू हुआ डाउन फॉल
छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद मध्य प्रदेश की सियासत के सितारे रहे राजा सुरेंद्र बहादुर छत्तीसगढ़ निर्माण और अजित जोगी शासन काल में ज्यादा परेशान और कमजोर होते गए। उनका ऐतिहासिक राजकुमार कॉलेज में एक तरह से अकेले आधिपत्य ज़माने, सॉफ्ट लोन के नाम पर कथित तौर पर कॉलेज को गिरवी रखने की कोशिश और आजीवन राजकुमार कॉलेज प्रबंधन कमेटी का अध्यक्ष बने रहने वाले कथित प्रयासों के अलावा महंगे शौक ने सभी राजाओं को उनका विरोधी बना दिया था। लंबे आरकेसी विवाद और संघर्ष के बाद ही सरगुजा महाराज कहे जाने वाले टीएस सिंहदेव की रजवाड़ों के कॉलेज में एंट्री हुई थी। तब से आज तक अब पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव आरकेसी के सबसे ताकतवर राजा कहलाते हैं।

सक्ती रियासत में गद्दी और संपत्ति को लेकर विवाद
धर्मेंद्र सक्ती रियासत के 5वें राजा घोषित किये गए थे। राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह की रजामंदी के पश्चात् ही उनका राज्याभिषेक करीब 4 साल पूर्व किया गया था। तभी से रिश्तेदारों और पैलेस से ब्लड लाइन ही नहीं वफादारी निभाने वालों के बीच गद्दी-संपत्ति को लेकर खींचतान मच गई थी। मामला कोर्ट तक चला गया था और कोर्ट ने रोक भी लगा रखा था। पूर्व मंत्री और सक्ती राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह की पत्नी गीता राणा सिंह करीब 4-5 माह पहले 30 साल बाद नेपाल से लौटी थीं। उन्होंने बयान जारी कर आरोप लगाया था कि उनके पति (राजा) के नौकर संपत्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। वहीं सुरेंद्र बहादुर ने भी जांजगीर एसपी को लिखित शिकायत देकर कहा था कि रानी उनकी जानकारी और इजाजत के बगैर महल में रहने लगी हैं।

रियासत 156 साल पुरानी, धर्मेंद्र राजा बनने वाले दूसरे दत्तक पुत्र
सक्ती रियासत का इतिहास 156 साल पुराना है। 1865 में 14 रियासतों का गठन हुआ था। उस समय सक्ती छोटी रियासत थी। इसके सबसे पहले राजा हरि गुजर हुए। धर्मेंद्र इस रियासत का राजा बनने वाले दूसरे दत्तक पुत्र हैं। उन्हें सुरेंद्र बहादुर सिंह ने गोद लिया था। इनसे पहले राजा रुपनारायण ने अपने छोटे भाई चित्रभान सिंह के बेटे लीलाधर को गोद लिया था। आज से 107 साल पहले सन 1914 में रूपनारायण के दत्तक पुत्र लीलाधर राजा बने थे। 18 वर्ष की उम्र में 1960 में सुरेंद्र बहादुर सिंह राजा बने थे।








